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माँ काली के अपमान का विरोध सफल, कनाडा में फिल्म पर रोक

माँ काली के अपमान का विरोध सफल, कनाडा में फिल्म पर रोक

नई दिल्ली: वामपंथी फिल्मकार लीना मणिमेकलाई की विवादित डॉक्यूमेन्ट्री पर रोक लगा दी गई है। उसे कनाडा के फिल्म फेस्टिवल में नहीं दिखाया जाएगा। इस डॉक्यूमेन्ट्री का पोस्टर रिलीज होने के बाद लोगों का गुस्सा भड़क गया था और पूरे देश में इसका विरोध किया जा रहा था।

आगा खां म्यूजियम ने दी सफाई

पूरे देश में काली डॉक्युमेंट्री फिल्म का विरोध होने के बाद कनाडा के आगा खां म्यूजियम को माफी मांगनी पड़ी और फिल्म को प्रदर्शित नहीं करने का फैसला करना पड़ा। फिल्म निर्माता लीना मणिमेकलाई की फिल्म को टोरंटो शहर के आगा खां म्यूजियम में प्रदर्शित किया गया था।

लेकिन फिल्म का पोस्टर देखने के बाद देश की सनातनी जनता का विरोध भड़क उठा। मामले में सरकार भी कूद पड़ी और भारतीय उच्चायोग ने अपनी तरफ से शिकायत दर्ज कराई। जिसमें कहा गया कि ‘उन्हें कनाडा में इस फिल्म के खिलाफ हिंदू समुदाय की तरफ से शिकायतें मिल रही हैं। अपनी शिकायत में लोगों ने इसे देवी काली का अपमान बताया है। ‘

फिल्म का प्रदर्शन कैंसिल करने के बाद आगा खां म्यूजियम ने अपने बयान में कहा है कि कि ‘हमें गहरा खेद है कि ‘अंडर द टेंट’ प्रोजेक्ट के तहत म्यूजियम में प्रस्तुत 18 शॉर्ट वीडियो द्वारा सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट ने हिंदू और अन्य धार्मिक समुदायों को अनजाने में अपमानित किया है। ऐसे में फिल्म का म्यूजियम में प्रस्तुतिकरण नहीं किया जाएगा। संग्रहालय का मिशन कला के माध्यम से अलग-अलग सांस्कृतियों के बीच समझ और संवाद को बढ़ावा देना है । विविध धार्मिक अभिव्यक्तियों और आस्था समुदायों का सम्मान उस मिशन का एक अभिन्न अंग है।’

पूरे देश में दर्ज हो रहे थे मुकदमे

लीना मणिमेकलाई की इस फिल्म का पोस्टर बेहद आपत्तिजनक है। जिसमें एक महिला मां काली जैसी वेशभूषा में सिगरेट पीती हुई और हाथ में एलजीबीटी का झंडा लिए हुए दिखाई दे रही थी। जिसके खिलाफ हिंदू समुदाय का गुस्सा भड़क गया।

डायरेक्टर लीना के खिलाफ यूपी के लखनऊ, गोंडा और लखीमपुर में मुकदमा दर्ज हुआ। इसके खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में तहरीर दी गई। जिसमें कहा गया कि लीना ने काली के पोस्टर के जरिए जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। इससे शांति व्यवस्था बिगड़ सकती है। पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने के मामले में FIR दर्ज की है।

इस फिल्म के खिलाफ यूपी के गोंडा में भी मामला दर्ज किया गया था। कोतवाली थाने में दर्ज केस में कहा गया कि ‘हिंदू देवी को इस तरह से प्रदर्शित करना अपमान और अपराध है। इससे पूरे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। इसलिए पोस्टर हटाया जाए। साथ ही फिल्म मेकर और पूरी यूनिट माफी मांगे।’

हजरतगंज थाने और गोंडा के कोतवाली थाना में फिल्मकार लीना मणिमेकलाई, प्रोड्यूसर आशा एसोसिएट और एडिटर श्रवण ओनाचन पर नामजद केस दर्ज किया है। इन पर 120-B, 153-B, 295, 295-A, 298, 504, 505(1)(B), 505(2), सूचना प्रद्योगिकी अधिनियम 2008 के तहत 66 और 67 धाराएं लगाई गई हैं।

लखीमपुर-खीरी में केस दर्ज कराने वाले बजरंग दल जिला संयोजक ने कहा कि ‘जिस तरीके से काली माता का पोस्टर बनाया गया है। वह हिंदू धर्म का अपमान करता है। इस तरह के पोस्टर पर सरकार को रोक लगाना चाहिए।’

लीना की फिल्म के खिलाफ वाराणसी के सिगरा थाने में भी तहरीर दी गई। जिसके बाद यूपी पुलिस ने जांच कर उचित कार्रवाई की बात कही है। तहरीर देने वालों का कहना था कि ‘जिस प्रकार फिल्म जगत से जुड़े तमाम लोग हिंदू धर्म को बदनाम करने में जुटे हैं, वह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं है। हिंदू देवी-देवताओं से हमारी आस्था जुड़ी हुई है।’

लीना मणिमेकलाई के खिलाफ पूरे देश के हिंदुओं में गुस्से की लहर थी। जिसकी वजह से सरकार भी एक्शन में आ गई थी। यही कारण है कि हिंदू समुदाय के संयुक्त विरोध की वजह से इस विवादित फिल्म पर प्रतिबंध लगाने में सफलता मिली।

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