ब्रेकिंग न्यूज़ 

भारत को सस्ता तेल बेचने के लिए बेकरार है ईरान

भारत को सस्ता तेल बेचने के लिए बेकरार है ईरान

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक बहुत प्रसिद्ध उक्ति है- आपदा में अवसर की तलाश करना। भारत की विदेश नीति पीएम मोदी के इन्ही शब्दों पर पूरी तरह अमल कर रही है। पूरी दुनिया में जहां अमेरिका के प्रतिबंध का खौफ छाया रहता है। वहीं भारत अमेरिकी प्रतिबंधों का फायदा उठाकर मुनाफा कमाता है। पिछले दिनों रूस में ऐसा देखा गया। अब मुनाीफा कमाने का यही सिलसिला ईरान के साथ शुरु करने की तैयारी की जा रही है।

रूस की तरह ईरान से भी तेल खरीद सकता है भारत

भारत दुनिया का इकलौता ऐसा देश है, जो कि अमेरिकी प्रतिबंधो को अपने जूते की नोंक पर रखता है। ये बात ईरान अच्छी तरह जानता है। इसलिए ईरान ने भारत से आग्रह किया है कि वह भारत से क्रूड ऑयल की खरीदारी शुरु करे। इसके लिए ईरान भारत को तेल पर भारी छूट देने के लिए भी तैयार है। इसके लिए पिछले एक महीने में भारत और ईरान के बीच तीन बार आधिकारिक स्तर की वार्ता हो चुकी है।

भारत ने हाल के महीनों में जिस तरह से ईरान से संवाद को तेज किया है उसे देखते हुए तेहरान काफी उत्साहित है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी ईरान को तेल निर्यात की छूट दिलाने की मांग विश्व पटल पर रखी है।

भारत-ईरान के बीच लगातार बातचीत जारी

महीने भर पहले जून 2022 में ईरान के विदेश मंत्री आमिर अब्दोलाहियां नई दिल्ली की यात्रा पर आए थे। फिर उप-विदेश मंत्री मेंहदी सफारी ने भारत का दौरा किया। जिसके बाद भारतीय विदेश सचिव विनय क्वात्रा और ईरान के राजनीतिक मामलों के उप मंत्री डा. अली बाघेरी कानी के बीच चर्चा हुई। इन तीनों वार्ताओं के दौरान ईरान के अधिकारी भारत से लगातार तेल खरीदने की अपील करते रहे।
उनका कहना है कि अमेरिका और यूरोप के बीच प्रतिबंध के बावजूद जैसे भारत लगातार रूस से तेल खरीद रहा है। वैसे ही ईरान से भी तेल खरीदे। ईरान भी भारत को रूस की तरह ही प्रति बैरल तेल पर भारी छूट देने के लिए तैयार है।

हालांकि भारत ने अभी ईरान से तेल खरीदने का कोई पक्का वादा नहीं किया है। वर्ष 2018-19 में अमेरिका के नेतृत्व में ईरान पर प्रतिबंध लगाया था। लेकिन ईरान जानता है कि सिर्फ भारत ही अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद ईरान के तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा सकता है। क्योंकि यूक्रेन में जंग छेड़ने के आरोप में जब रूस पर अमेरिका और यूरोप ने प्रतिबंध लगाया तो रूस ने भारत के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक अपना तेल पहुंचाना शुरु किया और दुनिया के किसी देश की हिम्मत नहीं हुई कि वह भारत के खिलाफ आवाज उठा सके।

रूस और भारत के बीच तेल व्यापार बहुत तेज हुआ

यूक्रेन की जंग से पहले भारत रूस से तेल बहुत कम खरीदता था। क्योंकि रूस से भारत तेल पहुंचने में 45 दिन का समय लगता है। इसकी अपेक्षा मध्य पूर्व या इराक से भारत तेल पहुंचने में 6 से 7 दिन का ही समय लगता है। इसकी वजह से रूस से तेल मंगाना भारत के लिए महंगा पड़ता था। लेकिन युद्ध शुरु होने के बाद रूस पर प्रतिबंध लग गया और दुनिया भर के बाजार रूस के लिए बंद हो गए। जिसकी वजह से रूस को अपना तेल बेचने के लिए भारतीय कंपनियों पर निर्भर होना पड़ा। रूस ने भारत को सस्ता तेल देने का ऑफर दिया। जिसका जबरदस्त फायदा अब हमें मिल रहा है।

– पहले रूस से भारत सिर्फ 2 फीसदी तेल खरीदता था। लेकिन अब यह बढ़कर 10 गुना यानी 20 फीसदी हो गया है।

– अप्रैल 2022 में भारत ने रूस से 388,666 बैरल तेल प्रतिदिन मंगाया

– मई में रूस से तेल आयात बढ़कर दोगुने से भी ज्यादा यानी 840,645 बैरल प्रतिदिन हो गया है

– जून के महीने में रूस से तेल आयात बढ़कर 10 लाख 50 हजार बैरल प्रतिदिन हो गया

– भारत की निजी कंपनियां फिलहाल रूस से ढाई लाख बैरल तेल प्रतिदिन खरीद रही हैं

– देश की सरकारी कंपनियां रूस से 4.5 लाख बैरल तेल प्रतिदिन आयात कर रही हैं

हालांकि रूस से मंगाए जा रहे इस तेल पर ढुलाई का खर्च यानी ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट 1 से 2 डॉलर प्रति बैरल ज्यादा पड़ता है। लेकिन रूस से मिलने वाली 30 से 40 डॉलर प्रति बैरल की छूट के सामने यह कुछ भी नहीं है।

ईरान भी रूस की तरह भारत को छूट देने के लिए तैयार है। इसलिए हो सकता है कि भविष्य में भारत को ईरान के जरिए भी तेल व्यापार से पैसा बनाने का एक नया जरिया मिल जाए।

अमेरिका और यूरोप को अच्छी तरह मालूम है कि उनके लगाए हुए प्रतिबंधों को नकारते हुए भारत रूस के तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा रहा है। लेकिन वह जानते हैं कि तेजी से उभर रहे भारत के सामने मुंह खोलने का मतलब है अपने लिए मुश्किलें खड़ी करना। भारत ने पूरी दुनिया में कूटनीति का ऐसा जाल फैला रखा है कि दुनिया को कोई भी देश उसके खिलाफ कदम नहीं उठाना चाहता है। ईरान भी भारत की इसी प्रतिष्ठा और कूटनीतिक रुतबे का फायदा उठाकर अपना तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना चाहता है।

 

अंशुमान आनंद

 

ये भी पढ़ें-रूस से सस्ता तेल खरीदकर भारत को हो रहा है भारी मुनाफा

Leave a Reply

Your email address will not be published.