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स्वदेशी युद्धक जलपोत दूनागिरी है देश का गौरव

स्वदेशी युद्धक जलपोत दूनागिरी है देश का गौरव

कोलकाता: स्वदेशी युद्धक जलपोत दूनागिरी को पानी में उतार दिया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में ‘पीएसयू गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स’(GRSE)द्वारा निर्मित पी17ए युद्धपोत ‘दूनागिरी’ का शुक्रवार को हुगली नदी में जलावतरण किया गया।

देश का गौरव दूनागिरी

दूनागिरी के जलावतरण के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘यह युद्धपोत हमारे लिए बहुत बड़ी संपत्ति साबित होगा। भगवान लक्ष्मण के लिए ‘संजीवनी बूटी’ लाने के लिए भगवान हनुमान पूरे द्रोणागिरी पर्वत को उठा लाए थे। द्रोणागिरी या दूनागिरी भी किसी भी स्थिति में अपने काम को अंजाम देने में सक्षम है।’

रक्षा मंत्री ने युद्धपोत निर्माण के संबंध में आत्मनिर्भरता के लिए नौसेना डिजाइन निदेशालय और अन्य नौसेना टीमों के प्रयासों का विशेष तौर पर उल्लेख किया और बताया कि विभिन्न चुनौतियों के बावजूद जहाज उत्पादन के क्षेत्र में जीआरएसई के निरंतर समर्थन और भारतीय नौसेना की कोशिशें सराहना योग्य हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘दूनागिरी’ समुद्र, आकाश और पानी के भीतर से दुश्मनों को नष्ट करने के लिए बहुआयामी क्षमताओं वाला एक विश्व स्तरीय स्टील्थ फ्रिगेट साबित होगा।

रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी की धूम

दूनागिरी के जलावतरण के मौके पर नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने बेहद अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस वक्त भारतीय नौसेना के जो 1.75 लाख करोड़ के रक्षा सौदे हैं, उनमें से 88 प्रतिशत स्वदेशी उपक्रमों को दिए गए हैं।

इस वक्त भारतीय नौसेना के 41 युद्धपोत और पनडुब्बियां का निर्माण-कार्य जारी है। इनमें से 39 स्वदेशी शिपयार्ड में तैयार किए जा रहे हैं. मात्र दो (02) युद्धपोत ऐसे हैं, जिन्हें रूस में तैयार किया जा रहा है।

दूनागिरी रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की एक अहम पहचान है। इस युद्धपोत में 75 फीसदी हथियार, उपकरण और सिस्टम स्वदेशी हैं। इसमें पहले के युद्धपोतों से बेहतर प्रणालियां हैं और यह अत्याधुनिक हथियारों से लैस है।

समुद्री चुनौतियों का अचूक जवाब दूनागिरी

भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी समुद्री सीमा है। जिसकी वजह से हमारे देश की समुद्री चुनौतियां भी सबसे बड़ी हैं। इस बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘विभिन्न देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और व्यापारिक संबंध लगातार विकसित हो रहे हैं। हिंद महासागर क्षेत्र और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। भारत के राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा, संरक्षण और बढ़ावा देने के लिए, भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और अन्य संगठनों को बुनियादी ढांचे को बढ़ाना होगा ताकि देश इन चुनौतियों से निपटने में सबसे आगे रहे।’

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