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देश की सीमा से लेकर लोकतांत्रिक व्यवस्था तक की रक्षा में अग्रणी है ‘भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड’

देश की सीमा से लेकर लोकतांत्रिक व्यवस्था तक की रक्षा में अग्रणी है ‘भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड’

भारतीय सेना पर सभी देशवासियों को गर्व है। हमारे वीर सिपाही दिन रात सीमाओं की रक्षा में जुटे होते हैं। जिससे कि हम अपने घरों में चैन की नींद सो पाएं। लेकिन देश की सेना को लड़ाई के लायक बनाने वाले छिपे योद्धाओं पर कोई चर्चा ही नहीं होती। आज की सीरिज में हम बात करेंगे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी BEL की। जो कि हमारी सशस्त्र सेनाओं के लिए आंख और कान का काम करती है।

देश की यह अग्रणी पीएसयू यानी पब्लिक सेक्टर की कंपनी सेना के लिए रक्षा उपकरण तैयार करती है। बीईएल की विशेषज्ञता आर्म्ड फोर्सेज के लिए संचार उपकरण बनाने में है। इसके अलावा यह कंपनी रडार, डेटा लिंक संचार प्रणाली जैसे कई अहम उत्पादों और सेवाओं का निर्माण और मेन्टेनेन्स देखती है। साल 1954 में निर्मित बीईएल को साल 2002 में मिनी रत्न श्रेणी का दर्जा हासिल हुआ। यह तमगा हासिल करने वाली यह करने वाली पहली सार्वजनिक रक्षा कंपनी बनी।


बीईएल सिर्फ देश की सीमाओं की रक्षा करने के लिए ही उपकरण नहीं बनाती है बल्कि यह लोकतंत्र की बुनियादी जरुरत यानी इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन(EVM) का भी निर्माण करती है। इसके अलावा बीईएल राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए बायोमीट्रीक कैप्चरिंग सिस्टम भी बनाती है।

बीईएल देश का गौरव है। यह हमारी सीमाओं और लोकतंत्र की रक्षा करने के साथ साथ सरकार को मुनाफा भी कमा कर देती है। भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड की आगे की क्या योजना है और देश की तरक्की में कंपनी आगे क्या योगदान करने वाली है। इस विषय पर बीईएल के डायरेक्टर फाइनांस श्री दिनेश कुमार बत्रा ने उदय इंडिया के साथ विस्तार से चर्चा की।

पेश है इस चर्चा के अहम अंश-

उदय इंडिया- आने वाले भविष्य के लिए बीईएल किस तरह की योजनाएं लेकर सामने आ रही है?

दिनेश कुमार बत्रा- बीईएल अपनी स्थापना के वर्ष 1954 से ही लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। पिछले दो वर्षों में कोरोना के दौरान लॉकडाउन से जूझते हुए बीईएएल ने अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखा। लेकिन इन सालों में भी हम अपने प्रदर्शन के उच्चतम शिखर पर पहुंचे। पिछले साल हमने 15 हजार करोड़ के टर्नओवर के उच्चतम लक्ष्य को हासिल किया।
हमारी कंपनी में 51 फीसदी भागीदारी सरकार की है। बाकी आम लोगों की है। हमारी प्रतिबद्धता है कि बीईएल अपने शेयरधारकों को अधिकतम फायदा पहुंचाए। हमने 450 करोड़ का डिविडेंट दिया।
हम 24 हजार करोड़ से 60 हजार करोड़ के मार्केट कैपिटलाइजेशन तक पहुंच चुके हैं। अभी तक हम डिफेंस सेक्टर में ही थे लेकिन अब नागरिक उड्डयन, मेट्रो, रेलवे, इलेक्ट्रोनिक व्हिकल के क्षेत्र में काम करने जा रहे हैं। हम आपको बता दें कि कोरोना काल के दौरान हमने आईसीयू ग्रेड के 30 हजार वेंटिलेटर बनाकर देश के कोने कोने तक पहुंचाया।

उदय इंडिया- पूरी दुनिया पर कोरोना का असर दिखाई दिया। लेकिन बीईएल ने इस दौरान भी अपनी प्रगति की यात्रा जारी रखी। इसका राज क्या है?

दिनेश कुमार बत्रा- इसका श्रेय बीईएल के सीनियर मैनेजमेन्ट से लेकर आम वर्कर तक को जाता है। हमारी सीएमडी कोरोना के दौरान खुद फ्लोर पर मौजूद रहती थीं। हमारी रिसर्च , तकनीकी, मेटेरियल मैनेजमेन्ट, प्रोडक्शन की टीम ने अपनी जान की चिंता भी ना करते हुए अधिकतम उत्पादन के लक्ष्य को हासिल किया। बीईएल के पास एक समर्पित टीम है। जो कि देश के हित के सामने अपना स्वार्थ नहीं देखती है।
बीईएल की टॉप मैनेजमेन्ट हों या आम कर्मचारी। उनके मन में ये भाव रहता है कि वह डिफेंस सेक्टर के लिए काम कर रहे हैं। इसलिए वो जी जान से काम करते हैं।
हम आप को बता दें कि हमारा लक्ष्य 15 फीसदी की ग्रोथ हासिल करना था। लेकिन कोरोना के दौरान प्रतिबंधों की वजह से हम 9 फीसदी तक ही सिमट कर रह गए। लेकिन जल्दी ही हम 15 फीसदी की अपनी ग्रोथ रेट को हासिल कर लेंगे।


उदय इंडिया – अभी हाल ही में बीईएल को भारतीय सेना की तरफ से बड़ा कांट्रेक्ट मिला है। जिसमें टैंकों की मेन्टेन्स और फायटर प्लेन के उपकरण तैयार करने का कांट्रेक्ट शामिल है। भविष्य में आप इस तरह के कितने बड़े कांट्रेक्ट बीईएल के पास आते हुए देखते हैं?

दिनेश कुमार बत्रा- साल 2021-22 में बीईएल ने आर्मी, नेवी, एयरफोर्स, चुनाव आयोग समेत कई जगहों से 19 हजार करोड़ के कांट्रेक्ट हासिल किए। इस साल भी 20 हजार के ऑर्डर आने की उम्मीद है। हमारी पहले से 57 हजार करोड़ के ऑर्डर बुक हैं। जिसकी वजह से हमने 15 फीसदी के ग्रोथ का लक्ष्य रखा है।
हम उम्मीद करते हैं कि प्रतिवर्ष हम कम से कम 20 हजार करोड़ के ऑर्डर आते रहेंगे।

उदय इंडिया- प्रधानमंत्री मेक इन इंडिया कार्यक्रम में बीईएएल का क्या योगदान रहा है?

दिनेश कुमार बत्रा- बीईएल पहले से ही मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत काम कर रहा है। हम इनहाउस टेक्नोलॉजी तैयार करते हैं। हमने लगभग 1000 करोड़ यानी कि अपने टर्नओवर का 6 से 7 फीसदी शोध कार्य पर खर्च किया है। जो कि तकनीक के भारतीयकरण का रास्ता तैयार करती है। यह प्रधानमंत्री महोदय के आत्मनिर्भर भारत की दिशा में दिए गए मार्गदर्शन के प्रकाश में उठाया गया कदम है।
हमें जिन उपकरणों का बाहर से आयात करने की जरुरत पड़ती है, उसका सैंपल हम स्वदेशी कंपनियों को देते हैं कि आप इस जैसा उपकरण तैयार कीजिए तो हम इसका ऑर्डर आपको ही देंगे।
हम आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को नई दिशा में ले जाने का काम कर रहे हैं।

उदय इंडिया- रक्षा क्षेत्र उत्पादन के क्षेत्र में निजी कंपनियां भी उतर रही हैं। क्या बीईएल आने वाले समय में इस क्षेत्र में बढ़ती स्पर्धा से कैसे निपटेगी।

दिनेश कुमार बत्रा- सही बात है स्पर्धा बढ़ रही है। लेकिन इसके साथ ही मार्केट का आकार भी बढ़ रहा है। जो कल तक आयात किया जाता था वह देश में ही बनेगा। स्पर्धा का मतलब यह नहीं है कि हमारा मार्केट कहीं और चला जाएगा।
बीईएल ने रक्षा क्षेत्र में उत्पादन करने वाली कंपनियों से व्यापारिक सहयोग बनाए हैं। हमने कई कंपनियों के साथ एमओयू साइन किया है। जैसे कि वो प्लेटफॉर्म बनाते हैं और हम उसमें लगने वाले सेंसर तैयार करते हैं। इस तरह का आपसी सहयोग बढ़ रहा है।
स्पर्धा जितनी बढ़ती है, काम उतना अच्छा होता है। ऑटोमोबाइल सेक्टर को देखिए कि भारत में जैसे जैसे स्पर्धा बढ़ी हमारे देश में बनने वाली कारों की गुणवत्ता बढ़ गई।
बढ़ती हुई स्पर्धा से हमें उल्टा फायदा होने वाला है। क्योंकि हमारी गुणवत्ता बढ़ती जा रही है।

उदय इंडिया- बीईएल देश में रक्षा क्षेत्र के ही उपकरण मात्र नहीं बनाती है बल्कि सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी करती है। क्या भविष्य में बीईएल इस तरह की हिस्सेदारी को और बढ़ाएगी?

दिनेश कुमार बत्रा- हमने कोरोना के दौर में 15 करोड़ का योगदान दिया था। हमने अपनी 51 करोड़ की सीएसआर फंडिंग शिक्षा, स्वास्थ्य, ट्रेनिंग और बुनियादी निर्माण के लिए खर्च किया। बीईएल अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर प्रतिबद्ध है। हम जिस देश से जमीन, मानव संसाधन, पर्यावरण, ऊर्जा लेते हैं, उसके प्रति अपनी जिम्मेदारी को हम अच्छी तरह समझते हैं।

उदय इंडिया- विदेश में बीईएल के निर्यात की संभावना को आप किस तरह से देखते हैं?

दिनेश कुमार बत्रा- हम विदेश में निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। भारत सरकार ने इस विषय में एक नीति भी बनाई है। हमारी योजना है कि भविष्य में बीईएल के टर्नओवर का 10 फीसदी हिस्सा निर्यात से आए। इसके लिए हम उन देशों में अपने दफ्तर खोल रहे हैं, जहां हमारी मार्केट अच्छी है। हम पहले से ही सिंगापुर, वियतनाम, श्रीलंका, म्यांमार, न्यूयॉर्क में हमारे ऑफिस मौजूद हैं। हम जल्दी ही नाइजीरिया और ब्राजील में भी दफ्तर खोलेंगे। जिससे कि इन देशों में, जहां हमारे संभावित ग्राहक मौजूद हैं, उनकी जरुरतों को समझ सकें और उनके मुताबिक प्रोडक्ट तैयार कर सकें।

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