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भारत-रूस की दोस्ती से दोनों को मुनाफा, बेबस बैठकर तमाशा देख रही दुनिया

भारत-रूस की दोस्ती से दोनों को मुनाफा, बेबस बैठकर तमाशा देख रही दुनिया

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन की बीच कई महीनों से छिड़ी जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इससे पूरी दुनिया पर असर पड़ रहा है। जहां दुनिया के कई हिस्सों में खाद्य पदार्थों की सप्लाई चेन टूट गई है। वहीं तेल की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। लेकिन भारत और उसकी कंपनियों को इस जंग से जबरदस्त मुनाफा हो रहा है।

रूस का तेल बाजार तक पहुंचाने का जरिया बना भारत

यूक्रेन पर हमले की वजह से रूस पर पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगा दिया है। जिसकी वजह से रूस से होने वाला निर्यात ठप हो गया है। इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। लेकिन भारत को इसका फायदा हो रहा है। क्योंकि रूस ने अंतरराष्ट्रीय बाजार तक अपना तेल पहुंचाने के लिए भारत को जरिया बना लिया है।

रूस भारत को कच्चे तेल पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों से 30 से 40 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट दे रहा है। यानी अगर बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम 125 डॉलर प्रति बैरल है तो भारत को वह 90 से 95 डॉलर में मिल रहा है। जिसे लेकर भारतीय कंपनियां उसे एशिया और अफ्रीका में बाजार की कीमत पर बेच रही हैं। जिससे उन्हें मोटा मुनाफा हो रहा है।

रूस से भारत को तेल निर्यात लगातार बढ़ा 

हालांकि यूक्रेन की जंग से पहले भारत रूस से तेल बहुत कम खरीदता था। क्योंकि रूस से भारत तेल पहुंचने में 45 दिन का समय लगता है। इसकी अपेक्षा मध्य पूर्व या इराक से भारत तेल पहुंचने में 6 से 7 दिन का ही समय लगता है। इसकी वजह से रूस से तेल मंगाना भारत के लिए महंगा पड़ता था। लेकिन युद्ध शुरु होने के बाद रूस पर प्रतिबंध लग गया और दुनिया भर के बाजार रूस के लिए बंद हो गए। जिसकी वजह से रूस को अपना तेल बेचने के लिए भारतीय कंपनियों पर निर्भर होना पड़ा। रूस ने भारत को सस्ता तेल देने का ऑफर दिया। जिसका जबरदस्त फायदा अब हमें मिल रहा है।

– पहले रूस से भारत सिर्फ 2 फीसदी तेल खरीदता था। लेकिन अब यह बढ़कर 10 गुना यानी 20 फीसदी हो गया है।

– अप्रैल 2022 में भारत ने रूस से 388,666 बैरल तेल प्रतिदिन मंगाया

– मई में रूस से तेल आयात बढ़कर दोगुने से भी ज्यादा यानी 840,645 बैरल प्रतिदिन हो गया है

– जून के महीने में रूस से तेल आयात बढ़कर 10 लाख 50 हजार बैरल प्रतिदिन होने का अनुमान

– भारत की निजी कंपनियां फिलहाल रूस से ढाई लाख बैरल तेल प्रतिदिन खरीद रही हैं

– देश की सरकारी कंपनियां रूस से 4.5 लाख बैरल तेल प्रतिदिन आयात कर रही हैं

हालांकि रूस से मंगाए जा रहे इस तेल पर ढुलाई का खर्च यानी ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट 1 से 2 डॉलर प्रति बैरल ज्यादा पड़ता है। लेकिन रूस से मिलने वाली 30 से 40 डॉलर प्रति बैरल की छूट के सामने यह कुछ भी नहीं है। अभी तक भारत इराक (Iraq), सऊदी अरब (Saudi Arab) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से तेल मंगाता था। लेकिन अब रूस ने सऊदी अरब और अमीरात को पीछे छोड़ दिया है और दूसरे नंबर पर पहुंच चुका है।

रूस-भारत संबंध पर दुनिया ने साधी चुप्पी

रूस पर लगे प्रतिबंध के बाद भी जिस तरह रूसी तेल भारत के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंच रहा है। वह कोई छिपी हुई बात नहीं है। यूरोप और अमेरिका सहित दुनिया के सभी देश इस बात को जानते हैं कि रूस ने भारत को खुली छूट दे रखी है और प्रतिबंध लगने के बावजूद उसके जरिए व्यापार कर रहा है। इसके बावजूद पूरी दुनिया रूस और भारत के इस संबंध पर आंखें मूंदे हुए है। ये उनकी मजबूरी है।

क्योंकि दुनिया भर में भारत का बढ़ता हुआ कद उन्हें भारत के खिलाफ बोलने की इजाजत नहीं देता।

दूसरी खास वजह ये है कि अगर यूरोप और अमेरिका ने भारत के जरिए चल रहे रूस के तेल व्यापार पर रोक लगाने की कोशिश की तो दुनिया भर में तेल की कीमतें और ज्यादा बढ़ जाएंगी। जिसकी वजह से महंगाई आसमान छूने लगेगी और पूरी दुनिया में भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी। यही वजह है कि यूरोप और अमेरिका ने रूस और भारत के इन व्यापारिक रिश्तों पर आंख मूंद रखी है।

 

अंशुमान आनंंद

 

 

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