ब्रेकिंग न्यूज़ 

भुखमरी की कगार पर दुनिया, सिर्फ भारत से है उम्मीद

भुखमरी की कगार पर दुनिया, सिर्फ भारत से है उम्मीद

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन की जंग (Russia Ukraine war) की वजह से दुनिया में खाद्य संकट पैदा हो गया है। खास तौर पर अफ्रीका (Africa) में भूख से मौतें शुरु हो गई हैं। ऐसे में पूरी दुनिया उम्मीद भरी निगाहों से भारत की तरफ देख रही है।

अफ्रीका में अकाल की आहट

रूस और यूक्रेन दुनिया के दो बड़े गेहूं उत्पादक देश हैं। लेकिन दोनों के जंग में उलझने की वजह से गेहूं की सप्लाई चेन बाधित हो गई है। जिसकी वजह से दुनिया के कई हिस्सों में खाद्य संकट पैदा हो गया है। हालांकि गेहूं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। लेकिन वो बंदरगाहों पर पड़ा पड़ा सड़ रहा है। उसे जरुरतमंद देशों तक पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही है।

हालत ये है कि दुनिया की 2.5 अरब आबादी पर भुखमरी का संकट मंडराने लगा है। खास तौर पर अफ्रीका में भुखमरी और कुपोषण के मामलों में तेजी से बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र(United Nation) लगातार अकाल के संकट की चेतावनी जारी कर रहा है। लेकिन आपस में उलझे हुए देश उसकी अपील पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिसकी वजह से स्थिति गंभीर होती जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र के डराने वाले आंकड़े

– कोरोना वायरस(Corona Virus) और फिर रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से खाद्य असुरक्षित लोगों की संख्या 135 मिलियन से बढ़कर 276 मिलियन हो गई है।
– 21 मिलियन बच्चे कुपोषण और भुखमरी की कगार पर हैं।
-811 मिलियन लोग रोज रात को भूखे सोने के लिए मजबूर हो रहे हैं
– दुनिया में खाद्य असामानता बढ़ती जा रही है
-गरीब मुल्कों में कुपोषण और भुखमरी के मामले बढ़ते जा रहे हैं

पुतिन से लगाई जा चुकी है गुहार

पिछले महीने यानी मई में हुई बैठकों में भुखमरी की समस्या पर चर्चा की गई। रूस के राष्ट्रपति पुतिन(Russian President Putin) को इससे अवगत कराया गया। लेकिन उनका कहना है कि जब तक रूस पर से पश्चिमी देश प्रतिबंध नहीं हटा लेते हैं, तब तक वह इस मामले में कोई मदद नहीं कर पाएंगे। रूस का कहना है कि उस पर लगे प्रतिबंधों(sanction on Russia) की वजह से अनाज वैश्विक बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा है। जिसकी वजह से खाद्य संकट खड़ा हो रहा है। युद्ध की वजह से दुनिया में गेहूं की कीमत में 45 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो गई है।

दुनिया को भारत से मदद की उम्मीद

चीन के बाद भारत ही दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है। लेकिन उसकी घरेलू जरुरतें भी काफी ज्यादा हैं। क्योंकि भारत की 135 करोड़ जनता का पेट भरना उसकी पहली जिम्मेदारी है। इसीलिए दुनिया को होने वाले गेहूं के निर्यात में भारत का योगदान महज 4.1 फीसदी है। जबकि गेहूं के दूसरे बड़े निर्यातक रूस, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, अर्जेंटीना, यूक्रेन और कजाकिस्तान हैं।

हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी(PM Modi) ने दुनिया को भुखमरी की समस्या से बचाने के लिए गेहूं की आपातकालीन जरुरत होने पर सप्लाई करने का वादा किया है। केन्द्र सरकार की नीतियों की वजह से पिछले 8 सालों में भारत में गेहूं उत्पादन बढ़ा है।

– साल 2021-22 में भारत ने 109.6 मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन किया
– इसमें से 8.2 मीट्रिक टन निर्यात किया गया
– साल 2020-21 में मात्र 2.6 मीट्रिक टन गेहूं का निर्यात किया गया था

हालांकि फिलहाल भारत ने अपनी घरेलू जरुरतों को देखते हुए गेहूं के निर्यात पर रोक लगा रखी है। लेकिन दुनिया को भुखमरी से बचाने के लिए भारत गेहूं का निर्यात करने के लिए तैयार है। लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।

ऐसा नहीं है कि दुनिया में गेहूं की कोई कमी है। रूस और यूक्रेन के बंदरगाहों पर लाखों टन गेहूं पड़ा हुआ है। लेकिन उसकी सप्लाई नहीं हो पा रही है। जिसकी वजह से खाद्य संकट खड़ा हो गया है। इन हालातों में अमेरिका और यूरोपीय देशों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह अतिरिक्त गेहूं को जरुरतमंद देशों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार करें। अन्यथा एक तरफ गेहूं सड़ता रहेगा और दूसरी तरफ लोग भूख से मर जाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published.