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जारी है सिसौदिया का ड्रामा

जारी है सिसौदिया का ड्रामा

नई दिल्ली: मनीष सिसौदिया खुद पर लगे आबकारी घोटाले पर से ध्यान हटाने के लिए जबरदस्त ड्रामेबाजी पर उतर आए हैं। मनीष ने अब कहा है कि भाजपा ने तरफ से उनको ऑफर आया है कि वह आम आदमी पार्टी को तोड़ दें। उसके पहले शनिवार को मनीष सिसौदिया ने अगले दो दिनों में अपनी गिरफ्तारी की अफवाह फैलाकर सहानुभूति जुटाने की कोशिश की थी।

अपने दाग छिपाने के लिए दूसरों पर आरोप

अपनी गिरफ्तारी को सामने देखकर दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया घड़ी घड़ी नया ड्रामा कर रहे हैं। उन्होंने इस बार ट्विटर को हथियार बनाया है।
सिसोदिया ने ट्वीट करके आरोप लगाया कि ‘मेरे पास भाजपा का संदेश आया है- “आप” तोड़कर भाजपा में आ जाओ, सारे CBI ED के केस बंद करवा देंगे। मेरा भाजपा को जवाब- मैं महाराणा प्रताप का वंशज हूँ, राजपूत हूँ। सर कटा लूँगा लेकिन भ्रष्टाचारियो-षड्यंत्रकारियोंके सामने झुकूँगा नहीं। मेरे ख़िलाफ़ सारे केस झूठे हैं। जो करना है कर लो’

सिसौदिया को सता रहा है गिरफ्तारी का डर

मनीष सिसौदिया ने इसके पहले शनिवार यानी 20 अगस्त को भविष्यवाणी की थी कि अगले दो दिनों में उनकी गिरफ्तारी हो जाएगी। हालांकि अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। दिल्ली में शराब घोटाले मामले में सीबीआई ने दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत 14 लोगों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया है। सर्कुलर में उन लोगों के नाम हैं, जिनके खिलाफ सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है। इसके बाद मनीष सिसौदिया समेत यह सभी लोग देश नहीं छोड़ पाएंगे।

सहानुभूति बटोरने की कोशिश में सिसौदिया

मनीष सिसौदिया जानते हैं कि उनकी गिरफ्तारी होनी तय है। क्योंकि दिल्ली की नई आबकारी नीति में घोटाला किया गया था। जिस दौरान यह विभाग उनके हाथ में था।
लेकिन गिरफ्तारी से पहले मनीष सिसौदिया पूरा ड्रामा तैयार करके खुद को शहीद साबित करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

मनीष सिसौदिया बार बार शिक्षा मंत्री के तौर पर किए गए अपने कामों का हवाला दे रहे हैं। लेकिन शिक्षा विभाग और आबकारी विभाग दो अलग मामले हैं। मनीष उन दोनों को एक साथ जोड़ रहे हैं। जबकि उनपर आबकारी विभाग का काम संभालने के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं ना कि शिक्षा मंत्री के तौर पर।

मनीष सिसौदिया ने कहा है कि दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति बिल्कुल सही थी। लेकिन वह ये नहीं बता रहे हैं कि अगर वह अपनी सरकार की नीति को सही मानते हैं, तो उनकी ही सरकार ने नई आबकारी नीति को वापस क्यों लिया।

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