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चीन का संकट बन सकता है दुनिया की मुसीबत

चीन का संकट बन सकता है दुनिया की मुसीबत

नई दिल्ली: जब कोई देश आंतरिक संकट में उलझने लगता है तो उसपर से ध्यान हटाने के लिए वह बाहर की तरफ फोकस करता है।

चीन की अर्थव्यवस्था के बुरी तरह से तबाह होने के संकेत मिल रहे हैं। जिसकी वजह से पूरी दुनिया खास तौर पर एशिया पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। क्योंकि चीन लगातार आक्रामक नीतियां अपना रहा है। जो कि कभी भी घातक रुख अख्तियार कर सकता है।

चीन की अर्थव्यवस्था तबाह

चीन की आर्थिक हालत खराब होती जा रही है। साल 2022 की दूसरी तिमाही में चीन की जीडीपी दर गिरकर 0.4% पहुंच गई है। यह चीन की अर्थव्यवस्था के विस्फोटक भविष्य का संकेत दे रहा है।

चीन में बेरोजगारी दर बढ़कर 19.3 हो चुकी है। आशंका जताई जा रही है कि इस साल चीन में नौकरी के लिए 1.2 करोड़ नए डिग्री होल्डर छात्र आ जाएंगे। जिससे हालात और खराब हो जाएंगे। अभी तक चीन में करीब 8 करोड़ युवा बेरोजगार हैं।

बीजिंग की सिंघुआ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर झेंग युहुआंग के मुताबिक ‘2022 चीन के लिए मुश्किल साल है। 2022 के पहले क्वॉर्टर में चीन में 4.60 लाख कंपनियां बंद हो चुकी हैं और 31 लाख बिजनेस परिवार दिवालिया हो गए हैं। इस साल 1.76 करोड़ कॉलेज ग्रैजुएट निकले हैं, जिससे नौकरियों का संकट पैदा हो गया है।’

इसके अलावा कोरोना संकट के समय चीन सरकार की कड़ी नीतियों के कारण कई कंपनियों ने कर्मचारियों की छंटनी कर दी। जिसकी वजह से लाखों लोग सड़क पर आ गए।

मुश्किल ये भी है कि कोयले की कमी होने की वजह से चीन बुरी तरह बिजली संकट से जूझ रहा है। औद्योगिक इलाकों में कई घंटों के लिए बिजली गुल हो रही है। जिसकी वजह से चीन का विश्वप्रसिद्ध मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रभावित हो रहा है।

चीन के बैंक हो रहे हैं बर्बाद

अर्थव्यस्था की कमजोरी के बीच चीन में बड़ा बैंकिंग संकट भी पैदा हो गया है। बैंकों से ग्राहकों के पैसा निकालने पर रोक लगाई गई है। बैंकों के बाहर टैंक तैनात कर दिए गए हैं।
अप्रैल में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर के मुताबिक चीनी बैंकों में जबरदस्त घोटाला हुआ है। खबर है कि 40 बिलियन युआन (6 बिलियन अमेरिकी डॉलर) चीन के बैंकिंग सिस्टम से गायब हो गए। इसके बाद हेनान और अनहुई प्रांत में बैंको ने लोगों को बैंक से पैसे निकालने से रोक दिया गया।

बैंक ग्राहकों को रोकने के लिए चीन के हेनान प्रांत में बैंकों के बाहर टैंक लगाने पड़े। इस पूरे मामले में न्यू ओरिएंटल कंट्री बैंक ऑफ कैफेंग, जिचेंग हुआंगहुई कम्युनिटी बैंक, शांगकाई हुइमिन काउंटी बैंक और युजौ-शिन-मिन-शेंग-विलेज बैंक पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।

आंतरिक संकट से ध्यान हटाने के लिए चीन हुआ आक्रामक

अपने अंदरुनी संकट से जनता का ध्यान हटाने के लिए चीन अपने पड़ोसियों के साथ आक्रामक नीतियां अपना रहा है। जिसकी वजह से दुनिया की सुरक्षा को कभी भी खतरा पैदा हो सकता है।

– भारत के साथ 16वीं कमांडर स्तर की बातचीत में चीनी सेना की हठधर्मिता की वजह से कोई नतीजा नहीं निकला।

– चीनी फायटर प्लेन भारतीय सीमा के नजदीक कई बार उड़ान भर चुके हैं।

– चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिक भारतीय सीमा के पास पैंगोंग झील के पास सैन्य अभ्यास कर रहे हैं

– भारत की सीमा के पास डोकलाम में चीन ने 9 किलोमीटर पूरब की दिशा में एक सैन्य अड्डा तैयार कर लिया है। जिसकी वजह से भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक पर खतरा पैदा हो गया है

– चीन भारतीय सीमा के पास पूर्वी लद्दाख क्षेत्र के शाकचे के पास शिनजियांग प्रांत में अपने लड़ाकू विमानों के ऑपरेशन्स के लिए एयरबेस तैयार कर रहा है

– चीनी सेना ने लंबी दूरी तक वार करने वाले PCL191 नाम के एक नए रॉकेट सिस्‍टम का भी परीक्षण किया है। इसे भारत और ताइवान की सीमा पर तैनात किया जा रहा है

-भारतीय खुफिया सूत्रों ने जानकारी दी है कि चीन ने गलवान घाटी के पास अपने सैनिकों की संख्या धीरे धीरे बढ़ाकर 50 हजार कर ली है

– अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अधिकारी जनरल मार्क मिले ने बताया है कि चीन की सेना बेहद खतरनाक तरीके से दूसरे देशों के साथ आक्रामक व्यवहार कर रही है

-अमेरिकी जनरल ने बताया कि प्रशांत महासागर इलाके में चीनी विमानों और जहाजों की अमेरिका और उनके अन्य सहयोगी बलों के साथ इंटरसेप्ट की घटनाओं की संख्या काफी बढ़ गई है

– दक्षिण चीन सागर में चीन की दादागीरी बढ़ती जा रही है। इस इलाके में चीनी जहाज दूसरे देशों के जहाजों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।

चीन की करतूतों से सहमे छोटे पड़ोसी देश

भारत के लिए चीन की आक्रामकता कोई नया नहीं है। चीन की सभी बंदरघुड़कियों का सामना करने के लिए भारतीय फौज तैयार है। भारत ने चीन की सीमा पर एस-400 से लेकर कई बड़े हथियारों की तैनाती कर दी है। लेकिन चीन के छोटे पड़ोसी देश डरे हुए हुए हैं।

चीन के नजदीकी ताइवान को हमेशा चीन के हमले का डर सता रहा है। ताइवान ने चीनी हमले के डर से अपने नागरिकों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग शुरु कर दी है। उसे डर है कि कि चीन की फौज कभी भी ताइवान पर हमला कर सकती है। ताइवान की राजधानी ताइपेई में चीनी हमला होने की सूरत में शहर को खाली करने और नागरिकों को बंकर तक पहुंचाने की ड्रिल लगातार चल रही है। जिससे लगता है कि चीन का खतरा कितना बड़ा है।

चीन से निपटने में भारत की बड़ी भूमिका

चीन की आक्रामकता पूरी दुनिया देख रही है। खास तौर पर अमेरिका बेहद सतर्क है। क्योंकि रूस यूक्रेन की जंग से दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। ऐसे में विश्व किसी नए युद्ध से नहीं जूझ सकता है। इसलिए अमेरिका की निगाहें चीन पर टिकी हुई हैं।

अमेरिका के सैन्य अधिकारी जनरल मार्क मिले ने बताया है कि चीन के युद्धपोत प्रशांत महासागर में अमेरिकी जहाजों के काफी पास तक आकर असुरक्षित माहौल पैदा कर रहे हैं। अमेरिकी फौज चीनी और अमेरिकी नौसेना के बीच आमने-सामने की घटनाओं के विवरण इकट्ठा कर रही है। जिससे कि चीनी नौसेना की आक्रामकता और हाल के घटनाओं के पीछे के पैटर्न का पता लगाया जा सके। अमेरिका का आरोप है कि दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर में कई बार उसके युद्धपोतों का सामना चीन के जहाजों से हुआ है।

अमेरिका ने चीन से खतरे से निपटने के लिए भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों से मुक्त कर दिया है। इसीलिए भारत को रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की सप्लाई पर अमेरिका ने किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया।

दुश्मन का दुश्मन दोस्त

भारत ने भी चीन की हरकतों पर बारीकी से नजर बना रखी है। चीन की करतूतों का जवाब भारत अपनी डिप्लोमेसी से दे रहा है। भारत अपने मित्र देशों के जरिए चीन को पीछे घेर रहा है। जिससे किसी भी संकट की घड़ी में चीन की फौज को सामने से उलझाकर उसपर पीछे से भी हमला करने का विकल्प खुला रहे। भारत ने चीन की पीठ पर बैठे देशों को ब्रह्मोस मिसाइल बेचनी शुरु कर दी है।

भारत ने पहले फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल बेची है। अब इंडोनेशिया से उसका ब्रह्मोस मिसाइल बेचने का करार होने जा रहा है। भारत, इंडोनेशिया को एंटी शिप वैरिएंट ब्रह्मोस मिसाइल बेचने जा रहा है। दोनों देशों के बीच यह सौदा इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा।

इंडोनेशिया के अलावा मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम भी ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की इच्छा जता चुके हैं। इंडोनेशिया के अलावा मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों के साथ साउथ चाइना सी को लेकर चीन का झगड़ा चल रहा है। साल 2018 में भारतीय नौसेना, इंडोनेशियाई नौसेना का द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास समुद्र शक्ति किया था। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ रही उपस्थिति और नतूना द्वीप के पास चीन की गतिविधियां बढ़ने की वजह से भारत और इंडोनेशिया समुद्री सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

चीन अपनी बर्बाद होती अर्थव्यवस्था से चीनी जनता का ध्यान हटाने के लिए कभी भी युद्ध जैसी आक्रामक स्थिति उत्पन्न कर सकता है। जिसके लिए अमेरिका सहित चीन के सभी पड़ोसी देश तैयार हैं। चीन के साथ आशंकित जंग में भारत की बेहद अहम भूमिका है। जिसकी वजह से सबकी उम्मीदें भारत से बढ़ गई हैं। लेकिन कोई भी दूसरी जंग पूरी कायनात के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।


अंशुमान आनंद

 

 

 

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