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सिकुड़कर नष्ट होती कांग्रेस

सिकुड़कर नष्ट होती कांग्रेस

 

 

 

 

दीपक कुमार रथ
(editor@udayindia.in)

जब एक के बाद एक बड़े नेता कांग्रेस पार्टी छोड़कर जा रहे हैं और पार्टी टूट रही है, ऐसी हालत में राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पर निकले हैं। वास्तव में कांग्रेस का प्रथम परिवार, पार्टी के नाश का कारण बन गया है। कांग्रेस ना केवल अपने कार्यकर्ताओं से दूर जा रही है, बल्कि आम लोग भी इसे नकार रहे हैं। गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल जैसे वरिष्ठ नेता चीख-चीख कर दुहाई देते रहे कि कांग्रेस का सांगठनिक ढांचा खत्म हो चुका है। लेकिन बहरों के शहर में उनका शोर सुने भी तो कौन? दरअसल पांच सितारा संस्कृति ने कांग्रेस पार्टी को इतनी बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है कि वह आम जनता से दूर हो चुकी है।

पार्टी में असंतुष्ट नेताओं के बयानों को कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के खिलाफ बगावत मानी गयी। हालांकि राहुल गांधी ने साल 2019 के आम चुनाव में करारी हार के बाद दोबारा कभी कांग्रेस अध्यक्ष का पद नहीं संभालने की कसम खाई थी। तब से अब तक उनकी माता सोनिया गांधी कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष बनी हुई हैं। सचाई ये है कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी इतिहास में अपने अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। वह पार्टी, जो दावा करती है कि उसने देश को विदेशी गुलामी से आजाद कराने में सबसे अहम भूमिका निभाई है, वह खुद को एक परिवार की गुलामी से मुक्त नहीं कर पा रही है। यही वजह है कि कांग्रेस ना तो देश को आगे बढ़ाने की किसी योजना में खुद को शरीक करती है, और ना ही कोई तर्कपूर्ण सलाह प्रस्तुत करती है। लेकिन सड़कों और गलियों में हल्ला-गुल्ला मचाने में पीछे नहीं रहती, जैसा कि भारत जोड़ो यात्रा में देखा जा रहा है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस की वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष को भारत और भारतीयों की समस्याओं से कोई लेना देना ही नहीं है। वह महाभारत के धृतराषट्र की तरह अपने अयोग्य पुत्र को गद्दी पर बिठाने के लिए तरह-तरह के जोड़-तोड़ कर रही हैं। असलियत यह है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आज की तारीख में मां-बेटा कांग्रेस में बदल गई है, जो कि भारत के लिए अप्रासंगिक हो चुकी है।

पार्टी में हाईकमान की संस्कृति छाई हुई है, जो कि लोकतंत्र के पूरी तरह विपरीत है। कांग्रेस पार्टी आंतरिक लोकतंत्र में कतई भरोसा नहीं करती है। आजादी से पहले भी गांधी, नेहरु जैसे नेता अपने फैसले मानने के लिए दूसरों को मजबूर करते थे। जिसका नतीजा रहा है सुभाष चंद्र बोस जैसे कद्दावर नेता कांग्रेस छोडऩे के लिए मजबूर हो गए। भारत की जनता को राजा-महाराजाओं के शासन की आदत थी। यही वजह है कि उसने कांग्रेस को इतने दिनों तक सिर पर बिठाए रखा। लेकिन साल 2014 में देश की जनता कांग्रेस को सत्ता से बाहर करके भाजपा को शासन करने का मौका दिया। जिसके बाद पूरे देश का माहौल ही बदल गया। लेकिन कांग्रेस आज भी अपने पुराने ढर्रे पर चल रही है। कांग्रेस पार्टी में सभी अहम फैसले आज भी गांधी परिवार और उसके चाटुकारों के द्वारा लिए जाते हैं। जो कि कांग्रेस के अंदर एक दमनकारी माहौल बना देता है। कांग्रेस पार्टी में चल रहा भाई-भतीजावाद उसे एक निश्चित अंत की तरफ तेजी से धकेल रहा है।

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