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स्वागत के बहाने समीकरण साधने की सियासत

स्वागत के बहाने समीकरण साधने की सियासत

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सियासी समीकरणों का जोर किस ओर होगा इसे ध्यान में रखकर भारतीय जनता पार्टी मिशन 2017 की तैयारियों में अभी से जुट गयी है। सपा सरकार में बिजली के मूल्यों में 55 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। प्रदेश की जनता इस वृद्धि से बेहद गुस्से में हैं। समाजवादी पार्टी के अन्दाज में ही जवाब देने की भारतीय जनता पार्टी ने नीति और रणनीति तय करके सड़कों पर धमा चौकड़ी मचानी शुरू कर दी है। भारतीय जनता पार्टी हर हालत में यूपी की सत्ता पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। लोकसभा चुनाव में सूपड़ा साफ करा चुकी बहुजन समाज पार्टी पहली बार विधानसभा में समाजवादी पार्टी के साथ भाजपा के विरूद्ध स्वर मिले मेरा तुम्हारा तो स्वर बने हमारा गाने को मजबूर हुई है। इस चुनाव में धर्मनिरपेक्षता के नये अर्थ तैयार किए गये। बहुसंख्यकवाद बनाम अल्पसंख्यकवाद समर्थन करने वाली पार्टियों में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी तथा बसपा को पूरी तरह प्रदेश की जनता ने नकार दिया है। केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में प्रधानमंत्री सहित 9 मंत्री उत्तर प्रदेश से होने की वजह से पूरे सूबे में भाजपा के पक्ष में तेज लहर चलाने की कवायद शुरू हो गयी है। आने वाले दिनों में भाजपा उत्तर प्रदेश को लीड करने के लिए हर वह कदम उठाने को तैयार है जिससे जाति और संप्रदाय में बंटे उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को विकास के अंकगणित में उलझाकर अपने जनाधार को मजबूत करके उत्तर प्रदेश के सिंहासन पर कब्जा करने में कामयाबी मिल सके। ऐसे में सामाजिक और सियासी समीकरण भाजपा बनाम समाजवादी पार्टी के बीच होना तय माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश का नया नारा गढऩे के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव विकास बनाम सुशासन पर चुनाव लडऩे का मन बना रहे हैं। जातिगत समीकरण में अति पिछड़ों की अच्छी खासी संख्या है जो चुनाव को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में 17 अति पिछड़ी जातियों का आरक्षण मुद्दा काफी कारगार सबित हुआ, पर प्रजापति व राजभर के अलावा निषाद्ध वर्ग को कोई तरजीह नहीं दी गयी। 17 अति पिछड़ी जातियों में 13 उपजातियां निषाद्ध मछुआरा समुदाय की हैं, जिनकी पिछड़ों में आबादी लगभग 13 प्रतिशत है। आरक्षण का मुद्दा निषाद्ध मछुआरा समाज का अति संवेदनशील मुद्दा है और गोरखपुर के आरक्षण आन्दोलन के बाद सपा की परेशानी और बढ़ गयी है, निषाद्ध मछुआरा समुदाय की केन्द्रीय मंत्री निरंजन ज्योति तथा आवला से सांसद धर्मेंद्र्र कश्यप की अगुवाई में नाराज लोगों को अपने पाले में लाने के लिए लग गए हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रभारी ओम प्रकाश माथुर ने पार्टी कार्यकर्ताओं का आवाहन किया कि वे पूरी संकल्पशक्ति के साथ एकजुट होकर एक लक्ष्य लेकर मिशन 2017 की तैयारियों में अभी से जुट जाये। उन्होंने कहा पार्टी संगठन में काम करते हुए दायित्व बदलते रहते है, लेकिन कार्यकर्ता के रूप में हमारी भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रहती है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि हमारा मूल उद्देश्य तभी पूरा हो सकेगा जब हम उत्तर प्रदेश की जनता को सपा सरकार के कुशासन से मुक्ति दिलाकर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने का लक्ष्य पूरा करेंगे। इसके पूर्व पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट से लेकर पार्टी मुख्यालय तक जगह-जगह पर नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम प्रकाश माथुर, राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय एवं राष्ट्रीय मंत्री डॉ. महेन्द्र सिंह का स्वागत किया।

माथुर ने प्रदेश में सदस्यता अभियान के तय लक्ष्य से भी अधिक सदस्यता किये जाने को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं की प्रशंसा व उनको बधाई देते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में अपनी संगठनात्मक भूमिका का प्रदर्शन कर चुके पार्टी कार्यकर्ताओं ने सदस्यता अभियान में भी अपनी क्षमता का भरपूर प्रदर्शन किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आवाहन किया कि वे महासम्पर्क अभियान के माध्यम से पार्टी के नये बने सदस्यों से सम्पर्क कर उन्हें पार्टी का कार्यकर्ता बनाने का काम करें।

माथुर ने कहा प्रदेश में एक लाख चालीस हजार बूथों में पार्टी ने एक लाख बीस हजार बूथों पर प्रवासी कार्यकर्ता की योजना बनाई। यह हमारे लिये हर्ष का विषय है कि हम प्रदेश में 94 हजार बूथों तक प्रवासी कार्यकर्ताओं की योजना रचना के लक्ष्य को पूरा कर चुके हैं और शीघ्र ही हम शेष बचे बूथों पर भी प्रवासी कार्यकर्ता के लक्ष्य को पूरा कर लेंगे। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं का आवाहन किया कि वे पूरे जोश के साथ पार्टी संगठन के काम में लगे रहें। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के परिश्रम से हम मिशन 2017 को पूरा करते हुए प्रदेश में पार्टी की सरकार बनाने में सफल होंगे।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा कि उत्तर प्रदेश को सपा सरकार के कुशासन से मुक्ति दिलाकर भाजपा की सरकार बनाने के लिये हमारी आगामी रणनीति एवं संगठनात्मक भूमिका को तय करने में हमारे राष्ट्रीय पदाधिकारियों का मार्गदर्शन हमें निश्चित रूप से लाभ पहुंचायेगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश के पार्टी कार्यकर्ताओं पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि हम केन्द्रीय पदाधिकारियों के मार्ग दर्शन और पार्टी कार्यकर्ताओं के सहयोग और परिश्रम के भरोसे प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने का लक्ष्य पूरा कर सकेंगे।

पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने केन्द्र में मोदी सरकार को बनाने का श्रेय उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं को देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं ने अपने परिश्रम व संगठनात्मक गतिविधियों में अपनी भूमिका का सही ढंग से निर्वाहन करते हुए इतनी बड़ी संख्या में सांसदों को जीताकर भेजा कि केन्द्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बन गई। उन्होंने योग को लेकर राजनीति करने वाले लोगों को मानसिक रूप से विकलांग बताते हुए कहा कि लगभग 48 मुस्लिम देशों मे योग दिवस मनाया गया जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। लेकिन, अपने देश में वोट के ठेकेदार योग का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश की सपा सरकार पर केन्द्रीय योजनाओं में रूचि न लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता को केन्द्र की मोदी सरकार का लाभ पूरे तौर पर मिल सके इसके लिए प्रदेश में भी भाजपा की सरकार बनानी होगी।

पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री डॉ. महेन्द्र सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं का आवाहन किया कि वे पूरी इच्छा शक्ति के साथ प्रदेश में पार्टी की सरकार बनाने के लिए अभी से संगठन की कार्ययोजना के अनुसार जुट जाये। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की उपलब्धियां और अखिलेश सरकार की नाकामियां हमें मिशन 2017 का लक्ष्य पूरा करने में लाभप्रद होंगे। स्वागत के बहाने समीकरण साधने की सियासत में लगी भारतीय जनता पार्टी ने गुटों में बंटी भारतीय जनता पार्टी में एक जुटता का संदेश जनता से अधिक कार्यकर्ताओं के बीच देने का प्रयास किया है। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के उस कथन पर कि समाजवादी पार्टी की सरकार दुनिया में सबसे अधिक नौकरी देने वाली पार्टी है, पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय निषाद संघ के प्रदेश महासचिव व कांग्रेस पार्टी के प्रदेश महासचिव रमेश चन्द्र निषाद ने कहा कि मुख्यमंत्री यह कहते कि सपा सरकार ने सबसे अधिक यादवों को पद व नौकरी दी हैं तो उचित होता। उन्होंने कहा कि दुनिया में मुलायम सिंह व अखिलेश यादव से बड़ा दूसरा कोई जातिवादी नहीं है।

उत्तर प्रदेश में चाचा-भतीजा के पास ही सारे प्रमुख सरकारी पद व विभाग हैं तथा चाचा-भतीजा की मुट्ठी में ही पूरी सरकार है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश मलाईदार विभाग मुख्यमंत्री व शिवपाल यादव के ही पास है तथा अति पिछड़ा वर्ग सपा सरकार में बिल्कुल बेकदर है। राजनीति के चतुर खिलाड़ी मुलायम सिंह यादव कई बार बिखरने के बाद नया कुनबा बनाकर कामयाबी का कमाल दिखा चुके है। उम्र के सात दशक से अधिक पार कर चुके वयोवृद्ध समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव के कंधे पर एक बार फिर समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश में लीड करने की जिम्मेदारी आन पड़ी है। उत्तर प्रदेश की कमान अपने पुत्र अखिलेश यादव को सौंप चुके मुलायम सिंह यादव को आने वाले दिनों में होने वाली अग्नि परीक्षा से पार्टी को एक बार फिर मजबूती के साथ निकालना होगा। 2000 करोड़ की लागत से बनने वाली रामजानकी पंथ की घोषणा के साथ हिन्दी पट्टी के सबसे बड़े राज्य व देश के दिल के रूप में पहचाने जाने वाले उत्तर प्रदेश के राजनैतिक रंगमंच पर सियासी दंगल के लिए शतरंज की चाल चलने के लिए बिसात बिछ गई है। लोकसभा चुनाव में 73 सीटें जीतकर भाजपा का परचम फहर चुका है।

इस परचम में शामिल 11 विधायक सांसद बन चुके है। अब इन्ही विधायकों द्वारा छोड़ी गयी सीटों पर उपचुनाव में सिर्फ 3 सीटें भाजपा को वापिस मिली हैं। विधानसभा उत्तर प्रदेश चुनाव से लेकर केन्टोमेन्ट बोर्ड के चुनाव तक और विधान परिषद के चुनाव आने तक काफी भद्द पिटा चुकी है। फिर भी बदलते समीकरण के बीच भाजपा के तेवर और उसके प्रति जादुई आकर्षण के कम होने को नेता नहीं मान रहे है, इसलिए भाजपा में शामिल होने की होड़ दिख रही है। 2017 में होने वाले विधानसभा के चुनावों को फतह करने की रणनीति के तहत सपा, भाजपा, कांग्रेस अपने हर दांव चलने की तैयारी में लगी है।

बसपा सुप्रीमों मायावती का टूटता तिलिस्म बसपा के लिए खतरे की घंटी साबित हो रहा है। हार का डर माया को दिखने लगा है। इसी कारण बहुजन से सर्वजन और सर्वजन से बहुजन की और लौट रही बसपा के लिए सब कुछ पहले जैसा नही रहा है। अखिलेश दास से लेकर जुगल किशोर तक आते-आते दूसरी ही कहानी कह रहे है। वहीं जनता एक बार फिर 2007 के इतिहास की ओर कदम बढ़ा दें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। समाजवादी पार्टी के अनेक विधायकों की आंखों में आंसू झलक रहे है, लेकिन तीन वर्षों के शासन के कारण दबी जुबान से अपना ब्यान जिस तरह व्यक्त कर रहे है। उनके दुख-दर्द पर मरहम नहीं लगा तो अतीत एक बार फिर दोहराया जायेगा। वर्ना इस बार बाजी भाजपा के हाथों में जाने से कोई रोक नही पायेगा।

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