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आगजनी करने वाले कभी नहीं बन पाएंगे अग्निवीर, जानिए कौन है हिंसा का मास्टरमाइंड

आगजनी करने वाले कभी नहीं बन पाएंगे अग्निवीर, जानिए कौन है हिंसा का मास्टरमाइंड

नई दिल्ली: जो भी दंगाई ट्रेनें जला रहे हैं और सड़कों पर दंगा कर रहे हैं, उनका फौजी बनने का सपना कभी नहीं पूरा होगा। सेना ने यह साफ कर दिया है। इसके अलावा दंगा भड़काने वालों की भी पहचान कर ली गई है और सजा देने की प्रक्रिया शुरु हो गई है। लेकिन देश भर में चल रहे हिंसक प्रदर्शन की वजह से आम लोग बेहद परेशान हैं।

दंगाई कभी नहीं बन सकते अग्निवीर

सेना ने एक प्रेस कांफ्रेन्स करके यह स्पष्ट कर दिया है कि केन्द्र सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में सड़क पर आगजनी करने वाले दंगाई कभी भी भारतीय सेना का हिस्सा नहीं बन सकते हैं। रविवार को थलसेना, वायुसेना और नौसेना की तरफ से एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने अग्निपथ योजना के खिलाफ देश भर में चल रहे हिंसक प्रदर्शन पर कड़ा रुख दिखाया।

जनरल पुरी ने साफ तौर पर दंगाइयों को आईना दिखाया और स्पष्ट कर दिया कि आगजनी और हिंसा फैलाने वाले अनुशासनहीन तत्वों के लिए सेना जैसे अनुशासनप्रिय संगठन में कोई जगह नहीं हैं। उन्होंने मुख्य रुप से जो बातें कही वो इस प्रकार हैं-

– सेना में भर्ती की इच्छा रखने वाले हर अभ्‍यर्थी को एक एफिडेविट देना होगा।

– सभी अभ्यर्थियों का कड़ा पुलिस वेरिफिकेशन होगा।

-जिन युवाओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया है और उनपर मुकदमा दर्ज है, वो सेना से नहीं जुड़ सकेंगे

– अभ्यर्थियों को इनरोलमेन्ट फॉर्म में ही घोषणा करनी होगी कि उन्होंने प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया है। तभी उनका फॉर्म आगे बढ़ाया जाएगा।

– सेना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अग्निपथ योजना किसी भी हाल में वापस नहीं की जाएगी।

– अग्निवीर भर्ती की प्रक्रिया अगले महीने शुरु हो जाएगी। युवा धरने-प्रदर्शन में समय गंवाने की बजाए फिजिकल टेस्ट की तैयारी करें।

-फिलहाल जवानों को जो पे-अलाउंसेज मिल रहे हैं, अग्निवीरों को उससे ज्यादा मिलेंगे।

– अग्निपथ योजना का प्रारुप पहले से तय था। सेना या सरकार किसी दबाव में नहीं है।

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युवाओं को भड़काने वालों पर कार्रवाई

अग्निपथ योजना के खिलाफ भड़के दंगों पर सेना ने अपनी प्रेस कांफ्रेन्स में यह भी संकेत दिया है कि युवाओं को धरना-प्रदर्शन और आगजनी के लिए भड़काने वालों की पहचान हो गई है। अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक सेना में भर्ती की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थान युवाओं को भड़का रहे हैं। क्योंकि अग्निपथ योजना की वजह से उनका धंधा चौपट होने का खतरा है। उनके खिलाफ अब कार्रवाई जारी है-

– केन्द्र सरकार ने गलत सूचना फैलाने वाले 35 व्हाट्सएप्प ग्रुप को बैन कर दिया है। जिसपर युवाओं को भड़काने वाले संदेश फैलाए जा रहे थे।

– बिहार में तीन और तेलंगाना में एक कोचिंग संस्थान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। तेलंगाना में एक कोचिंग संचालक को गिरफ्तार भी किया गया है। पुलिस ने बताया है कि यह कोचिंग संचालक स्थानीय स्तर पर फैली हिंसा का मास्टरमाइंड था।

– बिहार में अग्निपथ योजना के खिलाफ दंगों के मामले में 148 एफआईआर दर्ज की गई है और 800 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बिहार के मसौढ़ी में लगभग 7 कोचिंग संस्थानों की भूमिका दंगा भड़काने में संदिग्ध पाई गई है। सिर्फ मसौढ़ी से ही लगभग 200 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

– उत्तर प्रदेश में 34 एफआईआर दर्ज की गई है और 387 संदिग्ध दंगाइयों की गिरफ्तारी की गई है।

– तेलंगाना में सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर हुई आगजनी के मामले में 46 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

– गुजरात में 14 लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं उत्तराखंड में प्रदर्शन के मामले में लगभग 400 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

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विपक्ष युवाओं को भड़काने में जुटा

अग्निपथ योजना के खिलाफ हिंसा की आग में घी डालते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बयान दिया है कि ‘यह योजना देश के युवाओं को मार डालेगी, सेना को खत्म कर देगी… कृपया इस सरकार की मंशा देखें और इसे गिराएं। ऐसी सरकार लाओ जो देश के लिए हो और देश की संपत्ति की रक्षा करें।’

प्रियंका वाड्रा के बयान पर पूर्व सेना प्रमुख और सांसद जनरल वी.के.सिंह ने कहा कि ‘कांग्रेस इसलिए नाराज है क्योंकि ईडी राहुल गांधी से पूछताछ कर रही है। इसलिए, पार्टी सरकार के सबसे अच्छे काम में भी दोष निकाल रही है। कांग्रेस पार्टी युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। उनके पास केवल एक ही काम बचा है, वह है किसी भी सरकारी योजना की आलोचना करना और उसे रोकना। वे सरकार को बदनाम करने के लिए देश में अशांति पैदा करना चाहते हैं।’

आम जनता है बेहद परेशान

सरकार और विपक्ष की इस जंग में आम जनता बेहद परेशान है। खास तौर पर रेल यात्रियों को बेहद मुश्किल हो रही है। धरना प्रदर्शन की वजह से पिछले चार दिनों में 500 ट्रेनें रद्द करनी पड़ी है। जिसमें से 250 ट्रेनें सिर्फ रविवार को रद्द हुई हैं। इसके अलावा लगभग 1300 ट्रेनों के परिचालन पर असर पड़ा है।

– बिहार, बंगाल, असम, पूर्वोत्तर भारत और पूर्वी उत्तर प्रदेश से गुजरने वाली ज्यादातर रेलगाड़ियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

– नई दिल्ली, पटना, मुगलसराय, वाराणसी जैसे बड़े रेलवे स्टेशनों पर यात्री दो-दो दिन से इंतजार में बैठे हैं और परेशान हो रहे हैं।

– ईस्टर्न रेलवे ने कोलकाता और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली लगभग सभी ट्रेनों को रद्द कर दिया है।

हालांकि राहत की बात है कि धरना प्रदर्शन अब धीरे धीरे कम हो रहा है। केन्द्र सरकार और सेना के कड़े रुख की वजह से प्रदर्शनकारी शांत होने लगे हैं। लेकिन विपक्ष अब भी प्रदर्शन भड़काने में जुटा हुआ है और देश भर में बंद का आह्वान कर रहा है।

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