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देशी गाय की नस्ल बचाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय चिंतित

देशी गाय की नस्ल बचाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय चिंतित

नई दिल्ली: भारत में गायों की पूजा की जाती है और उन्हें माता कहा जाता है। ये सिर्फ कहने की बात नहीं है बल्कि वास्तव में भारतीय नस्ल की गाएं बेहद खास हैं। वैज्ञानिक शोध से साबित हुआ है कि भारतीय नस्ल की गायों का दूध विदेशी नस्ल की गायों के दूध से ज्यादा बेहतर होता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देशी गायों की नस्ल को विदेशी नस्ल से मिलाया जा रहा है। जिससे देशी गायों की नस्ल सिकुड़ती जा रही है। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने इसपर चिंता जाहिर की है।

देशी गायों के कृत्रिम गर्भाधान से सुप्रीम कोर्ट चिंतित

सुप्रीम कोर्ट(Supreme court of India) में पिछले दिनों एक जनहित याचिका दायर की गई। जिसमें देशी गायों(Indigenous Cows) की नस्ल को विदेशी नस्ल से मिलाने पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि देशी गायों और विदेशी सांड के मिलन से नई नस्ल तैयार हो रही है। जिससे शुद्ध भारतीय नस्ल की गाएं विलुप्त होती जा रही हैं।

इस याचिका को सर्वोच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने बेहद गौर से सुना। इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली शामिल थे। उन्होंने याचिका के आधार पर केन्द्र सरकार और राज्यों को नोटिस जारी किया है।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि देशी गायों का विदेशी सांडों के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान कराना संविधान के आर्टिकल 48 के विरुद्ध है। यह याचिका कृष्ण देव जगरलमुंडी ने दायर की है।

देश में बढ़ती जा रही है विदेशी नस्ल की गायों की संख्या

साल 2019 में कराई गई पशुगणना के मुताबिक विदेशी नस्ल की गायों(Exotic Foreign Breeds) की संख्या 29.3 फीसदी बढ़ गई है। जबकि देशी नस्ल की गायों की संख्या में 6 फीसदी की गिरावट आ गई है।

इसकी वजह ये है कि देशी नस्ल की गायों का दूध भले ही उच्च गुणवत्ता वाला होता है, लेकिन वह कम मात्रा में होता है। उधर विदेशी गायों का दूध कम गुणवत्ता वाला होता है। लेकिन वह ज्यादा मात्रा में दूध देती हैं। विदेशी जर्सी और होलेस्टिन फ्रीजन नस्ल की गाएं तो देशी नस्ल की गायों से कई गुना ज्यादा दूध देती हैं। लेकिन उनका दूध देशी गायों की तरह अच्छा नहीं होता है।

ऐसे में ज्यादा दूध के लालच में पशुपालक देशी गायों की नस्ल को विदेशी गायों से मिला रहे हैं। जिससे देशी गायों की नस्ल तबाह हो रही है।

अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं भारतीय पशुपालक

भारत में कभी 39 शुद्ध भारतीय नस्ल गाएं होती थीं। लेकिन हमने अपनी खुद की लगभग 39 भारतीय नस्लों को भुला दिया। स्थिति ये है कि अगर आज शुद्ध भारतीय नस्ल की गाय की जरुरत हो तो लाले पड़ जाते हैं। अधिकतर गाएँ क्रॉस ब्रीडिंग की शिकार हो नॉन डिस्क्रिप्ट की श्रेणी में आ गयी हैं जिनकी कोई नस्ल ही नहीं है।

इसमें गलती आम लोगों के साथ सरकारी योजनाओं और शोध संस्थानो की भी है। आज के समय में A1 और A2 श्रेणी के दूध को लेकर जो बहस चल रही है उसमें हमारी देसी नस्ल की गाएँ सर्वोत्तम A2 किस्म के दूध के उत्पादन की वजह से वरीयता क्रम में सबसे आगे हैं।

साथ ही अगर देसी नस्लों के पालन की बात हो तो मूलतः इसी जलवायु की होने के कारण उनका प्रतिरोधी तंत्र बहुत अच्छा होता है, उन्हें भारत की गर्मी से ज्यादा परेशानी नहीं होती, प्रबंधन और दवाओं का खर्च कम होता है। एक विदेशी नस्ल की गाय की तुलना में और तो 100% शुद्ध विदेशी नस्ल का पालन सम्भव भी तो नहीं भारतीय जलवायु में, जो गाएँ आती हैं वह अधिकतम 85-90 % ही शुद्ध होती हैं शेष 10% भारतीय सीमन की मिलावट होती है।

क्या फर्क है देशी और विदेशी गाय के दूध में

देसी गाय के दूध में 207 गुणसूत्रों बाले डी. एन. ए. में 67वें स्थाम पर अमीनो एसिड प्रोलीन है। लगभग 8000 वर्ष पहले इन गायों का एक बड़ा जत्था किन्हीं कारणों से यूरोपीय क्षेत्र में गया। इसके अपने आपको उस क्षेत्र के अनुकूल ढालने की प्रक्रिया में उनके डी. एन. ए. में प्रोलीन की जगह हिस्टीड़ाईन आ गया इसका यह परिणाम हुआ क़ि 67वें स्थान पर मौजूद जो प्रोलाइन- 66 वे स्थान पर मौजूद आईसोन अमीनो एसिड मजबूती से बंधा रहता है। वहीं 67वें स्थान पर मौजूद हिस्टेड़ाइन पाचक एंजाइम द्वारा आसानी से टूट कर मानव शरीर में एक पेप्टाइड (बीसीएम 7) छोड़ते हैं ।

बीसीएम 7 अफीम जैसी चीज है। यह एक तेज ऑक्सीकरण करने वाला एजेंट है । इसका संबंध बच्चों की डाइबिटीज एक मानसिक रोग ऑटिसिज्म रोग प्रतिरोधक क्षमता और हृदय रोगों से भी सीधा सीधा है।

जैसे जैसे भारत में हिस्टाइडेन वाले दूध का प्रयोग बढा है वैसे वैसे डाइबिटीज और हृदय रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पूरी दुनिया का डेरी उद्योग बहुत तेजी से अपने दूध को अच्छा दूध यानी बीसीएम 7 मुक्त बनाने में लगा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस अच्छे दूध का नाम A2 दूध है।

सौभाग्य से भारत की सभी देसी नस्लें अच्छा दूध यानी A2 दूध देती है। लेकिन ज्यादा दूध के लालच में भारत के पशुपालक A1 दूध देने वाली विदेशी गायों को प्रोत्साहन दे रहे हैं।

लेकिन ये सिलसिला अब रोकना होगा।

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