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राहुल गांधी ने कांग्रेस को बर्बाद किया- आजाद

राहुल गांधी ने कांग्रेस को बर्बाद किया- आजाद

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने आज कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया। लेकिन जाते जाते उन्होंने वो बात कह दी, जिसे कहने से हर कांग्रेसी डरता था।

राहुल गांधी पर आजाद का निशाना

गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी के बेटे और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को संबोधित करते हुए अपने विदाई पत्र में लिखा है कि ‘दुर्भाग्य से राजनीति में राहुल गांधी की एंट्री और खासतौर पर जब आपने जनवरी 2013 में उन्हें उपाध्यक्ष बनाया, तब राहुल ने पार्टी में चली आ रही सलाह के मैकेनिज्म को तबाह कर दिया। सभी वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को साइड लाइन कर दिया गया और गैरअनुभवी चापलूसों का नया ग्रुप बन गया, जो पार्टी चलाने लगा।’

राहुल की बचकानी हरकतों से कांग्रेस हुई बर्बाद

गुलाम नबी आजाद ने साल 2014 में कांग्रेस पार्टी की हार के बारे में लिखा है कि ‘कांग्रेस की बर्बादी का सबसे ज्वलंत उदाहरण वह है, जब राहुल गांधी ने सरकार के अध्यादेश को पूरे मीडिया के सामने टुकड़े-टुकड़े कर डाला। कांग्रेस कोर ग्रुप ने ही यह अध्यादेश तैयार किया था। कैबिनेट और राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दी थी। इस बचकाना हरकत ने भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के औचित्य को खत्म कर दिया। किसी भी चीज से ज्यादा यह इकलौती हरकत 2014 में यूपीए सरकार की हार की बड़ी वजह थी।’

राहुल के चापलूस कांग्रेस पर हावी

गुलाम नबी आजाद के मुताबिक कांग्रेस पार्टी में चापलूसी की परंपरा को राहुल गांधी बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने लिखा कि ‘अभी भी बुरी बात यह है कि यूपीए सरकार की अखंडता को तबाह करने वाला रिमोट कंट्रोल सिस्टम अब कांग्रेस पर लागू हो रहा है। आप बस नाम के लिए इस पद पर बैठी हैं। सभी जरूरी फैसले राहुल गांधी ले रहे हैं, उससे भी बदतर यह है कि उनके सुरक्षाकर्मी और पीए ये फैसले ले रहे हैं।’

कांग्रेस के गिरते ग्राफ के लिए गांधी परिवार जिम्मेदार

गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस पार्टी की हार के कारणों का खुलासा करते हुए सोनिया गांधी को लिखा है कि ‘2014 में आपकी और उसके बाद राहुल गांधी की लीडरशिप में कांग्रेस शर्मनाक तरीके से 2 लोकसभा चुनाव हारी। 2014 से 2022 के बीच हुए 49 विधानसभा चुनावों में से हम 39 चुनाव हार गए। पार्टी ने केवल 4 राज्यों के चुनाव जीते और 6 मौकों पर उसे गठबंधन में शामिल होना पड़ा। अभी कांग्रेस केवल 2 राज्यों में शासन कर रही है और 2 राज्यों में गठबंधन में उसकी भागीदारी मामूली है। हार के बाद राहुल गांधी ने झुंझलाहट ने अध्यक्ष पद छोड़ दिया, उससे पहले उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी में हर सीनियर नेता का अपमान किया, जिसने पार्टी के लिए अपनी जिंदगी दी, तब आप अंतरिम अध्यक्ष बनीं। पिछले 3 साल से आप यह जिम्मेदारी संभाल रही हैं।’

कांग्रेस के अंत की शुरुआत

गुलाम नबी आजाद का कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देना कांग्रेस के अंत की शुरुआत है। इसके पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी जैसे कई दिग्गज नेता कांग्रेस आलाकमान से विरोध जता चुके हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे जमीनी नेता कांग्रेस छोड़ चुके हैं। सचिन पायलट जैसे नेता बागी तेवर अपनाए हुए हैं।

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर हो चुकी है। पंजाब उसके हाथ से निकल चुका है। बिहार में उसे राजद की दया पर निर्भर रहना है। राष्ट्रीय स्तर पर कोई पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार नहीं है। मजबूरी में सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर बनी हुई हैं। लेकिन उनपर भी बेटे बेटियों समेत नेशनल हेराल्ड मनी लांड्रिंग का मामला चल रहा है। ऐसे में कांग्रेस का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय दिखाई दे रहा है।

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