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ममता बनर्जी के एक और करीबी पर छापेमारी, गौ-तस्करी का है शक

ममता बनर्जी के एक और करीबी पर छापेमारी, गौ-तस्करी का है शक

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चल रही सारी गड़बड़ियों पर केन्द्रीय एजेन्सियां एक साथ कार्रवाई करने में जुट गई हैं। पहले शिक्षक भर्ती घाटोला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने कार्रवाई की है। जिसके बाद गौ-तस्करी के शक में सीबीआई की छापेमारी हुई है।

ममता के करीबी अनुब्रत मंडल पर शिकंजा

तृणमूल कांग्रेस के नेता और बीरभूम टीएमसी के अध्यक्ष अनुव्रत मंडल के करीबी लोग सीबीआई के निशाने पर हैं। उनके खिलाफ 3 अगस्त को सुबह सुबह सीबीआई का ऑपरेशन शुरु हुआ। बुधवार को सुबह ही सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की संयुक्त टीम बीरभूम पहुंची। वहां पहुंचने के बाद केन्द्रीय एजेन्सियों ने अपनी टीम को छह हिस्सों में बांट दिया और छापेमारी शुरु कर दी।

एक टीम नानूर के बसापारा के सतरा गांव में जिला परिषद के कार्य निदेशक और तृणमूल नेता करीम खान के घर पर छापेमारी करने पहुंची। दूसरी टीम ने नानूर में ही करीम के करीबी जियारुल हक उर्फ ​​मुक्तर के अतखुला घर पर तलाशी अभियान चलाया। इसके अलावा पाइकपारा में सुभाष पल्ली, सरखा पल्ली और पत्थर व्यापारी तुलु मंडल के ठिकानों पर केन्द्रीय टीम ने छापेमारी की। यह सभी लोग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी अनुब्रत मंडल के करीबी हैं और इनपर गो तस्करी का रैकेट चलाने का शक है।

गो तस्करी के मामले में कार्रवाई

इसके पहले जून 2022 में अनुब्रत मंडल के निजी अंगरक्षक सहगल हुसैन को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास भारी मात्रा में पैसा मिला, जिसके बारे में हुसैन कोई भी वाजिब जवाब नहीं दे पाया। केन्द्रीय एजेन्सियों ने हुसैन के मुर्शिदाबाद और बीरभूम के घरों पर छापेमारी की थी। इन छापों के दौरान सहगल की करोड़ो रुपए की चल अचल संपत्ति के बारे में पता चला है।

सहगल हुसैन तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बीरभूम के अध्यक्ष अनुब्रत मंडल का बेहद करीबी है। इस मामले में पूछताछ के लिए सीबीआई ने अनुब्रत मंडल को भी दो बार तलब किया था।

केन्द्रीय सुरक्षा बल के जवानों के साथ छापेमारी

बंगाल के बीरभूम में छापेमारी के दौरान सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने केन्द्रीय सुरक्षा बलों की सहायता ली। उनके साथ सीआरपीएफ जैसे केन्द्रीय सुरक्षा बलों के कई जवान मौजूद थे। पश्चिम बंगाल का यह इलाका बेहद खतरनाक माना जाता है। इस इलाके से गाय, भैंस जैसे जानवरों की तस्करी करके उन्हें बांग्लादेश की सीमा में पहुंचाया जाता है। जहां से इन पशुओं को काटकर इनका मांस अरब देशों को बेच दिया जाता है। इस धंधे में एक बड़ा रैकेट शामिल है। पशुओं की तस्करी का यह धंधा अरबों-खरबों का माना जाता है। जिसमें की लोग मालामाल हो चुके हैं।

इस इलाके के पशु तस्कर बेहद खतरनाक माने जाते हैं। यही वजह है कि इस इलाके में रेड डालने के लिए जांच अधिकारियों को अतिरिक्त सुरक्षा के लिए केन्द्रीय सुरक्षा बलों का कवर हासिल करना पड़ा।

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