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बाबुओं का खेल

बाबुओं का खेल

अंबानियों,अडानियों से रिश्ते के लिए नेता चाहे जितना बदनाम हों लेकिन बिना किसी बदनामी के इसकी असली मलाई तो सरकारी बाबू ही काट रहे हैं। नौकरी में रहें तो नीतियां बनाने में सहयोग देकर और रिटायर हो गए तो मोटी पगार लेकर। कई सेक्रेटरी ऐसे हैं, जो रिटायर होने के कुछ महीने बाद से ही टाटा, बिड़ला, अंबानी, आडानी, मित्तल, खेतान, चंद्रा का केक तोड़ रहे हैं। लाखों का पैकेज, गाड़ी, बांगला, रूतबा बना रहे हैं। डीओपीटी के एक अधिकारी की माने तो पीएम मोदी अब इस पर भी लगाम लगाने की तैयारी में हैं। इसके लिए जल्द ही नियमावली में कुछ संशोधन पर विचार हो रहा है।

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