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वसुंधरा राज में मंदिरों का विध्वंस!

वसुंधरा राज में मंदिरों का विध्वंस!

लंदन से भारत की सियासी राजनीति को मकडज़ाल में उलझाने पर आमादा पूर्व आई.पी.एस. कमिश्नर ललित मोदी से पारिवारिक रिश्ते तथा अपने सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह की कंपनी के लेन-देन के मामले में विपक्ष के आरोपों से घिरी राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अब ‘अपनों’ के निशाने पर आ गईं हैं। राजे को सत्तासीन करने में अहम् भूमिका निभाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जयपुर मेट्रों के नाम पर छोटी काशी के रूप में विख्यात जयपुर में ऐतिहासिक रोजगारेश्वर मंदिर सहित 86 मंदिर हटाने के मुद्दे पर हिन्दू संगठनों के मंच के माध्यम से नौ जुलाई को प्रस्तावित जयपुर में दो घंटे के चक्का जाम आंदोलन से वसुंधरा सरकार और भाजपा के सामने चुनौती पेश करते हुए अजीब धर्म संकट के हालात उत्पन्न कर दिये हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भाजपा के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री वी.सतीश भी जयपुर पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में हालात की समीक्षा की। इस बैठक में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौड़, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी इत्यादि नेता उपस्थित थे।
संघ के मुख्यालय भारती भवन में क्षेत्रीय प्रचारक दुर्गादास की मौजूदगी में आयोजित बैठक में चक्का जाम आंदोलन के निर्णय, भाजपा के पदाधिकारियों तथा जयपुर के विधायकों की इस प्रकरण पर चुप्पी के लिए उनसे जवाब तलब करने और तकनीकी दल के साथ संघ पदाधिकारियों का मेट्रो रूट का दौरा एवं तोड़े गए प्राचीन मंदिरों का जायजा तथा संबंधित साक्ष्य जुटाकर नागपुर में संघ मुख्यालय को रिपोर्ट भेजे जाने के संकेत से भाजपा शासन सत्ता सकते में है। उधर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 350 मंदिरों के टूटने पर आंदोलन को संघ और भाजपा की मिलीभगत करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता पूर्व विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास ने सरकार से माफी मांगने और संघ से आम जनता की अपेक्षा सरकार का रास्ता रोकने की मांग की है। खाचरियावास का आरोप है कि जयपुर के भाजपा विधायकों, तीन मंत्रियों एवं सांसद की शह पर सौ से अधिक मंदिर तोड़े गये। कांग्रेस द्वारा मंदिर तोडऩे के विरोध में कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज कराया तो इन्हीं नेताओं ने पुलिस पर दबाव डालकर कार्यवाही नहीं होने दी।
मंदिर तोड़े जाने संबंधी प्रकरण में संघ के आंदोलनात्मक रूख को देखते ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आनन-फानन में अधिकारियों की बैठक बुलाकर भविष्य में मंदिरों को नहीं हटाने तथा इस मामले में विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेने की हिदायत दी। मुख्यमंत्री सचिवालय जयपुर मेट्रो, जयपुर विकास प्राधिकरण तथा जयपुर कलेक्टर सभी मंदिरों को तोडऩे अथवा हटाये जाने के संबंध में हकीकत का पता लगाने में जुटा हैं। पूर्व में कुछ मंदिरों को हटाने से पहले श्रृद्धालुओं एवं संबंधित पुजारियों से बातचीत कर सहमति ली गई तथा हटाये जाने वाले मंदिरों के लिए वैकल्पिक जमीन आवंटित की गई। वहीं मेट्रो की राह में आ रहे मंदिरों को हटाने से पहले यह प्रक्रिया नहीं अपनायी गई। कुछ मंदिरों को तोड़कर उनकी मूर्तियों को पुराने आतिश बाजार में शटर लगाने से श्रृद्धालुओं का रोष बढ़ गया है। प्राचीन रोजगारेश्वर मंदिर हटाने में भी जल्दबाजी की गई। संत समाज भी इस मामले में मुखर हुआ है। त्रिवेणीधाम के नारायणदास महाराज ने मंदिर बचाओ समिति को अपना आशीर्वाद दिया है। चक्का जाम की तैयारियों के बीच जयपुर मेट्रो तथा जिला प्रशासन और जयपुर विकास प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों पर गाज गिरने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

01-08-2015
उधर अपनी अंदरूनी खींचतान के चलते राजस्थान में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के लिए जुलाई-अगस्त माह राजनीतिक दृष्टि से अहम् माने जा रहे हैं। अजमेर नगर निगम सहित 129 स्थानीय निकायों सहित छात्रसंघ चुनावों में शक्ति परीक्षण में उनका आमना-सामना होना है। इन चुनावों के नतीजें सियासी राजनीति को किस परिप्रेक्ष्य में प्रभावित करते हैं यह देखना होगा। गौरतलब है कि गत वर्ष छात्रसंघ चुनावों में प्रदेश के प्रमुख राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर के छात्रसंघ चुनाव में कांग्रेस के संगठन एन.एस.यू.आई. ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का सफाया कर विजय पताका फहराई थी।

01-08-2015फिलहाल यह माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह को ललित मोदी प्रकरण से तनिक निजात मिली है। लेकिन, संसद के मानसून संत्र में विपक्ष के तेवर और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अब तक का मौन क्या रूख लेता है उस पर भावी राजनीति की दिशा तय होगी। लेकिन, जुलाई माह के शुरू होते ही भाजपा तथा कांग्रेस भावी शक्ति परीक्षण की दृष्टि से जहां निकाय चुनावों की तैयारियों के साथ पार्टी के संगठनात्मक आधार की मजबूती के लिए अपने तरकश में तीर जमा करने में जुटी है। वहीं दोनों दलों को आपसी गुटबाजी तथा भीतरघात से भी जूझना पड़ रहा है। मोदी प्रकरण के दौरान पूर्व धौलपुर रियासत के महल पर वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह की मिल्कियत को लेकर कांग्रेस तथा भाजपा द्वारा प्रदर्शित दस्तावेजों से राजनीतिक क्षेत्रों मे कई तरह के कयास लगाए गये हैं। कांग्रेस द्वारा अपने शासनकाल में महल संबंधी महाभारत का खुलासा नहीं किये जाने और अब संबंधित दस्तावेजों की उपलब्धता को लेकर भाजपा के ‘विभीषण’ का अता-पता लगाने के भी प्रयास किये जा रहे हैं।
राज्य चुनाव आयोग निकाय चुनावों के लिए 20 जुलाई को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन करेगा। इसी सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने की भी संभावना है। पिछली बार 22 जुलाई को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हुई थी। 18 अगस्त को मतदान एवं 21 को मतगणना हुई थी। कमोवेश इन तिथियों में कुछ फेरबदल की गुंजाइश रहेगी। निकाय चुनावों के मद्देनजर राज्य सरकार ने कोटा संभाग में ‘सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम की प्रस्तावित तिथि 21 से 27 अगस्त बदलकर 31 अगस्त से 7 सितम्बर तय की है। इससे पूर्व 25 जुलाई को भरतपुर, बीकानेर और उदयपुर संभाग में गत वर्ष सम्पन्न इस कार्यक्रम में प्राप्त जन शिकायतों पर की गई कार्यवाही की जिलावार समीक्षा की जाएगी। पिछले दिनों मोदी प्रकरण को लेकर उठे विवाद के दौरान 20 जून को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी की अध्यक्षता में सम्पन्न बैठक में निकाय चुनाव राज्य सरकार के विकास एवं जनहित कार्यों के आधार पर लडऩे का निर्णय लिया गया है। पार्टी ने इस चुनाव में भी ऐतिहासिक जीत का दावा किया है। परनामी के अनुसार निकाय चुनाव के उम्मीदवारों का पैनल वॉर्ड, मंडल और जिला स्तर पर बनाया जाएगा। पार्टी पदाधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों के रक्त संबंधियों को टिकट देने के मामले में पिछले चुनाव के समय निर्धारित नियमों का पालन किया गया। नगर निगम चुनाव के नतीजों पर सबकी निगाह रहेगी। पिछली बार कांग्रेस प्रत्याशी महापौर चुने गए थे। तब 55 सदस्यीय निगम में भाजपा के 27 पार्षद थे और उप-महापौर भी इसी दल के थे। इस बार निगम में साठ सदस्य चुने जाने हैं तथा महापौर का चुनाव पार्षद करेंगे। अजमेर के विधायक और शिक्षामंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने निगम में शानदार जीत का भरोसा व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री वसुधंरा राजे ने भी अपनी सक्रियता बढ़ाई है पिछले साल से राजनीतिक नियुक्तियों की बाट जोह रहें पार्टी नेताओं एवं प्रमुख कार्यकर्ताओं को अच्छी खबर मिलने की संभावना बढ़ गई है। हाल ही में जाट राजनीति में अग्रणी डॉ. दिगम्बर सिंह को केबिनेट मंत्री का दर्जा देकर बीस सूत्री कार्यक्रम समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है। अन्य संभावित नेताओं के बारे में ग्राउंड रिपोर्ट ली गई है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि जयपुर में मंदिर तोडऩे संबंधी प्रकरण में संघ की नाराजगी को दूर करने के लिए संघ पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों को राजनीतिक नियुक्तियों में वरीयता दी जा सकती है। बहरहाल जुलाई-अगस्त की राजनीतिक गतिविधियों तथा निकाय चुनाव नतीजों पर सभी की निगाहें रहेंगी।

जयपुर से गुलाब बत्रा

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