ब्रेकिंग न्यूज़ 

कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का अंतर्विरोध

कांग्रेस की  भारत जोड़ो यात्रा का अंतर्विरोध

वर्तमानके मूल्यांकन की शुरुआत दर असल इतिहास के पन्ने पलटने से होती है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस आज भारत जोड़ो यात्रा निकाल रही है। भारत को जोडऩे का प्रत्येक प्रयास बेशक सराहनीय और समर्थन योग्य है; परंतु इतिहास का सत्य यही है कि भारत तोडऩे की सर्वाधिक जिम्मेदारी अगर किसी एक राजनीतिक पार्टी पर बनती है तो यह पार्टी कांग्रेस है। कांग्रेस चूंकि खुद अपनी यात्रा को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जोड़ रही है तो हमारे लिए भी यह जरूरी है कि हम इतिहास के उन प्रकरणों को याद करें जब हम यह देश स्वयं से टूटने का साक्षीबना और हमारा राजनीतिक नेतृत्व हमलावरों के आगे घुटने टेके हुए नजर आया।

इस देश के इतिहास में भारत के हिस्सों को भारत से अलग करने के मुख्यत: तीन प्रकरण हैं। पहला प्रकरण 1947 में आजादी के समय भारत-विभाजन, दूसरा आजादी के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान प्रायोजित कबायली हमला और तीसरा1962 में भारत पर चीन का हमला। इन तीनों प्रकरणों में भारत ने अपनी जमीन गंवाई, देश विखंडित हुआ और इन तीनों प्रकरणों में भारत के टूटने का दोष कांग्रेस पर है। 1947 में कांग्रेस ने मुस्लिम लीग द्वारा पोषित मुस्लिम कट्टरपन के आगे आत्मसमर्पण कर दिया। इस विभाजन के बाद हमने देश का एक-तिहाई हिस्सा गंवाने के साथ 10 लाख जिंदगियां भी गंवाईं। जम्मू-कश्मीर पर कबायली हमला होने पर निर्णायक लड़ाई लडऩे की जगह कांग्रेस मामले को संयुक्त राष्ट्र ले गई और तथाकथित संघर्ष विराम के चलते हमने इस राज्य का भी एक-तिहाई हिस्सा गंवा दिया। 1962 में चीन आक्रमण के बाद हमने इस राज्य का करीब 15 प्रतिशत अन्य हिस्सा चीन के हाथों गंवा दिया। इन सब के बाद देश जब सरकार से यह आश्वासन और भरोसा चाहता था कि अपनी गंवाईं जमीन और गरिमा हम कब वापस हासिल करेंगे तब संसद में हमें हंसी-ठिठोली मिली कि वहां घास का तिनका तक नहीं उगता। आज जब नेहरू की राजनीतिक विरासत संभालने वाले राहुल भारत जोडऩे की यात्रा पर निकले हैं तो देश को उनसे उम्मीद है कि वह बताएंगे कि उनके परिवार की लापरवाही और अदूरदर्शिता के चलते हमने जो जमीन गंवाई हैं, उसे वापस लाने के लिए कांग्रेस की क्या योजना है।

आइए अब वर्तमान में आएं। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों के साथ-साथ कांग्रेस कुछ अपवादों को छोड़कर राज्यों में भी करारी हार का सामना किया। आज पूरे भारत में कांग्रेस के मात्र तीन मुख्यमंत्री बचे हैं। कांग्रेस की स्थिति यह है कि अन्य विपक्षी पार्टियां कांग्रेस को विपक्ष के नेतृत्व के लायक भी नहीं मानती हैं। लालू की पार्टी के अलावा करीब-करीब सभी पार्टियां यह साफ कर चुकी हैं कि विपक्षी एकता के लिए कांग्रेस नेतृत्व जरूरी नहीं हैं। कांग्रेस के भीतर भी स्थिति बेहद असंतोष पूर्ण है। गुलाम नबी आजाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस छोडऩे वाले अलग-अलग नेताओं ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी की कड़ी आलोचना की है। इन नेताओं की आलोचना टाली जा सकती है कि कुर्सी या राज्यसभा सीट नहीं मिलने के कारण यह लोग खुन्नस निकाल रहे हैं; लेकिन कांग्रेस पार्टी की तरफ से वर्तमान में हिमाचल प्रदेश से लोकसभा सांसद प्रतिभा सिंह ने भी राहुल गांधीके बारे में यही बात कही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पार्टी को पर्याप्त समय नहीं देते हैं। साफ है कि पार्टी के साथ-साथ इसके शीर्ष नेताओं का ग्राफ भी लगातार नीचे जा रहा है। साठ और सत्तर के दशक में राजनीतिक विश्लेषक रजनी कोठारी भारतीय राजनीतिक तंत्र को कांग्रेस तंत्र कहती थीं। उस केंद्रीय स्थान से आज कांग्रेस लगातार हाशिए की तरफ और धीरे-धीरे अप्रासंगिक होने की तरफ बढ़ रही है।

इन हालातों में कांग्रेस की स्थिति यह है कि इसे भविष्य की राह ही समझ नहीं आ रही है। आर्थिक नीति, अर्थव्यवस्था, प्रशासन में सुधारों और वैकल्पिक व्यवस्था के मसलों पर अस्पष्टता की स्थिति में होने के साथ-साथ कांग्रेस की देश की एकता और अखंडता के बारे में भी दृष्टि साफ नहीं है। कभी किसी विशेष वोट बैंक को खुश करने की कोशिश में कांग्रेस टुकड़े-टुकड़े गैंग के साथ खड़ी नजर आती है तो वहीं अब आम जनमानस की भावनाओं का दोहन करने के लिए भारत जोड़ो यात्रा निकाली जा रही है। कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का इससे बड़ा अंतर्विरोध क्या होगा कि भारत तोडऩे के नारे लगाने का आरोपी कन्हैया कुमार इस यात्रा में शामिल है। कांग्रेस पार्टी भी इस बारे में असमंजस में है कि पार्टी भारत तोडऩे वालों के साथ है या भारत जोडऩे वालों के साथ। जेएनयू प्रकरण में कांग्रेस टुकड़े-टुकड़े गैंग की पक्ष में ही खड़ी नजर आई। इतना ही नहीं, धारा 370 हटाने के दौरान संसद में चर्चा के समय सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कश्मीर में संयुक्त राष्ट्र की निगरानी की बात कही। उम्मीद है कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कांग्रेस और राहुल गांधी में यह समझ आ गई होगी कि कश्मीर भारत का अंदरूनी मामला है और यहां कोई भी नियम-कानून बदलने के लिए हमें किसी से स्वीकृति की जरूरत नहीं है।

 

प्रेरणा कुमारी

Leave a Reply

Your email address will not be published.