ब्रेकिंग न्यूज़ 

महाराष्ट्र का राजनीतिक विवाद हुआ हिंसक, बेतुके बयानों से खूनी संघर्ष का खतरा

महाराष्ट्र का राजनीतिक विवाद हुआ हिंसक, बेतुके बयानों से खूनी संघर्ष का खतरा

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी(MVA) के दिन पूरे हो गए हैं। खबर है कि शिवसेना के बागी विधायकों का समूह जल्दी ही समर्थन वापसी की घोषणा कर सकता है। शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के साथ लगभग 46 विधायक जुड़ चुके हैं।

गुरुवार 23 जनवरी को 36 बागी शिवसेना विधायकों ने महाराष्ट्र विधानसभा(Maharashtra assembly) अध्यक्ष नरहरि जिरवाल को चिट्ठी लिखकर साफ कर दिया है कि एकनाथ शिंदे(Eknath Shinde) ही विधानसभा में उनके नेता होंगे। खबर है कि शिवसेना(Shiv Sena) के दो और विधायक दिलीप लांडे और भास्कर जाधव ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया है।

इसके साथ शिवसेना के बागी विधायकों की संख्या 40 तक पहुंच चुकी है। एकनाथ शिंदे 14 निर्दलीय विधायकों को भी अपने साथ लाने में सफल रहे हैं। जिसकी वजह से उनके समर्थक विधायकों का आंकड़ा 54 तक पहुंच सकता है। शिंदे को दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए मात्र 37 शिवसेना विधायकों को तोड़ने की जरुरत थी।

उधर बाजी अपने हाथ से फिसलती देखकर महाविकास अघाड़ी के नेता बेचैन हैं। उद्धव ठाकरे(CM Uddhav Thakrey) के करीबी संजय राउत तो खुलेआम धमकियां दे रहे हैं। जिसकी वजह से महाराष्ट्र का राजनीतिक विवाद हिंसक होने की आशंका बढ़ गई है।

ये भी पढ़ें- उद्धव ठाकरे के हाथ से निकली बाजी

‘बागियों का महाराष्ट्र में घूमना मुश्किल हो जाएगा’

संजय राउत(Sanjay Raut) ने उद्धव ठाकरे से बगावत कर चुके शिवसेना विधायकों को धमकी देते हुए कहा कि ‘आने दो हमारे विधायकों को फ्लोर हाऊस पर, फिर देख लेंगे। देखो ये जो विधायक चले गए हैं, इन्हें महाराष्ट्र में आना घूमना बहुत मुश्किल होगा।’

संजय राउत की इस खुली धमकी की हर तरफ आलोचना हो रही है। इसे हिंसा भड़काने वाला बयान कहा जा रहा है।

फाइल फोटो

आशंका है कि संजय राउत के इस भड़काऊ बयान की वजह से शिवसैनिक बागी विधायकों और उनके परिवार पर हमला कर सकते हैं।

शुरु हो चुकी है हिंसा

राजनेताओं के बयान का दूरगामी असर दिखाई देता है। शिवसैनिक वैसे भी अपने उग्र तेवरों के लिए बदनाम हैं। ऐसे में संजय राउत के भड़काऊ बयान का असर दिखाई देने लगा है। शिवसैनिक सड़क पर उतर आए हैं।

– औरंगाबाद में शिवसैनिक बागी विधायकों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। वहां के सभी छह विधायक उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के साथ चले गए हैं। इसमें से दो मंत्री अब्दुल सत्तार और संदीपन भुमरी भी है।

-सांगली में भाजपा विधायक सुरेश खाडे के दफ्तर पर शिवसैनिकों ने पथराव कर दिया और वहां सड़ी गली सब्जियां फेंकी हैं। उन्होंने भाजपा नेताओं के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया। जिसके बाद पुलिस को सात शिवसेना कार्यकर्ताओं के हिरासत में लेना पड़ा।

– इस बीच संजय राउत शिवसैनिकों को लगातार हिंसा करने के लिए उकसा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि ‘शिंदे गुट हमें चुनौती दे रहा है। उन्हें यह बात पता होना चाहिए कि शिवसेना के कार्यकर्ता अभी सड़क पर नहीं उतरे हैं। इस तरह की लड़ाई या तो कानून के जरिए लड़ी जाती है या सड़क पर। जरूरत पड़ी तो हमारे कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे।’

संजय राउत कथित रुप से शरद पवार को धमकी दिए जाने के खिलाफ बयान दे रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया है कि एक केन्द्रीय मंत्री ने शरद पवार को धमकी दी है।

उद्धव के हाथ से फिसल रही बाजी

विधानसभा में मात खाने के बाद उद्धव ठाकरे महानगरपालिका स्तर पर भी विरोध का सामना कर रहे हैं। कल्याण, डोंबिवली, अंबरनाथ जैसे इलाकों में एकनाथ शिंदे के समर्थन की हवा चल रही है।

– एकनाथ शिंदे के गढ़ ठाणे शहर की महानगरपालिका में शिवसेना के (Shivsena) के 60 पार्षदों के एकनाथ शिंदे के साथ जुड़ने की खबर है। पिछले दो दिनों से इन पार्षदों का फोन बंद आ रहा है। हालांकि पिछले 30 सालों से ठाणे महानगरपालिका (TMC) पर शिवसेना का कब्जा है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में पार्षदों की बगावत के बाद वहां से उद्धव ठाकरे की पार्टी का वजूद खत्म हो सकता है।

– एकनाथ शिंदे के समर्थन में कल्याण-डोंबिवली, उल्हासनगर और अंबरनाथ में पोस्टरबाजी चल रही है। उल्हासनगर और अंबरनाथ में शिवसेना की इकाई एकनाथ शिंदे के समर्थन में है।

– कल्याण से एकनाथ शिंदे के बेटे डॉ. श्रीकांत शिंदे सांसद हैं। उनके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठी है। जिससे पता चलता है कि कल्याण भी उद्धव गुट के हाथ से निकल चुका है।

फाइल फोटो

उद्धव के समर्थन में ममता ने बागियों को धमकाया

उद्धव ठाकरे और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच बेहद नजदीकी है। उन्होंने उद्धव से बगावत करने वाले शिवसेना विधायकों को परोक्ष रुप से धमकी दी है।

ममता बनर्जी ने ट्वीट करके कहा है कि ‘असम की जगह उन्हें (बागी विधायकों को) यहां बंगाल भेजिए, हम उनकी अच्छी खातिरदारी करेंगे, नहीं तो ये महाराष्ट्र के बाद अन्य सरकारों को गिराने की जुगत भिड़ाएंगे, हम लोगों के लिए, संविधान के लिए इंसाफ की मांग करते है।’

यहां ममता बनर्जी की खातिरदारी का मतलब आप खुद ही समझ सकते हैं।

ये भी पढ़ें- महाराष्ट्र में बनेगी असली शिवसेना और भाजपा की सरकार 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.