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भारी तनाव में मराठा दिग्गज शरद पवार, NCP नेताओं को दिया झटका

भारी तनाव में मराठा दिग्गज शरद पवार, NCP नेताओं को दिया झटका

मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता शरद पवार इन दिनों बेहद तनाव में चल रहे हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक दल राष्ट्रवादी नेशनलिस्ट पार्टी यानी NCP की सभी ईकाइयों और प्रकोष्ठों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। जिससे लगता है कि शरद पवार को अपनी पार्टी के नेताओं पर भरोसा नहीं रह गया है।

क्यों दुखी हैं पवार

शरद पवार इसलिए नाराज हैं, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि NCP उनके हाथ से फिसलती जा रही है। इसकी झलक पिछले दिनों राष्ट्रपति चुनाव के दौरान दिखी। जब –

– एनसीपी से जीते झारखंड के विधायक कमलेश सिंह ने द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में मतदान किया।

-गुजरात के एनसीपी विधायक कांधल एस. जडेजा ने भी एनडीए के पक्ष में वोट डाला। इन दोनों ने अंतरात्मा के आधार पर वोट डालने का दावा किया।

इसके अलावा शिवसेना में उद्धव ठाकरे को साइडलाइन करके उसके विधायकों ने भाजपा के साथ सरकार बना ली है। जिसे देखते हुए शरद पवार का भी अपने नेताओ पर से भरोसा हटने लगा है। इसलिए वयोवृद्ध मराठा छत्रप शरद पवार ने एनसीपी की सभी ईकाइयों और प्रकोष्ठों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।

प्रफुल्ल पटेल ने दी जानकारी

एनसीपी की सभी ईकाइयों और प्रकोष्ठों को तत्काल प्रभाव से भंग करने से संबंधित जानकारी शरद पवार के करीबी और एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने दी।

उन्होंने बुधवार को देर रात ट्वीट करके बताया कि ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार जी की मंजूरी से एनसीपी के सभी प्रकोष्ठों और विभागों को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाता है।’
हालांकि एनसीपी ने जिन विभागों को भंग किया है, उनमें राष्ट्रवादी महिला कांग्रेस, राष्ट्रवादी यूथ कांग्रेस और राष्ट्रवादी छात्र कांग्रेस शामिल नहीं हैं।

क्या पवार के हाथ से खिसक रही है पावर

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने यह कदम ऐसे वक्त में उठाया है, जब तीन सप्ताह पहले ही महा विकास अघाड़ी सरकार को महाराष्ट्र की सत्ता से बेदखल कर दिया गया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार में एनसीपी सबसे बड़ी साझेदार के तौर पर सम्मिलित थी।

हालांकि मुख्यमंत्री का पद उद्धव ठाकर के पास था। लेकिन सत्ता के सभी सूत्र परदे के पीछे से पवार ने अपने हाथ में थाम रखे थे। पवार की वजह से ही कांग्रेस पार्टी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना एक साथ आकर सरकार चलाने के लिए तैयार हुए थे। महाराष्ट्र में शिवसेना,एनसीपी और कांग्रेस की एक साथ सरकार बनवाना शरद पवार के जीवन का सबसे बड़ा कारनामा था। क्योंकि यह तीनों ही दल एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे हैं।

ऐसे में महा विकास अघाड़ी सरकार का गिर जाना शरद पवार के लिए निजी झटके से कम नहीं है। उन्हें आशंका है कि एनसीपी के खेमें में भी शिवसेना की तरह बगावत हो सकती है। हो सकता है इसी वजह से उन्होंने एनसीपी की सभी ईकाइयों को भंग करने का फैसला किया हो।
शरद पवार के इस फैसले से खुद उनकी पार्टी के नेता आश्चर्यचकित हैं।

 

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