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महाराष्ट्र का नया किंग: देवेन्द्र फडणवीस

महाराष्ट्र का नया किंग: देवेन्द्र फडणवीस

मुंबई: महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक घमासान ने देश को एक नया रणनीतिकार दिया है, वो हैं देवेन्द्र फडणवीस। उनके हाथ में एक बार फिर महाराष्ट्र की कमान आ सकती है। अभी तक मिली खबरों के मुताबिक देवेन्द्र फडणवीस जल्दी ही राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं।

लेकिन इसमें अड़चन बस ये है कि बुजुर्ग राज्यपाल महोदय कोरोना से पीड़ित हैं। जिसकी वजह से वह सार्वजनिक कार्यों से दूरी बरत रहे हैं। इस बीच महाराष्ट्र भाजपा अपने खेमे के 106 विधायकों और समर्थक निर्दलीयों को एकजुट कर रही है। जिससे की सरकार बनाने के दावे में कोई अड़चन ना आए।

मैं समंदर हूं, लौटकर आऊंगा

‘मेरा पानी उतरता देखकर किनारे पर घर मत बसा लेना, मैं समंदर हूं लौटकर आऊंगा’। महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज और पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने 1 दिसंबर 2019 को यह कसम खाई थी। जो कि अब जाकर पूरी होने वाली है। उन्होंने साल 2019 में महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव के बाद सरकार बना ली थी। लेकिन बहुमत साबित न कर पाने की वजह से फडणवीस को इस्तीफा देना पड़ गया था। तब उन्होंने विधानसभा में सार्वजनिक रुप से बयान दिया था कि वह लौटकर जरूर आएंगे।

देवेन्द्र फडणवीस का वह मशहूर बयान सुनने के लिए यहां पर क्लिक करें।

अब लगभग ढाई सालों बाद जाकर फडणवीस की ये शपथ पूरी होने वाली है। उद्धव ठाकरे की सरकार की विदाई हो रही है और फडणवीस सत्ता में वापस लौट रहे हैं।

शिवसेना का अंतर्विरोध और फडणवीस की रणनीति रंग लाई

महाराष्ट्र में सत्ता के लालच में शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार तो बना ली। लेकिन इस गठबंधन में जबरदस्त वैचारिक मतभेद था। जिसकी वजह से शिवसेना में अंदरुनी मतभेद उभरने लगे थे। क्योंकि शिवसेना हिंदुत्व आधारित पार्टी है। उसके विधायकों को एनसीपी और कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति रास नहीं आ रही थी। यही नहीं शिवसेना विधायक अपने मुख्यमंत्री से मिल भी नहीं पाते थे। उनके इलाके में विकास के लिए फंड भी नहीं मिलता था, जबकि कांग्रेस और एनसीपी के विधायकों को इस तरह की दिक्कत नहीं आ रही थी। जिसकी वजह से शिवसेना विधायकों में असंतोष गहराता जा रहा था।

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उद्धव ठाकरे के पूरे कार्यकाल के दौरान देवेंद्र फडणवीस लगातार आक्रामक रहे और नेता प्रतिपक्ष के तौर पर महा विकास अघाड़ी सरकार की खामियों को जोर शोर से उठाया। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप, कोविड के दौरान कुप्रबंधन और राज्य सरकार की हिंदूविरोधी नीतियों को हमेशा निशाने पर रखा। उनके सतत प्रयासों का ही ये परिणाम है कि उद्धव ठाकरे की सरकार अब गिरने वाली है।

फडणवीस को मिला दोस्ताना व्यवहार का फायदा

देवेन्द्र फडणवीस बेहद व्यवहार कुशल है। वो सभी लोगों से बेहद गर्मजोशी से मिलते हैं और सभी की मदद की कोशिश करते हैं। फडणवीस के इसी व्यवहार की वजह से उनके दोस्तों की संख्या बेहद ज्यादा है। शिवसेना से बगावत करने वाले एकनाथ शिंदे भी फडणवीस के मुरीदों में से एक हैं।

दरअसल जब देवेन्द्र फडणवीस मुख्यमंत्री थे तब उनकी कैबिनेट में एकनाथ शिंदे भी वरिष्ठ मंत्री थे। उस समय शिंदे को अपने मंत्रालय का काम करने की खुली छूट थी। मुख्यमंत्री का कोई हस्तक्षेप उनके कार्य में नहीं होता था। यहां तक कि फडणवीस और शिंदे के बीच के संबंध इतने गहरे थे कि मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने अपनी कई अहम जिम्मेदारियां भी शिंदे को सौंप रखी थी। हालांकि दोनों की पार्टियां अलग अलग थीं। लेकिन दोनों की बीच का सामंजस्य बेहद अच्छा था।

फाइल फोटो

लेकिन जब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार बनी, तब शिंदे के हाथ बांध दिए गए। जिसकी वह से एकनाथ बेहद घुटन महसूस करने लगे थे। उन्हें लगने लगा कि भाजपा की सरकार के दौरान उन्हें जितनी स्वतंत्रता मिली हुई थी, वो अपनी ही पार्टी यानी शिवसेना की सरकार के दौरान खत्म हो गई है। ठीक ऐसा ही एहसास शिवसेना के विधायक भी कर रहे थे। जो कि उद्धव ठाकरे से बगावत की प्रमुख वजह बनी।

उधर सत्ता में नहीं रहने के बाद भी फडणवीस ने एकनाथ शिंदे से करीबी रिश्ते बनाकर रखे। यहां तक कि इन्हीं रिश्तों की वजह से भाजपा ठाणे नगर निगम के चुनाव में पीछे हट गई थी। जिसकी वजह से एकनाथ शिंदे को अपना राजनीतिक कद को बढ़ाने में बहुत मदद मिली।

फडणवीस ने बहुत धीरज के साथ समय का इंतजार किया

फाइल फोटो, साल 2019

2019 का विधानसभा चुनाव भाजपा और शिवसेना ने साथ मिलकर लड़ा था। उस समय राज्य की 288 सीटों में से भाजपा ने 150 और शिवसेना ने 124 सीटों पर चुनाव लड़ा था। भाजपा ने 106 सीटें जीतीं, जबकि शिवसेना 56 सीटों पर सिमटकर रह गई थी। यानी साफ तौर पर भाजपा का प्रदर्शन शिवसेना से बेहतर था। इसके बावजूद शिवसेना अपना मुख्यमंत्री बनाने पर अड़ गई।

हालांकि उस समय देवेन्द्र फडणवीस मुख्यमंत्री थे। लेकिन वह समझौता करने के लिए तैयार थे। लेकिन उद्धव ठाकरे की जिद की वजह से दोनों के बीच दरार आ गई। हालांकि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा को सरकार बनाने का निमंत्रण मिला। लेकिन शिवसेना के धोखा देने की वजह से फडणवीस को इस्तीफा देना पड़ा। उसी समय उन्होंने यह बयान दिया था कि ‘मेरा पानी उतरता देखकर किनारे पर घर मत बना लेना, मैं समंदर हूं लौटकर आऊंगा’।

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अब वक्त आ गया है। महाराष्ट्र में देवेन्द्र फडणवीस के नाम के पोस्टर लगने शुरु हो गए है। यानी समंदर का पानी चढ़ने लगा है। महाराष्ट्र अपने नए क्षत्रप के स्वागत के लिए तैयार हो रहा है।

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