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लोक लुभावन से दूर, दूरगामी परिणाम देने वाला बजट

लोक लुभावन से दूर, दूरगामी परिणाम देने वाला बजट

By शंकर अग्रवाल

मोदी सरकार का पहला पूर्ण बजट लोक लुभावन वादो से दूरी बनाये हुए हैं, साथ ही एक आदमी जहाँ कर में छूट की उम्मीद किए बैठा था, उसे भी निराषा हाथ लगी है। लेकिन बजट का दूसरा पक्ष यह भी है कि वित्त मंत्री जी ने जिन उपायों की घोषणा की है उससे आगामी वर्षों में देष का वित्तीय ढ़ांचा सुदृढ़ होगा एवं देष विकासषील देषों की पंक्ति में आने की तैयारी कर सकेगा। आज बजट पर तत्काल आलोचनात्मक प्रतिक्रिया देने वालों को हमारे पडौसी देष चीन की विकास यात्रा से बहुत कुछ सीखना चाहिए, कि उन्होंने अपनी इस यात्रा को पूर्ण करने में कितने पड़ाव लिए है अत: यह बजट विकास यात्रा में मील का पत्थर साबित होगा।

अनेक उपायों के साथ-साथ वित्त मंत्री जी ने निगम कर को 30 प्रतिषत से अगले चार वर्ष में 25 प्रतिषत करने की घोषणा की है। इस पर विरोधी दलों का तर्क है कि यह बड़े औद्योगिक घरानों को फायदा देने हेतु किया गया है। आलोचना करने वालों ने यह नहीं देखा कि निगम कर पहले 30 प्रतिषत था जिसमें 7 प्रतिषत की विभिन्न प्रकार की छूट थी। अत: वास्तव में 23 प्रतिषत की कर वसूली होती थी जिसे बढ़ाकर 25 प्रतिषत किया गया है एवं सभी कम्पनियों को आयकर में मिलने वाली सभी प्रकार की छूट समाप्त कर दी गई है। इसके विपरीत एक तर्क यह भी है कि आज ग्लोबल औसत निगम कर दर 23.64 प्रतिषत है। यदि यह दर व्यवहारिक व प्रतिस्पर्धी नहीं होगी तो हम विष्व बाजार में टिक नहीं पायेंगे व साथ ही विदेषी निवेषक भी हमसे दूर भागेगें। जिसमें से एक कारण करो का अधिक होना भी होगा। अत: यह उपाय देष में निवेष को आकर्षित करने में कारगर साबित होगा।

इसके साथ ही वित्त मंत्री श्री जेटली ने सम्पदा कर समाप्त कर एक करोड़ से ऊपर आय वालों पर 2 प्रतिषत अतिरिक्त सेस लगाया है। यह उपाय भी अत्यन्त व्यवहारिक है क्योंकि इससे सम्पदा कर की व्यवहारिक पेचीदगियाँ दूर होंगी एवं राजस्व का नुकसान भी नहीं होगा। वैसे भी सम्पदा कर उच्च वर्ग के लोगों के लिए ही बनाया गया था। इससे 9000 करोड़ का राजस्व केन्द्र सरकार को प्राप्त होगा, जबकि सम्पदा पर से मात्र 1008 करोड़ ही आ रहा था।

आम आदमी को प्रत्यक्ष रूप से आयकर में कोई राहत नहीं दी है। लेकिन अप्रत्यक्ष छूट के माध्यम से 4,44,200/-रूपये का लाभ पूर्व के लाभों को जोड़कर उपलब्ध करवाया है। इसमें आम आदमी को पेंषन फण्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉण्ड आदि में निवेष करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इन उपायों से आम आदमी बचत के लिए प्रेरित तो होगा ही साथ ही बचत योजनाओं से आने वाला धन देष के निर्माण व आधारभूत ढ़ांचे को मजबूत करने के लिए बड़ी योजनाओं में लग सकेगा।

बजट में सेवा कर 12.36 प्रतिषत से बढ़ाकर 14 प्रतिषत व स्वच्छता सेस 2 प्रतिषत लगाने की घोषणा की गई है जिसकी आम तौर पर भारी आलोचना हो रही है एवं महँगाई बढऩे की आषंका बार-बार जताई जा रही है जो एक सीमा तक सत्य भी है। लेकिन जी.एस.टी. 2016 से लागू करने पर कर की दर 16 प्रतिषत से कम नहीं होगी। जैसा कि सभी राज्यों से चर्चा का सार आया है अत: अगले वर्ष आने वाले इस एक्ट की तैयारी में इस बढ़ोतरी को देखा जाना चाहिए।

कालेधन पर सरकार सख्त
बजट में सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कालेधन को रोकने हेतु सरकार हर सम्भव कदम उठायेगी एवं आने वाले दिनों में हर सम्भव सख्ती करेगी। वित्त मंत्री श्री जेटली ने विदेषी काले धन पर कहा कि सरकार दूसरे देषों से सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रही है व उच्च स्तरीय जांच भी जारी है। साथ ही भविष्य में कालाधन और नहीं हो, उस हेतु बजट में विदेष में सम्पत्ति रखने व छिपाने पर दस वर्ष की सजा व 300 प्रतिषत जुर्माने की घोषणा की। इसके साथ भविष्य में भले ही करदाता की आय कर योग्य नहीं हो पर विदेषी सम्पत्ति एवं खाते की आयकर विवरणी मेें जानकारी देनी होगी अन्यथा उस पर भी सात वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है। बजट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अघोषित विदेषी आय या सम्पत्ति पाई जाती है तो अधिकतम दर से कर प्रावधान के साथ-साथ किसी तरह की अन्य छूट नहीं दी जावेगी।

उपरोक्त प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के लिए वर्तमान मनी-लॉड्रिंग एक्ट 2002 व थ्म्ड। में भी बदलाव किया जावेगा। इस हेतु संसद के चालू सत्र में ही बिल लाया जायेगा। <b
देष में भी कालाधन कम से कम हो, इस हेतु वित्त मंत्री जी ने अचल सम्पत्ति के लेन-देन पर 20,000/-रूपये से अधिक के लेन-देन नकद नहीं कर सकेंगे, यह घोषणा की है। लेकिन इस प्रावधान से गाँव के किसान व सामान्य व्यक्ति को कई व्यवहारिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा। इसके साथ ही एक लाख से ऊपर के नकद लेन-देन में पैन नम्बर देना आवष्यक होगा। डेबिट क्रेडिट कार्ड के उपयोग पर भी जोर दिया गया है। इन सबसे यह तो स्पष्ट है कि आने वाले समय में सरकार न केवल विदेष में बल्कि देष में भी कालेधन पर सख्त रवैया अख्तयार करेगी।

रक्षा बजट में बढ़ोतरी मैक इन इंडिया साकार करने की तैयारी
वित्त मंत्री ने बजट में रक्षा के लिए पिछले वर्ष की बजाए 11 प्रतिषत बजट अधिक देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि हम देष की रक्षा के साथ किसी से समझौता नहीं करेगें। वित्त मंत्री ने पिछले वर्ष 2,22,370 करोड़ के मुकाबले इस वर्ष 2,46,727 करोड़ का बजट आवंटन किया है। हमारे देष की जल, थल एवं वायु सेना सभी मजबूत हों इस हेतु नौसेना को छ: पनडुब्बी 50,000 करोड़ की लागत से खरीदने की अनुमति पहले ही दे चुके हैं।

देष की आवष्यकता के अनुरूप रक्षा हतु सैन्य सामान हमारे देष में निर्माण हेतु        26  प्रतिषत से बढ़ाकर विदेषी निवेष में 49 प्रतिषत तक की अनुमति दी है। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण बील लाकर जल्द से जल्द देष में सैन्य सामान के कारखाने लगाने की तैयारी की जा रही है। उपरोक्त समस्त तैयारियाँ प्रधानमंत्री जी के “मेक इन इंडिया” के नारे को साकार करने की दिषा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

75;ष पैकेज एवं योजनाऐं
14वे वित्तीय आयोग की सिफारिषों के आधार पर केन्द्रीय करो में राज्य का हिस्सा    42 प्रतिषत कर दिया गया था, इसे बढ़ाकर केन्द्र सरकार ने बजट में 62 प्रतिषत कर यह संकेत दे दिया है कि केन्द्र सरकार राज्यों का हक छीनना नहीं चाहती। इस प्रकार 2014-15 में राज्यों को जहाँ 3.38 लाख

5.24 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है। इस प्रकार इस चालू वर्ष में राज्यों को 1.86 लाख करोड़ अधिक मिलेगें।

केन्द्र सरकार ने बिना भेदभाव के पष्चिम बंगाल एवं बिहार को विषेष आर्थिक पैकेज देने की घोषणा की है जबकि दोनों ही राज्यों में भाजपा विरोधी सरकारे हैं। वित्त मंत्री ने तेलंगाना व आन्ध्र प्रदेष को भी विभाजन के समय किए आर्थिक सहायता की घोषणा को निरन्तर रखनें की भी घोषणा की।

गरीब, महिला, युवा किसान सभी को सौगात
केन्द्रीय बजट में सभी वर्गो का ध्यान रखने का प्रयास किया गया है, चाहे युवाओं के लिए कौषल विकास योजना के लिए 1000 करोड़ का प्रावधान हो अथवा महिला सुरक्षा हेतु निर्भयाकोष में 1000 करोड़ आवंटन किए हों। यह प्रयास किया गया है कि कोई वर्ग छूटे नहीं बेटी बचाओ, अभिमान, स्वच्छ भारत योजना, महिला स्वास्थ्य, सबके लिए आवास मदरसों के लिए 100 करोड़ अनुसूचित जाति के लिए अनेक योजनाऐं, किसान को प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, नाबार्ड के माध्यम से ऋण राष्ट्रीय आजीविका मिषन जैसी अनेक योजनाऐं हर वर्ष की भांति इस वर्ष के बजट में भी की गई है। इसमें किसी तरह की कमी नहीं की गई है।

गरीब के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एक अनूठी योजना है। इसके माध्यम से 12 रू. सालाना प्रीमियम देने पर 2 लाख रूपये के दुर्घटना बीमा की सुविधा मिलेगी एवं जन-धन योजना के सभी 13 करोड़ खाताधारक इसमें षामिल हो जायेगें। एक अन्य योजना के तहत प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना के तहत 18 से 50 वर्ष की आयु के लोग यदि वर्ष में 330/-रू. प्रीमियम देगें तो उन्हें दुर्घटना के साथ-साथ प्राकृतिक मृत्यु पर दो लाख का बीमा मिलेगा। इसके साथ ही अटल पेंषन योजना में पांच वर्ष तक 1000 रूपये प्रति वर्ष जमा कराने पर सरकार भी 1000 रूपये जमा करवायेगी। इस प्रकार पांच वर्ष तक राषि देेने पर 60 वर्ष की आयु के बाद प्रतिमाह 1000 रू. पेंषन निरन्तर मिलेगी। उपरोक्त योजनाऐं आगे जाकर गरीब के लिए वरदान सिद्ध होगी।

गो-पालन, धर्मषाला, हॉस्टल चलाना कठिन बजट भाषण में आयकर की धारा 11 में परिवर्तन कर उपरोक्त गतिविधियाँ चलाने वालों को कठिनाई में डाल दिया है। पहले इसमें आय की सीमा 25.00 लाख थी, अब यह कुल आमदनी का 20 प्रतिषत करने की घोषणा की है। इससे गऊषाला, धर्मषाला, हॉस्टल आदि जो धर्मार्थ गतिविधियाँ है, वह व्यवसाय की श्रेणी में आ जावेगी एवं गाय पालन दूध बेचना व्यवसाय माना जावेगा। अत: इस विषय पर पुन: विचार की आवष्यकता है अन्यथा उपरोक्त गतिविधियाँ सीमित होंगी व वास्तव में कार्य करने वालों को कठिनाई होगी। क्योंकि गौषाला, धर्मषाला में अन्य आय नहीं के

बराबर होती है, वहाँ केवल गाय के दूध से आय एवं उन पर खर्च होता है। यद्यपि 2(15) में योगा को धर्मार्थ गतिविधियों में षामिल करने से सरकार का योगा को बढ़ावा देने की नीति को बल मिलेगा।

राजस्व घाटा नियंत्रण में करने व विकास दर बढ़ाने पर जोर
केन्द्रीय बजट में जहाँ आधारभूत ढ़ांचे को खड़ा करने हेतु सड़क निर्माण व अन्य मदों पर ज्यादा बजट आवंटित किया गया है वहीं विकास दर का 8 से 8.50 प्रतिषत का लक्ष्य हांसिल करने हेतु अनेक उपाय किये गये हैं। राजकोषीय घाटा भी नियंत्रण में रखने पर जोर दिया गया है। राजकोषीय घाटे का 2015-16 के लिए 3.9 प्रतिषत, 2016-17 के लिए 3.50 प्रतिषत एवं 2017-18 के लिए 3 प्रतिषत का लक्ष्य रखा गया है।

श्री अरूण जेटली का बजट लोकप्रियता की आषाओं के विपरीत देष के विकास का मार्ग प्रषस्त करेगा एवं यदि यह रफ्तार कई वर्ष चली तो वह दिन दूर नहीं जब हम हमारे पडौसी चीन का मुकाबला कर सकेंगे एवं भारत एक विकसित देष की श्रेणी में होगा।

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