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किसके पास असली शिवसेना, अब इसपर छिड़ेगी जंग

किसके पास असली शिवसेना, अब इसपर छिड़ेगी जंग

मुंबई: महाराष्ट्र में सरकार बनाने का मामला लगभग सुलझ चुका है। उद्धव ठाकरे के इस्तीफा देने के बाद नई सरकार के गठन में कोई परेशानी नहीं रह गई है। लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव और एकनाथ शिंदे के बीच एक नया झगड़ा शुरु होता हुआ दिख रहा है।

किसके पास असली शिवसेना

– असली शिवसेना का वारिस कौन है?
– किसके पास पार्टी का चुनाव चिन्ह और झंडा रहेगा?
– बाला साहेब ठाकरे का असली वारिस कौन है?

इन तीन सवालों को लेकर अगले कुछ दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति गरमाने वाली है। ये मामला अदालत की चौखट से लेकर चुनाव आयोग तक पहुंच सकता है। शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे लगातार दावा कर रहे हैं कि असली शिवसेना उनके साथ है और हम बालासाहेब ठाकरे (Bala saheb Thackeray) की विचारधारा को आगे ले जा रहे हैं।

फाइल फोटो

शिंदे गुट ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी पार्टी में विलय करने नहीं जा रहे हैं। हम ही असली शिवसेना हैं। इसलिए उद्धव ठाकरे के भी सभी विधायकों को हमारा व्हिप मानना पड़ेगा। शिंदे ने ठाकरे गुट के चीफ व्हिप सुनील प्रभु के आदेश को गैरकानूनी करार दिया था। क्योंकि उनका दावा है कि शिवेसना के 55 में से 50 विधायक उनके साथ हैं। इसलिए बहुमत के आधार पर असली शिवसेना वही हैं। उनका दावा है कि व्हिप जारी करने का दावा उनके गुट के पास है।

बालासाहेब ठाकरे की विरासत पर दावा

एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे से अलग होने की जंग हिंदुत्व के मुद्दे पर लड़ी थी। उनका दावा था कि कांग्रेस और एनसीपी के साथ जाकर उद्धव हिंदुत्व की विचारधारा के साथ समझौता कर रहे हैं। जो कि बालासाहेब ठाकरे के विचारों के विपरीत है। इसलिए बाल ठाकरे के विचारों और सिद्धांतों की रक्षा के लिए उन्होंने शिवसेना में विभाजन करना पड़ा।

हालांकि दलबदल कानून को बारीकी से देखा जाए। तो उसके आधार पर शिंदे गुट को असली शिवसेना की मान्यता मिलने की संभावना काफी ज्यादा है। क्योंकि उनके पास दो तिहाई से बहुत ज्यादा विधायक मौजूद हैं। लेकिन तीर कमान के चुनाव चिन्ह को लेकर उद्धव ठाकरे गुट से उनकी ठन सकती है। क्योंकि दोनों ही गुट इस पर अपना दावा करेंगे।

बागी गुट का नाम शिवसेना(बालासाहेब)

महाराष्ट्र के ताजा घटनाक्रम से पहले गुवाहाटी में बागी गुट के प्रवक्ता दीपक केसरकर ने बताया था कि उन्होंने शिवसेना नहीं छोड़ी है और अपने समूह का नाम शिवसेना (बालासाहेब) रखा है। उन लोगों ने एकनथ शिंदे को अपना नेता चुना है।

केसरकर ने उस समय भी कहा था कि सिर्फ 16 या 17 लोग 55 विधायकों के समूह के नेता को नहीं बदल सकते हैं। हम किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ विलय नहीं करेंगे। हमने अपने समूह का नाम शिवसेना (बालासाहेब) रखने का फैसला किया है क्योंकि हम उनकी (बाल ठाकरे की) विचारधारा में विश्वास करते हैं।

NCP ने किया शिवसेना विधायकों का अपमान

शिवसेना के बागी विधायकों ने बताया था कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और हमारे साथ उसका अपमानजनक व्यवहार हमारा एक बड़ा मुद्दा है। हमारे साथी विधायक पिछले कई महीनों से पार्टी नेतृत्व के सामने इस मुद्दे को उठा रहे थे लेकिन इस पर कभी ध्यान नहीं दिया गया।

केसरकर ने बताया था कि 2019 के चुनाव से पहले राकांपा के प्रतिनिधित्व वाले निर्वाचन क्षेत्रों को अधिक महत्व दिया गया। मुख्यमंत्री पद के अलावा, शिवसेना को कोई अच्छा विभाग नहीं मिला जिससे हमें बिलकुल भी मदद नहीं मिली।ऐसे में किसी ऐसी राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बनने का क्या फायदा है जहां पार्टी (शिवसेना) को अन्य दो सहयोगियों द्वारा समाप्त कर दिया जाएगा।

फाइल फोटो

केसरकर ने बताया था कि एनसीपी के मंत्रियों ने हमारे साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया। हम हमेशा उनके द्वारा दरकिनार किए जाते रहे। एक उदाहरण के तौर पर, उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने एक अच्छी योजना को रद्द कर दिया था। जब मैंने इसके खिलाफ शिकायत की, तो उन्होंने मुझसे कहा कि उनके फैसले को केवल मुख्यमंत्री ही नकार सकते हैं।

बागी शिवसेना विधायकों ने बताया कि हमने उद्धव ठाकरे से मांग की थी कि वह भाजपा के साथ जाकर सरकार बनाएं। लेकिन उन्होंने हमारी एक नहीं सुनी। खुद प्रधानमंत्री मोदी भी शिवसेना के प्रति अपना लगाव जाहिर कर चुके हैं।

शिवसेना विधायकों के इन बयानों पर गौर किया जाए। तो महाराष्ट्र में जल्दी ही असली शिवसेना के मुद्दे पर जंग छिड़ने वाली है।

 

अंशुमान आनंंद

 

 

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