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देश को मिलेंगे नए राष्ट्रपति, चुनाव की प्रक्रिया शुरु

देश को मिलेंगे नए राष्ट्रपति, चुनाव की प्रक्रिया शुरु

नई दिल्ली: वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath kovind) का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो जाएगा। उसके पहले नए राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरु हो गई है। चुनाव आयोग ने इसके लिए चुनावी कार्यक्रम घोषित कर दिया है।

कोई भी दल व्हिप जारी नहीं करेगा

राष्ट्रपति(President Of India) देश का मुखिया होता है और वो दलगत राजनीति से उपर माना जाता है। यही वजह है कि चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए किसी भी राजनीतिक दल को व्हिप जारी करने से मना कर दिया है। जिससे कि हर सांसद और विधायक अपनी मर्जी से राष्ट्रपति पद के लिए उचित कैंडिडेट का चयन कर सके।

इस बार के चुनाव में राज्यसभा (Rajya Sabha) और लोकसभा(Lok Sabha) के कुल 776 सांसदों के अलावा राज्य विधानसभाओं के विधायक मतदान में हिस्सा लेंगे। चुनाव आयोग ने प्रेस कांफ्रेन्स करके पूरे कार्यक्रम की घोषणा की है। जो कि कुछ इस प्रकार है-

– नोटिफिकेशन जारी करने की तिथि- 15 जून
– नामांकन की आखिरी तारीख – 29 जून
– नामांकन की जांच – 30 जून
– नामांकन वापस लेने का आखिरी तारीख- 2 जुलाई
– मतदान- 18 जुलाई
-मतगणना- 21 जुलाई

संसद और विधानसभाओं में होगी वोटिंग

राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए नई दिल्ली के संसद भवन (Parliament) और राज्यों की विधानसभाओं (State Assembly) में मतदान की प्रक्रिया संपन्न होगी। हालांकि आपात स्थिति में सांसद और विधायक कहीं और से भी वोट डाल सकते हैं लेकिन इसके लिए उन्हें 10 दिन पहले चुनाव आयोग को सूचित करना होगा।

चुनाव आयोग के खास पेन से होगा मतदान

राष्ट्रपति चुनाव के लिए देश के सांसदों की वोट की वैल्यू 543200(5 लाख 43 हजार 200) है। जबकि राज्यों के विधायकों के वोट की वैल्यू 543231(5 लाख 43 हजार 231) है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए देश के कुल 4809 जन प्रतिनिधि मतदान करेंगे। जो कि निर्वाचित सांसद और विधायक हैं। राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने के लिए चुनाव आयोग (Election Commission Of India) सभी वोटरों को खास तरह की पेन उपलब्ध कराएगा।

वोटर्स को अपने पसंद के कैंडिडेट के सामने 1, 2 या 3 लिखकर प्रायोरिटी बतानी होगी। लेकिन यह काम सिर्फ चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए पेन से ही करना होगा।

कुछ इस तरह तय होती है वोटों की कीमत

राष्ट्रपति चुनाव के लिए सांसदों के वोटों की कीमत अलग तरह से तय होती है। इसके लिए राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मतों की कीमत जोड़ी जाती है। अब इस सामूहिक वेटेज को राज्यसभा और लोकसभा के चुने गए सदस्यों की कुल संख्या से भाग दे दिया जाता है। इस तरह जो नंबर प्राप्त होता है, वह एक सांसद के वोट की कीमत होती है। अगर इस तरह भाग देने पर शेष 0.5 से ज्यादा बचता हो तो उसे एक माना जाता है।

इसी प्रकार विधायकों की वोट की कीमत तय करने के लिए जिस राज्य का विधायक हो, उसकी आबादी देखी जाती है। इसके साथ उस प्रदेश के विधानसभा सदस्यों की संख्या का ध्यान रखा जाता है। विधायकों के वोट की कीमत निकालने के लिए उस राज्य की आबादी को चुने गए विधायक की संख्या से भाग दे दिया जाता है। उससे जो नंबर प्राप्त होता है। उसमें 1000 से भाग दे दिया जाता है। इससे जो नंबर प्राप्त होता है, वह उस राज्य के एक विधायक के वोट की कीमत मानी जाती है। इस नंबर में 1000 से भाग देने पर अगर बाकी 500 से ज्यादा बचे तो उसकी कीमत में 1 नंबर अतिरिक्त जोड़ दिया जाता है।

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