
मूंगा-मोती बनाने का यह काम वाराणसी में आजादी से पहले का है। पहले यहां सुहाग के नीली, पीली, लाल और हरे रंग की चूडिय़ों के साथ रंगीन नगीने बनते थे। काम का विस्तार हुआ तो यहां कई हस्तनिर्मित नग बनने लगे। इनकी मांग देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी थी। कई देशों में यहां के नगीने जड़े गहने पसंद किए जाते थे। चाइना को आईना दिखाने वाले बनारस के कांच के मोतियों के उद्योग को देश में ही नहीं बल्कि वैश्विक पटल पर कामयाबी मिल रही है। क्लस्टर बनने से लगभग दस हजार लोगों को रोजगार मिले और कांच के मोती के उद्योग में 30 प्रतिशत वृद्धि हो, ऐसी रणनीति बनी है। भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की मांग मे पूर्वांचल के प्रमुख हस्तशिल्प बनारसी कांच की मोतियों की चमक वैश्विक पटल पर चमकती रहे इस दिशा में प्रभावी और परिणाममुखी कदम की आवाश्यकता है। स्वाति नक्षत्र की एक बूंद से सीप कीमती मोती में बदल जाती है, वैसे ही काशी में कांच से बनने वाली मोतियों के लिए स्वाति नक्षत्र की बूंद कब बनेगी उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों में इसका प्रतीक्षा हो रही है।
वाराणसी का नाम सुनते ही लोगों के मन में सबसे पहले यहां की बनारसी साड़ी जेहन में आती है, शायद कम ही लोगों को बनारसी मोतियों के बारे में पता हो जो कमजोर कांच से तो बनती है, लेकिन विदेशों में अपनी चमक से लोगों को चकाचौंध किये है।
बात कांच की मोतियों की की जाये तो बनारस का नाम सबसे पहले आता है क्योंकि बनारस अब सिल्क की साडिय़ों से ही नहीं बल्कि कांच की मोतियों से भी जाना जाता है। बनारस में बनने वाले कांच के हस्तनिर्मित मोतियों का आकर्षण पूरे संसार में अपनी छटा बिखेर रहा है। भारत ही नहीं, दुनिया भर में इसके मुरीद हैं। ग्लास बिड्स का उत्पादन उत्तर प्रदेश में मुख्य्त: बनारस ,फिरोजाबाद और पुर्दिलपुर (हाथरस) में होता हैं और इसका निर्यात अमेरिका, यूरोप, ब्राजील, इटली, फ्रांस, जर्मनी, केन्या, कोलोम्बिया और यू.के. सहित दुनिया के 70 देशों में किया जाता है। वाराणसी के बड़ा लालपुर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय हस्तकला संकुल में इन मोतियों की चमक और निखर रही है। जीआई पंजीकृत इस शिल्प को हस्तकला संकुल में शानदार डिस्प्ले के साथ प्रदर्शित किया गया है। यहां आने वाले खरीदार और शिल्प प्रेमियों को भी इन मोतियों की चमक भा रही है। हस्तनिर्मित कांच की मोतियों के कारोबार से बनारस के 10 हजार परिवार जुड़े हुए हैं। इसमें ग्लास बीड्स को मोती का स्वरूप देकर फैंसी माला के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के आकर्षक सजावटी सामान तैयार किए जाते हैं। बनारस में ग्लास बीड्स बनाने का काम परंपरागत ढंग से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इस व्यवसाय से बड़ी संख्या में महिलाएं भी जुड़ी हैं।
हैंडमेड ग्लास बीड्स का बनारस सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र बन चुका है। शीशे से मोती बनाने का काम लगभग 200 वर्ष पुराना है। इसमें सजावटी सामान, ब्रेसलेट, हार, पर्दों और दीवारों में लगाने वाले बीड्स आदि बनाए जाते हैं। चाइना और अमेरिका के बीच बढ़ती दूरियों में बनारस के प्रख्यात कांच की मोतियों से पूरी दुनिया प्रकाशित होती जा रही है। चाइना के उत्पादों पर आयात शुल्क में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दिए जाने से अमेरिकी देशों में जहां चीनी उत्पाद महंगे हो गए तो वही भारतीय उत्पाद चीनी उत्पादों की अपेक्षा सस्ते हो चले। जिससे भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की मांग बढ़ गई, जिसमे पूर्वांचल के प्रमुख हस्तशिल्प बनारसी कांच की मोतियों की चमक वैश्विक पटल पर चमकने लगी है।
योगी सरकार ने अपनी कूटनीतिक संजीवनी से कांच के मोतियों के उद्योग को बढाकर ग्लास बीड्स पर हो रहे चाइना के कब्जे को रोक दिया है। काशी के कांच के मोती अपनी चमक बरकरार रखे हुए हैं। सरकार को इस उद्योग के उत्थान के लिए कई योजनाओं को मूर्त रूप देकर औद्योगिक विकास को गति देने की योजना पर काम करना होगा। वाराणसी के प्रमुख लघु उद्योग कांच की मोतियों का उत्पादन में वृद्धि हो और इस क्षेत्र में कारीगरों की संख्या बढे इसके लिए कौशल विकास कार्यक्रम के तहत बनारसी मोती क्लस्टर योजना को तेजी से मूर्त रूप दिया जाना जरूरी है। बनारसी मोतियों की चमक को वैश्विक बाजार में और बढ़ाने की योजना के तहत कांच की मोतियों के आभूषण को परंपरागत डिजाइनों के अत्याधुनिक रंग रूप देने के लिए कई अत्याधुनिक मशीनों को क्लस्टर में लाने की तैयारी की गयी है। वाराणसी के उद्योग विकास विभाग के संयुक्त आयुक्त ने बताया कि रोहनिया क्षेत्र के एक गांव को इस कार्य के लिए चुना गया है जहां क्लस्टर योजना के लिए शेड तैयार कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि उद्योग के समूहबद्ध योजना के तहत वैश्विक बाजार में मांग के अनुरूप उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। ग्लास बिड्स के युवा निर्यातक सिद्धार्थ गुप्ता ने कहा कि हम लोग इस बार निर्यात लगभग तीस प्रतिशत बढ़ाएंगे, जिससे कम्पनी को ही नहीं बल्कि उससे जुड़े सभी लोगों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रुप से रोजगार के अवसरों का लाभ मिलेगा। साथ ही अशोक कुमार ने कहा कि सरकार के सहयोग से यहां पर मोतियों के उत्पाद को बढ़ाने के लिए क्लस्टर स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है। जिससे वाराणसी एवं आस-पास के जिलों में मोतियों के उत्पादक कारीगरों, शिल्पकारों की इकाईयों में कार्यरत लोगों को पारंपरिक कार्यशैली में प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार का अवसर मिलेगा। व्यवसाय से जुड़े उद्यमी बताते हैं कि योगी सरकार के आने से इस पूरे प्रदेश में उद्योग की गतिविधियों में बहुत तेजी आयी है। इसके बनने से काफी निवेश आएगा, क्लस्टर बनने से करीब हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा, एक्सपोर्ट बढ़ेगा, कच्चा माल मिलेगा, ट्रेडिंग मिलेगी। विश्वस्तरीय गुणवत्ता और डिजाइन के लिए यहां की कांच की मोतियों की दुनिया में अपनी अलग पहचान है। वाराणसी के बीड्स उद्योग से जुड़े उद्यमी बताते हैं कि मोतियों के लिए तैयार की जा रही डिजाइन के ऑनलाइन होते ही चीन उसे कॉपी कर ले रहा है। वहां की कंपनियां उसे अपने अधिकृत उत्पाद के तौर पर विश्व बाजार में पेश कर रही हैं। इस कारोबार के लिए औद्योगिक गैस की आपूर्ति, डिजिटल प्लेटफॉर्म, आधुनिक तकनीक के साथ मशीनों की उपलब्धता जरूरी है। बनारस में पहले पुरदिलनगर से माल जाता था, लेकिन वहां अब आधुनिक मशीनें लग गई हैं, जिससे वहां का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है।
सुरेंद्र अग्निहोत्री