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बाबा के बुलडोजर पर लगी जनता की मुहर

बाबा के बुलडोजर पर लगी जनता की मुहर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लोग अक्सर बुलडोजर बाबा कहने लगे हैं क्योंकि बाबा के बुलडोजर चलनें से लोगों को गुंडो-माफियाओं के जुल्मों से बड़ी राहत मिली। 2022 के विधान सभा चुनाव में भा.ज.पा. की जीत ने डबल इंजन की सरकार को सराहा था और बुलडोजर से माफियों के कब्जे से जमींन छुड़ायी थी तब से मुख्यमंत्री योगी का नाम बुलडोजर से जुड़ गया था। हाल ही में हुये दो लोक सभा चुनाव में  भा.ज.पा. ने जीत दर्ज कर सपा की अजेय लगने वाली सीटों पर कब्जा कर लिया रामपुर की सीट में तो 50 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम हैं। सपा के कद्दावर और कभी न हारने वाले नेता आजम खां को वहां के मुसलमानों ने सपा प्रत्याशी को हरा कर बता दिया कि आजम खां अब मुसलमानों के नेता नहीं रहे। इससे लगता है कि रामपुर वालों ने सपा को नकार दिया।

आजम खां कह रहे थे कि जहां 900 मुस्लिम वोटर थे उस बूथ पर भी सपा को वोट नहीं मिले, ये कहकर उन्होंने भा.ज.पा. सरकार और चुनाव आयोग पर आरोप लगा दिया। पर बात इसके उलट भी हो सकती है कि जो मुसलमान आजम खां के गुंडो से डरता था जिसके पास उनकी बात सिर झुका कर माननें के अलावा कोई चारा नहीं था, जिनकी जमींन, दुकानें आजम खां के गुंडों ने जबर्दस्ती ओने-पौने भाव में खरीदीं। उनमें से कुछ तो विधान सभा के चुनाव में भी आजम खां के जुल्मों का ब्यान करते हुये टीवी पर दिखाई दिये। सरकारी जमींन के अलावा आजम खां पर गरीब मुसलमानों की जमीनें कब्जे करने के आरोप लगे। उन्हीं मुसलमानों को अब भा.ज.पा. और नरेन्द्र मोदी बेहतर लगे, उनको भी योगी बाबा ने आजम खां के जुल्मों से छुड़वाया। उन्होंने एकजुट होकर सपा के आजम खां के चेले को वोट नहीं दिये। आजम खां अपने किये हुये जुल्मों को याद करें बजाय भा.ज.पा. सरकारों पर आरोप जड़ने के। आजम खां ने खुद भी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से दूरी बना ली थी विधान सभा में उनसे हलो तक नहीं की। उनके प्रवक्ता ने तो अखिलेश यादव को परोक्ष से भला बुरा भी कहा था। 42000 हजार वोट से मुस्लिमों के क्षेत्र में भा.ज.पा. का जीतना मामूली घटना नहीं है।

अब बात करें आजमगढ़ सीट बनी, की यह सीट मुस्लिम और यादव के समीकरण के कारण सपा की पक्की सीट मानी जाती है। यहां तक कि विधान सभा चुनाव में अभी-अभी ही सपा ने सभी सीटों पर भा.ज.पा. को हरा दिया था। अखिलेश यादव की पार्टी की नीतियों के अनुसार भी चुनाव लड़ानें के लिये अपना यादव रिश्तेदार तलाश किया और बाहर से लाकर धर्मेन्द्र यादव को चुनाव लड़ाया पर वहां भी भा.ज.पा. ने जीत दर्ज कर ली। तीसरे प्रत्याशी बसपा के गुड्डू जमाली का ढाई लाख से अधिक वोट मिलने से ये लगता है कि मुसलमानों का रुझान सपा से हट रहा है और दलित वोट भी जमाली को मिले हैं। चुनाव में भा.ज.पा. की जीत से लगता है कि भा.ज.पा. को यहां भी मुस्लिम वोट मिले हैं और अगर ये मेरा आंकलन सही है तो देश के लिये एक अच्छी खबर है मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में भा.ज.पा. का जीतना पुरानी धर्मवादी ध्रुवीकरण की राजनीति को नकारना जैसा है नरेन्द्र मोदी के अखंड मजबूत भारत के निर्माण में मुसलमानों का हाथ बंटाना देश के सपने पूरे करनें में तेजी लायेगा।

शुरू से ही विपक्ष के तमाम नेता उत्तर प्रदेश को विशाल प्रदेश और राजनैतिक गढ़ मानते हुये कह रहे थे कि ये दो लोक सभा के चुनाव 2024 में होने वाले चुनाव की दिशा तय करेंगे क्योंकि मुस्लिम वोटों की अधिकता और यादवों का क्षेत्र मानें जाने वाले रामपुर और आजमगढ़ में हारने की उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। अब करारी हार पर वे इसे दिशा या जनता का इशारा मानते हैं तो भा.ज.पा. की पौ बारह तो आज ही तय हो गयी। क्या सचमुच भा.ज.पा. 2024 लोकसभा चुनाव में पुन: तीन चैथाई बहुमत से सरकार बनायेगी।

बुलडोजर के डर से पूरे प्रदेश में सरकारी जमींनों पर भूमि माफियों ने कब्जा करना बन्द कर दिया है क्योंकि ये कार्यवाही तुरन्त होती है और माफियों अपराधियों की करोड़ों की सम्पत्ति बिना कोर्ट कचहरी किये सरकार अवैध निर्माण को गिरा कर वापिस ले लेती है। करोड़ों को चूना लगाने वाले माफियों के गैंग का सफाया हो रहा है। गरीबों की जमींन जब बुलडोजर द्वारा माफियों से मुक्त होती है तो उनके चेहरों की खुशी देखते ही बनती है। जिस बुलडोजर को विपक्ष रोकना चाहती है उसी बुलडोजर की वजह से जनता ने विपक्ष को चुनावों में रौंद डाला।

रामपुर के पूर्व सांसद और सपा सरकार में रहे सबसे शक्तिशाली मंत्री आजम खां ने अपने जौहर विश्वविद्यालय बनाने के लिये सरकारी और निजी जो भी सम्पत्ति विश्वविद्यालय के निर्माण करनें की या विस्तार करनें की राह में आयी कब्जा कर ली गयी। आज वही बुलडोजर के गलत इस्तेमाल का रोना रो रहे हैं। आजम खां ने तो उनके विरूद्ध लोक सभा चुनाव लड़ने वाली जयाप्रदा के ऊपर जो घटिया टिप्पणी की उसे लिखा भी नहीं जा सकता। बाद में वे विधान सभा का चुनाव जीते क्योंकि लोगों को बराबर धमकियां दे रहे थे कि सपा सरकार आनें के बाद एक एक को देख लेंगे। ये भी कहा कि हम कलेक्टर से जूते के फीते कसवायेंगे। इससे ही एैसे माफिया सोच के नेताओं की मानसिकता और कार्य कलापों का पता लगता है।

अल्पसंख्यकों के नाम पर वोटों की सौदेबाजी करने वाले गुंडे और नेता दोनों का सफाया हो रहा है। डरी सहमी हुयी उत्तर प्रदेश की जनता को उनके डमी राज से छुटकारा मिल रहा है। विपक्षी पार्टियों द्वारा ये बात अक्सर कही जाती है कि एक ही समुदाय के लोगों की सम्पत्ति पर ही बुलडोजर चल रहा है। भा.ज.पा. के एक मंत्री के भी अवैध निर्माण को प्रयागराज में गिराया गया है। बिडम्बना ये है कि वोटों के लालच में एक ही समुदाय के लोगों को पिछली सरकारों ने जमींने कब्जा करवायी। उन पर एक्शन लेने वाले, कार्यवाही करनें वाले अधिकारियों को डराया गया, इससे माफियां गैंग पूरे प्रदेश में हावी हो गया। पिछले चुनावों ने एक बात साफ कर दी कि अब मुस्लिम वोट आजम खां और ओवैसी जैसे नेताओं के मायावी जाल से बाहर निकल गया है और खुल कर  उनके खिलाफ वोट कर रहा है। खुद हैदराबाद के निगम चुनावों में ये प्रमाणित हो गया था। अब उत्तर प्रदेश में रामपुर और आजमगढ़ के लोक सभा चुनाव ने इसे पक्का कर दिया।

पूरे देश में एक सशक्त कानून बनना चाहिये जहां भी माफिया अपराधी कोई जमींन जब्त करे, उनको संगीन अपराध की श्रेणी में जेल में बन्द किया जाना चाहिये। गुंडा एक्ट गैंगस्टर से अलग एक भूमि माफिया, बालू माफिया एक्ट बने जिसमें तुरन्त एक्शन हो और माफियों को जल्द जमानत का प्रावधान न हो सजा भी कम से कम 5 साल की हो।

2024 के चुनावों में भा.ज.पा. की जीत की राह आसान दिखाई दे रही है। राजस्थान में एक हिन्दू की गला काट कर की गयी हत्या ने कांग्रेस शासन की कमजोरी उजागर कर दी। नूपूर शर्मा के पक्ष में बोलने वाले की नृशंस हत्या कर दी गयी। पर विपक्ष ने केवल दबे मुंह से उसकी निंदा की। बात-बात पर नरेन्द्र मोदी और योगी को कोसने वाली कांग्रेस अपने दरबारी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर कुछ बोलना तो दूर, बुला कर उनकी क्लास तक नहीं ले सकी। सेक्युलर समाजियों को सांप सूंघ गया और बोलने से कतरा रहे हैं वगलें झांक रहे हैं पर जनता की आंखे खुली हुयी हंै। 2024 के विपक्ष के सपने अभी से चकनाचूर दिखाई दे रहे हैं।

 


डॉ. विजय खैरा

 

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