ब्रेकिंग न्यूज़ 

नहले पर दहला

नहले पर दहला

एक पुरानी कहावत है, ‘हिस्ट्री रीपीट्स इट्स सेल्फ एंड चाइल्ड इज दा फादर ऑफ मैन।’ उफा में प्रधानमंत्री मोदी और उनके पाकिस्तान के समकक्ष मियां नवाज शरीफ में इसकी बानगी देखने को मिली। भारत ने उफा में शर्म-अल-शेख में हुई चूक को उफा में दुरुस्त कर लिया, लेकिन सब कुछ की हामी भरने के बाद पाकिस्तान फिर पुराने पैतरें पर लौट आया है। इस्लामाबद पहुंचते ही नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार सरताज अजीज की भाषा बदलने लगी है। अब उन्हें ‘कोर इश्यू’ की न केवल याद आ रही है बल्कि बिना कश्मीर पर चर्चा के बातचीत की प्रक्रिया पर ‘ब्रेक’ लगने की भाषा का इस्तेमाल करने लगे हैं।

51इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि भारत ने पाकिस्तान के तमाम वादा खिलाफी के बाद भी रिश्तों को नया आयाम दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसमें स्पष्टता लाने का प्रयास किया है। पाकिस्तान के साथ उसी की भाषा में संयम और विश्वास के अजीब तालमेल के साथ आगे बढ़ रहे हैं। एक ठोस पहल का ही नतीजा रहा कि पाकिस्तान ने मुंबई हमले के गुनहगारों की आवाज का नमूना देना कुबूल कर लिया। दोनों देशों के संयुक्त वक्तव्य में यह तथ्य आया। प्रधानमंत्री नवाज और मोदी के बयान में आतंकियों के विरूद्ध ठोस कदम उठाने के साथ-साथ हर तरह के आतंकवाद की निंदा की गई। मुंबई हमले के दोषियों के विरूद्ध न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने पर पाकिस्तान सहमत हुआ। सीमा पर तनाव घटाने के उपायों पर चर्चा ही नहीं हुई बल्कि पाक रेंजर और सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक तथा दोनों देशों के सैन्य ऑपरेशन महानिदेशक और एनएसए स्तर पर चर्चा की सहमति बनी। यह नई पहल ही नहीं है, बल्कि ठोस विदेश नीति तथा समझदारी भरे व्यवहार का नतीजा भी है।

फिर बदला पाकिस्तान

एक कहावत है जिसका मन साफ न हो उसकी बात का भरोसा नहीं। इसलिए भारतीय रणनीतिकार, सामरिक विशेषज्ञ और डिप्लोमैट्स पाकिस्तान के किसी वादे पर बिना कुछ वक्त बिताए भरोसा नहीं करते, क्योंकि पाकिस्तान बातचीत की मेज पर सहमति जता देता है और इस्लामाबाद पहुंचने पर अंदरुनी दबाव के आगे झुककर मुकर जाता है।

53संदर्भ के तौर पर कुछ तथ्यों का जिक्र जरूरी है। प्रधानमंत्री वाजपेयीजी बस लेकर पाकिस्तान गए थे और कुछ समय बाद भारत को कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ का मुकाबला करना पड़ा था। भारत पड़ोसी देश से अच्छे रिश्ते की उम्मीद पाल कर द्विपक्षीय रिश्ते को आगे बढ़ा रहा था और संसद भवन को आतंकियों ने दहलाने का असफल प्रयास किया। स्थितियां इतनी तनावपूर्ण हो गई कि भारत को ‘ऑपरेशन पराक्रम’ की हद तक जाकर सोचना पड़ा। मुंबई पर आतंकी हमले के पहले पाकिस्तान ने भरोसा दिया था कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने देगा, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान से चलने वाले आतंकी संगठनों ने मुंबई पर आतंकी हमले को अंजाम दिया। 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और युसुफ रजा गिलानी में द्विपक्षीय चर्चा हुई। इसमें दोनों ने आतंकवाद की निंदा की और इससे मिलकर मुकाबला करने की प्रतिबद्धता दिखाई। पाकिस्तान ने मुंबई आतंकी हमले के दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने का आश्वासन दिया। क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दबाव पड़े और तब कहीं जाकर वहां की अदालत में जकी-उर-रहमान लखवी समेत छह अन्य आरोपी बनाए गए। ट्रायल शुरू हुआ, लेकिन हाल में लखवी रिहा भी हो गया। मुंबई में 1993 में हुए विस्फोट का मास्टर माइंड दाऊद इब्राहिम कासकर अब भी पाकिस्तान में है। इंडियन मुजाहिद्दीन के तमाम गुर्गे लश्करे-तैयबा के निर्देशन में भारत के विभिन्न शहरों में आतंकी घटनाओं को अंजाम देते रहें। इस दौरान हर बार पाकिस्तान मुंबई हमले के गुनहगारों के सबूत मांगता रहा लेकिन कभी जकी-उर-रहमान लखवी समेत छह आरोपियों की आवाज के नमूने उसने नहीं दिए।

यहां तक कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के स्तर पर आतंकवाद के मुद्दे पर चर्चा के लिए फ्रेमवर्क तैयार करने पर भी सहमत नहीं हुआ। हर साल सीमा पर संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन बढ़ता रहा। अब यहां इसका जिक्र भी जरूरी है कि पिछले साल जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रायसीना की पहाड़ी पर शपथ ले रहे थे तो दक्षिण एशियाई सहयोग संगठन के अन्य सभी राष्ट्राध्यक्षों के साथ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी मौजूद थे। बाद में प्रधानमंत्री मोदी और नवाज के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। इसमें नवाज ने बेहतर द्विपक्षीय रिश्तों के प्रति प्रतिबद्धता जताई। भारत ने भी इसका स्वागत किया और हर कदम पर साथ देने का वादा किया लेकिन वह इस्लामाबाद लौटे और सब कुछ बदल गया। कुछ ही दिनों बाद सीमा पर गोलीबारी से लेकर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने घुसपैठ को शह देना तेज कर दिया। उनके मई 2014 में नई दिल्ली से लौटकर जाने के बाद से अब तक करीब 490 बार पाकिस्तान संघर्ष विराम का उल्लंघन कर चुका है।

भारतीय सीमा के तमाम गांवों में पाकिस्तान मोर्टार गिराने लगा। नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ का प्रयास बढ़ गया। इधर पाकिस्तान उच्चायुक्त अब्दुल बासित नई दिल्ली में कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से मिलने लगे। ऐसे में भारत ने एक सख्त और स्पष्ट संदेश दिया कि ‘गोली और बोली’ दोनों एक साथ नहीं चल सकती। इसी क्रम में 25 अगस्त 2014 को इस्लामाबाद में प्रस्तावित विदेश सचिव स्तरीय वार्ता को भारत ने रद्द कर दिया।

रंजना



फोन डिप्लोमेसी


भले ही भारत और पाकिस्तान के बीच में उच्च स्तरीय वार्ता नहीं हुई, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने संवादहीनता नहीं आने दी। दोनों प्रधानमंत्रियों ने विभिन्न अवसरों पर चार बार फोन पर बात की।

दिसंबर 2014 : प्रधानमंत्री मोदी ने शरीफ को फोन करके पाकिस्तान के स्कूल में आतंकी हमले में मारे गए बच्चों के प्रति शोक संवेदना प्रकट की।

फरवरी 2015 : विश्वकप क्रिकेट आरंभ होने से पहले मोदी ने नवाज को फोन किया और खेल भावना के साथ चर्चा की।

मई 2015 : नेपाल में भूकंप आने के बाद भारतीय क्षेत्र में तबाही को लेकर नवाज शरीफ ने मोदी को फोन किया और अपनी संवेदना व्यक्त की।

जून 2015 : रमजान शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ‘पाक महीने के लिए’ नवाज को शुभकामनाएं दी और भारतीय जेल में बंद पाक मछुआरों को छोडऩे के निर्णय से भी अवगत कराया।


Владимир мунтян биографияnetwork cargo

Leave a Reply

Your email address will not be published.