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‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी सफलता, 7 साल में रक्षा निर्यात 6 गुना बढ़ा

‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी सफलता, 7 साल में रक्षा निर्यात 6 गुना बढ़ा

नई दिल्ली: मोदी सरकार की महत्वकांक्षी ‘मेक इन इंडिया’ परियोजना ने रंग दिखाना शुरु कर दिया है। पिछले 7 सालों में दूसरे देशोंको रक्षा सामग्री का निर्यात 6 गुना से भी ज्यादा बढ़ गया है। भारत की गिनती दुनिया के दूसरे सबसे बड़े हथियार आयातक देश के रुप में होती है। लेकिन अब हमने दूसरे देशों को भी हथियार बेचकर मुनाफा कमाना शुरु कर दिया है।

फाइल फोटो

 

इस बार बेचे गए 13 हजार करोड़ के हथियार

भारत का रक्षा निर्यात लगातार बढ़ता जा रहा है। यह साल 2015-16 में 2,059 करोड़ रुपये, 2019-20 में 9,115 करोड़, 2020-21 में 8,434 और 2021-22 में 13 हजार करोड़ रुपए का रहा।

रक्षा उत्पादन विभाग के अपर सचिव संजय जाजू के मुताबिक ‘साल 2021-22 में भारत ने 13,000 करोड़ रुपये का निर्यात दर्ज किया है, जो रक्षा क्षेत्र में दर्ज निर्यात का अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। 2021-22 में निर्यात लगभग पांच साल पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा था। इस रक्षा निर्यात में निजी क्षेत्र का योगदान 70 फीसद है और बाकी 30 फीसद सार्वजनिक क्षेत्र का योगदान है।’

हथियार निर्यात करके विदेशी मुद्रा की कमाई

मोदी सरकार ने तय किया है कि साल 2024-25 तक रक्षा निर्यात को बढ़ाकर 36,500 करोड़ कर दिया जाए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र ने आर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड और 41 आयुध निर्माणी फैक्ट्रियों को मिलाकर रक्षा क्षेत्र में सात सार्वजनिक उपक्रम (DPSU) बना दिए हैं। इसका उद्देश्य हथियार निर्यात में आ रही प्रशासनिक अड़चनों को खत्म करना है। सरकार ने स्वदेशी हथियारों के निर्माण पर ज्यादा ध्यान देने का फैसला किया है।

भारत के हथियार निर्यात में वित्त वर्ष 2020-21 के मुकाबले 54.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि साल 2020-21 में कोविड के दौरान रक्षा निर्यात में थोड़ी कमी देखी गई थी। लेकिन अब इसमें फिर से तेजी आ गई है।

कई देशों की भारतीय हथियारों में दिलचस्पी

भारत का रक्षा निर्यात (Defense Export) मुख्य रूप से अमेरिका, फिलीपींस, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के देशों में होता है।

भारत ने जनवरी 2022 में फिलीपींस के साथ 37.5 करोड़ डॉलर (करीब 2770 करोड़ रुपये) की डील की थी। इसके तहत भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति का समझौता किया है। साथ ही इंडोनेशिया और थाईलैंड के साथ भी ब्रह्मोस मिसाइलों के निर्यात पर बातचीत चल रही है।

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इसके अलावा मलेशिया ने भारत के तेजस विमान को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। मलेशिया ने चीन के JF-17, साउथ कोरिया के FA-50 और रूस के मिग-35 और YAK-130 जैसे विमानों को किनारे कर मलेशिया ने तेजस को पसंद किया है। मलेशिया 18 तेजस फाइटर जेट खरीदना चाहता है। भारत ने इस पैकेज के लिए एक तेजस विमान का दाम करीब 4 करोड़ 20 लाख डॉलर तय किया है। मिस्र भी भारत के तेजस विमान को खरीदने की ख्वाहिश रखता है।

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