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हिमाचल प्रदेश को केन्द्र सरकार से मिला 336 करोड़

हिमाचल प्रदेश को केन्द्र सरकार से मिला 336 करोड़

शिमला: केन्द्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को जल जीवन मिशन के तहत 336.23 करोड़ की राशि जारी की है। प्रदेश के जलशक्ति मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने यह जानकारी प्रदान की है।

केन्द्र से मिल रहा पूरा सहयोग

हिमाचल प्रदेश के जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि जल जीवन मिशन में सराहनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार से पूर्ण वित्तीय सहयोग प्राप्त हो रहा है। इस वर्ष केंद्र सरकार ने हिमाचल को 1344.94 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया है। इस धनराशि की पहली किश्त के रूप में प्रदेश को 336.23 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस धनराशि को मिलाकर अभी तक जल जीवन मिशन को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कुल 3409.66 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं।

हिमाचल को प्रोत्साहन

महेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि जल जीवन मिशन में हिमाचल प्रदेश के उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों के दौरान 1028.43 करोड़ की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का आभार व्यक्त करते हुए महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत हिमाचल जैसे छोटे पर्वतीय प्रदेश को सदैव ही सहयोग प्रदान किया है। जल शक्ति मंत्री ने कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन के लिए मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर का भी आभार व्यक्त किया।

हर घर नल से जल

जल जीवन मिशन की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए महेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि हिमाचल के चार जिलों के 25 खंडों की 2518 पंचायतों के 15,277 गांवों के सभी परिवारों के घरों में नल लगाए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अभी तक 16,33,785 (94.57 प्रतिशत) घरों को कार्यशील नल प्रदान किए जा चुके हैं। प्रदेश सरकार ने दिसंबर 2022 तक शेष कार्य को पूर्ण करने का संकल्प लिया है और इसे तेजी से पूरा किया जा रहा है। जल शक्ति मंत्री ने बताया कि प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत न केवल नल लगाए जा रहे हैं, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में स्थायी स्रोतों से बड़ी-बड़ी योजनाएं भी तैयार की जा रही हैं तथा पुरानी योजनाओं का जीर्णाेद्धार किया जा रहा है।

पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का संकल्प

महेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य में 63 प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। जिनमें 55 प्रयोगशालाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से मान्यता मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि जल गुणवत्ता में पारदर्शिता लाने के लिए प्रदेश की सभी प्रयोगशालाओं को आम जनमानस के लिए खोल दिया गया है, जिनमें न्यूनतम दरों पर जल नमूनों का परीक्षण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी गांवों को फील्ड टैस्ट किट वितरित की गई हैं और इस किट के माध्यम से हर गांव की पांच महिलाओं को पेयजल जांच का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अभी तक 50,989 महिलाओं को यह प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

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