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राष्ट्रपति चुनाव के बहाने विपक्ष का बिखराव सामने आया

राष्ट्रपति चुनाव के बहाने विपक्ष का बिखराव सामने आया

नई दिल्ली: वैसे तो राष्ट्रपति का पद संवैधानिक होता है। इसका राजनीति से कोई लेना देना नहीं है। लेकिन सत्तारुढ़ पक्ष की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू जिस तरह सर्वोच्च पद की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रही हैं और विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा की गति धीमी दिखाई दे रही है। उससे कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों की कमजोर राजनीतिक पकड़ एक बार फिर सामने आ गई है।

राष्ट्रपति चुनाव से दिखी कांग्रेस की कमजोरी

झारखंड मुक्ति मोर्चा और उद्धव ठाकरे ने द्रौपदी मुर्मू के समर्थन का फैसला किया है। यह दिखाता है कि देश की राजनीति पर कांग्रेस की पकड़ कितनी कमजोर है। क्योंकि यह दोनों ही कांग्रेस के नजदीकी सहयोगी हैं। लेकिन दोनों ने ही अपने वरिष्ठ सहयोगी की राय से अलग जाकर भाजपा की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के समर्थन का फैसला किया है।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेने के पिता और देश के प्रमुख राजनेताओं मे से एक शिबू सोरेन ने द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करते हुए अपने पत्र में लिखा है कि ‘आप सभी जानते हैं कि झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार हैं, जो एक आदिवासी महिला भी हैं। आजादी के बाद पहली बार आदिवासी महिला को राष्ट्रपति चुने जाने का सम्मान मिला है। विचार के बाद पार्टी ने द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में वोट देने का फैसला किया है।’

बगावत के डर से उद्धव ने किया द्रौपदी मुर्मू का समर्थन

महाराष्ट्र में कांग्रेस के सहयोगी शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट और उनके 16 सांसदों ने बिना मांगे द्रौपदी मुर्मू को अपना समर्थन दिया है। दरअसल उद्धव ठाकरे को यह फैसला बेहद मजबूरी में करना पड़ा। क्योंकि उनकी पार्टी के 16 सांसद द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करना चाहते थे।

महाराष्ट्र में 40 विधायकों की बगावत के बाद मुख्यमंत्री पद गंवा चुके उद्धव ठाकरे अपने सांसदों में बिखराव नहीं चाहते थे। इसीलिए उन्होंने द्रौपदी मुर्मू के समर्थन का फैसला किया। हालांकि पहले वो कांग्रेस की तरफ से प्रस्तावित उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के समर्थन का बयान दे चुके थे। लेकिन बाद में बगावत के डर से मजबूरी में उन्हें अपना फैसला बदलना पड़ा।

राष्ट्रपति चुनाव में समाजवादी पार्टी को भी झटका

उधर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने भी द्रौपदी मुर्मू के समर्थन का फैसला किया है। वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से आयोजित डिनर पार्टी में भी शामिल हुए थे, जिसमें मुर्मू भी मौजूद थीं।

राष्ट्रपति चुनाव को लेकर SBSP प्रवक्ता पीयूष मिश्रा ने बयान दिया था कि ‘राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सपा ने हमें विपक्षी दलों की बैठक में नहीं बुलाया, जिसमें विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा मौजूद थे। अब आप अनुमान लगा सकते हैं कि अगर हमें नहीं बुलाया गया, तो हमारे पास और क्या रास्ता बचा है।’

उधर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सगे चाचा शिवपाल सिंह यादव पहले ही द्रौपदी मुर्मू के समर्थन की घोषणा कर चुके हैं।

फाइल फोटो

द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में दो तिहाई मत

राष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल 10 लाख 86 हजार 431 (1086431) वोट हैं। इसमें से दो तिहाई मत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में जाने की संभावना जताई जा रही है।
श्रीमती मुर्मू के पास भाजपा और उनके सहयोगी दलों के अतिरिक्त बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, शिवसेना(उद्धव ठाकरे), अन्नाद्रमुक, तेलगू देसम पार्टी, जनता दल सेक्यूलर जैसे विपक्षी दलों का भी समर्थन हासिल है।

इन सभी दलों के वोट मिलाकर दो तिहाई हो रहे हैं। जिसे देखते हुए द्रौपदी मुर्मू की जीत पक्की लग रही है।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए 18 जुलाई को मतदान होगा। जबकि 21 जुलाई को मतगणना होगी।

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