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सीबीआई, ईडी विवाद पर नरेन्द्र मोदी को ममता की क्लीन चिट

सीबीआई, ईडी विवाद पर नरेन्द्र मोदी को ममता की क्लीन चिट

पश्चिम बंगाल की मुख्य मंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यदक्ष ममता बनर्जी प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी के खिलाफ अपने आक्रामक तेवर के लिये जानी जाती हैं। पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान दोनो के बीच रिश्तेम बहुत ही तल्ख  हो गये थे और जिस तरह तृणमूल के अनेक सांसदों और विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया और फिर उसके टिकट पर चुनाव लडा उससे यही लगने लगा था कि ये दूरियां शायद ही मिटें। ममता को मोदी को राजनीतिक चुनौती देने के लिये एक सक्षम विपक्षी नेता माना जाता है और अनेक मौकों पर उनका नाम प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार के रूप में चर्चा का केंद्र बनता

रहा है।

पश्चिम बंगाल के लाल गढ को ध्व्स्तर करके ममता ने सबको पहली बार न केवल चौंकाया बल्कि राष्ट्रीतय राजनीति में विपक्ष को एकजुट करने में उनके प्रयासों को खासी तवज्जो मिलती रही है लेकिन पिछले दो महीनों में उनके रूख में बदलाव के जो संकेत मिले वे राजनीतिक पर्यवेक्षकों को भी चौंकाने लगे हैं। इसकी शुरूआत 13 जुलाई 2022 से हुई जब राष्ट्रजपति और उपराष्ट्रचपति के चुनाव से ऐन पहले ममता की मुलाकात दार्जिलिंग के राजभवन में राज्य2पाल जगदीप धनखड और असम के मुख्यपमंत्री हेमंत बिस्वो सरमा से हुई। लगभग तीन घंटे चली इस लंबी बैठक के तुरंत बाद किसी ने भी कुछ साफ कहने से इंकार कर दिया। जगदीप धनखड का एक ट्वीट आया ‘Óपश्चिम बंगाल के राज्यसपाल जगदीप धनखड मुख्यरमंत्री ममता बनर्जी और असम के मुख्यनमंत्री हेमंत बिस्वाब सरमा के साथ राजभवन,दार्जिलिंग में

ममता ने इस मुलाकात के बाद कहा कि राज्यभपाल ने चाय पर आमंत्रित किया था इसलिये यहां आई थी। यह पूछे जाने पर कि क्यो राष्ट्रभपति चुनाव के बारे में बात हुई तो उन्होंंने कहा कि इस बारे में कोई चर्चा नही हुई, कोई राजनीतिक बात नही हुई। असम के मुख्यभमंत्री की उपस्थिति पर उन्होंहने कहा कि दो अलग अलग राज्या हैं, इनके बीच संबंध होने चाहिये। उनकी अलग पार्टी है और हमारी अलग पार्टी है। संसद भवन की नई इमारत की चोटी पर लगाये गये अशोक स्तं भ विवाद के बारे पूछे जाने पर ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंाने इस बारे में स्टीडी (अध्ययन) नही किया है, जब वह स्टउडी कर लेंगी तो ही इस मामले पर कुछ बोल पायेंगी।

जगदीप धनखड दार्जिलिंग से ही सीधे दिल्लीे कूच कर गये और अगले दिन भारतीय जनता पार्टी ने उपराष्ट्रतपति चुनाव के लिये उनकी उम्मीगदवारी की घोषणा कर दी। राष्ट्ररपति पद की उम्मीपदवार द्रौपदी मुर्मु उन दिनों पश्चिम बंगाल के दौरे पर थीं लेकिन ममता बनर्जी उनसे नही मिलीं और उसकी वजह गिनाई गई कि तृणमूल नेता ने यशवंत सिन्हो का नाम राष्ट्रीपति चुनाव के लिये घोषित किया है जो विपक्ष के उम्मीेदवार हैं। राष्ट्रपपति पद के चुनाव के लिये मतदान हुआ और तृणमूल कांग्रेस के दो सांसद और एक विधायक ने क्रास वोटिंग की तथा दो सांसद एवं चार विधायकों के मतपत्र अयोग्य  पाये गये। द्रौपदी मुर्मु चुनाव जीत गईं। ममता नेचुनाव से पहले ही दलील दे दी कि अगर सत्ताररूढ राष्ट्री य जनतांत्रिक गंठबंधन (एनडीए) ने विपक्ष को पहले विश्वादस में लिया होता तो द्रौपदी मुर्मु सर्वसम्मोति से राष्ट्ररपति चुन ली गई होतीं। उपराष्ट्रंपति के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष की उम्मीददवार के नाम की घोषणा से पहले उसे विश्वािस में नही लेने का आरोप लगाया और मतदान में हिस्सां ही नही लिया। तृणमूल के इस रूख ने सबको हैरान किया कि ममता बनर्जी  जगदीप धनखड को राज्यआपाल बनाये जाने का घोर विरोध करती रहीं और उनपर आरोप लगाया था कि उन्हों ने राजभवन को भाजपा का कार्यालय बना दिया है। जगदीप धनखड को तृणमूल कांग्रेस के मतदान में हिस्साध नही लेने बडा फायदा हुआ और वह बडी आसानी से चुनाव जीत गये।

इस राजनीतिक गहमा गहमी के बीच लंबे अर्से से केंद्र की नरेन्द्रस मोदी सरकार केंद्रीय जांच ब्यूवरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कथित दुरूपयोग को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। चारा घोटाले में जेल की सजा काट कर आये लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीतय जनता दल के नेता और बिहार के उपमुख्य मंत्री तेजस्वीम यादव ने कहा है कि सीबीआई और ईडी चाहे तो उनके घर में अपना कार्यालय खोल सकती हैं। उन्हों ने कटाक्ष कि किया है कि भाजपा के तीन जमाई है , सीबीआई, ईडी और इनकम टैक्सन विभाग। दरअसल वह भी रेलवे होटलों की बिक्री में धनशोधन के कथित मामले में ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी (आप) ने कहा कि वह सीबीआई और ईडी से डरती नही है और वह उसका स्वाागत करेगी। दिल्ली  के उपमुख्यरमंत्री मनीष सिसोदिया और उनके अधिकारी नई शराब नीति में कथित घोटाले को लेकर अभियुक्तग बनाये गये हैं। दिल्लीम परिवहन निगम (डीटीसी) की नई बस खरीद में घोटाले की जांच चल रही है। घनशोधन के मामले में केजरीवाल सरकार के स्वानस्य्ई   मंत्री सत्येंदद्र जैन पहले से ही जेल में हैं। अब उसके विधायक भी ईडी की जद में आने लगे हैं। शिव सेना सांसद एवं पार्टी के मुखर प्रवक्तां संजय राउत धन शोधन के कथित मामले में जेल में बंद हैं। इसी तरह पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी धनशोधन के मामले में जेल में है और खुद ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनके रिश्तेरदार कोयला खदान घोटाले में ईडी के दफ्तर के चक्कमर काट रहे हैं। कांग्रेस अध्यबक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्याक्ष राहुल गांधी कथित नेशनल हेराल्डर घोटाले को लेकर ईडी के निशाने पर हैं और दोनो जमानत पर हैं।

सीबीआई और ईडी के कथित दुरूपयोग को लेकर मोदी सरकार पर विपक्ष लगातार हमलावर हो रहा है लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र   मोदी इससे विचलित हुये बगैर भ्रष्टाहचार के खिलाफ लडाई लडने का मंतव्यक बार बार जाहिर कर रहे हैं। मोदी ने स्वुतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले के प्राचीर से इस बार भ्रष्टालचार को जड से उखाड फेंकने  के लिये देशवासियों से अपील की और कहा ‘Ó भारत जैसे लोकतंत्र में जहां लोग गरीबी से जूझ रहे हैं, जब ये देखते हैं, एक तरफ वो लोग हैं जिनके पास रहने के लिए जगह नहीं है। दूसरी ओर वो लोग हैं जिनको अपना चोरी किया हुआ माल रखने के लिए जगह नहीं है। यह स्थिति अच्छी  नहीं है  अब भ्रष्टा चार के खिलाफ मैं साफ देख रहा हूं कि हम एक निर्णायक कालखंड में कदम रख रहे हैं। बड़े-बड़े भी बच नहीं पाएंगे। इस मिजाज के साथ भ्रष्टाूचार के खिलाफ एक निर्णायक कालखंड में अब हिन्दुहस्ता-न कदम रख रहा है और मैं लाल किले की प्राचीर से बड़ी जिम्मेवारी के साथ कह रहा हूं। भ्रष्टा चार दीमक की तरह देश को खोखला कर रहा है। मुझे इसके खिलाफ लड़ाई लडऩी है, लड़ाई को तेज करना है, निर्णायक मोड़ पर इसे लेकर के ही जाना है। तब मेरे 130 करोड़ देशवासी, आप मुझे आर्शिवाद दीजिए, आप मेरा साथ दीजिए यह चिंता का विषय है कि आज देश में भ्रष्टााचार के प्रति नफरत तो दिखती है, व्यजक्त  भी होती है लेकिन कभी-कभी भ्रष्टा चारियों के प्रति उदारता बरती जाती है, किसी भी देश में यह शोभा नहीं देगा।’Ó

मोदी ने कहा ‘Ó कई लोग तो इतनी बेशर्मी तक चले जाते हैं कि कोर्ट में सजा हो चुकी हो, भ्रष्टा चारी सिद्ध हो चुका हो, जेल जाना तय हो चुका हो, जेल गुजार रहे हो, उसके बावजूद भी उनका महिमामंडन करने में लगे रहते हैं, उनकी शान-ओ-शौकत में लगे रहते हैं, उनकी प्रतिष्ठाक बनाने में लगे रहते हैं। अगर जब तक समाज में गंदगी के प्रति नफरत नहीं होती है, स्चतछता की चेतना जगती नहीं है। जब तक भ्रष्टााचार और भ्रष्टांचारी के प्रति नफरत का भाव पैदा नहीं होता है, सामाजिक रूप से उसको नीचा देखने के लिए मजबूर नहीं करते, तब तक यह मानसिकता खत्म  होने वाली नहीं है। और इसलिए भ्रष्टाूचार के प्रति भी और भ्रष्टानचारियों के प्रति भी हमें बहुत जागरूक होने की जरूरत है।’Ó उन्होंरने भाई भतीजावाद के खिलाफ भी जनसहयोग की अपील की और कहा— मैं भाई-भतीजावाद के खिलाफ लड़ाई में आपका साथ चाहता हूं। परिवारवादी राजनीति के खिलाफ लड़ाई में मैं आपका साथ चाहता हूं। यह संवैधानिक जिम्मे दारी मानता हूं मैं। यह लोकतंत्र की जिम्मे दारी मानता हूं मैं। यह लालकिले के प्राचीर से कही गई बात की ताकत मैं मानता हूं।

लालकिले से की गई मोदी की अपील से भ्रष्टाीचार के खिलाफ मुहिम तेज होने और उसे जनसमर्थन मिलने को लेकर हर कोई सशंकित है। विपक्ष मोदी के हर वाक्य  के मायने तलाश रहा है और अपने बचाव के लिये  इसे राजनीतिक हथियार के रूप में निरूपित करके मोदी की मुहिम को कुंद करना चाहता है। पिछले कुछ दिनों से विकास और मुफ्त सेवा की राजनीति के साथ भ्रष्टादचार के मुद्दे चर्चा जोरों पर है। भ्रष्टांचार का मुद्दा सीधे कानून से जुडा है और ‘ कानून अपना काम करेगा ‘ एक ऐसा शस्त्रो है जिससे हर कोई अच्छीम तरह से वाकिफ है, कम से राजनेता इसके परिणाम को भलीभांति जानते है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में 19 सितंबर को केंद्रीय एजेंसियों के  दुरूपयोग के खिलाफ प्रस्तातव पारित किया गया। लेकिन ममता बनर्जी ने चर्चा में यह कहकर सबको हैरान कर दिया कि उन्हेंि नही लगता कि राज्य  में केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरूपयोग के पीछे प्रधानमंत्री नरेन्द्रे  मोदी का हाथ है। अलबत्ता् उन्होंकने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं का एक तबका अपने हित साधने के लिये केंद्रीय एजेंसियों का दुरूपयोग कर रहा है।

ममता के इस तरह पलटी मारनेवाले बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस ने कहा कि अगर आप विपक्ष में है तो लुकाछिपी का खेल नहीं खेला जा सकता। अगर कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देता है तो वह व्यक्ति उन आरोपों से उन्हें मुक्त कर रहा है जिनपर आज देश की जनता मोदी से सवाल कर रही है। दूसरी ओर भाजपा ने दो टूक कहा है कि नरेंद्र मोदी को किसी के क्लीतन चिट की जरूरत ही नही है।

ममता बनर्जी ने जिस तरह से पहले राष्ट्र पति चुनाव एवं फिर उपराष्ट्रापति चुनाव में पैंतरा बदला था उसको लेकर वह विपक्ष के बाकी सभी दलों के निशाने पर आ गई थीं।अब ममता ने केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरूपयोग के मामले में मोदी को क्ली न चिट दी है तो इस मुद्दे पर एकजुट हो रहे विपक्ष को झटका लगा है। ममता बनर्जी अनुभवी नेता हैं और वह अपने राजनीतिक हित को भलीभांति जानती हैं, उन्हेंह ऐसा लगने लगा है कि भ्रष्टाीचार के खिलाफ मोदी की लडाई में सीधे पडने से पासा पलट भी सकता है।

अशोक उपाध्याय
(लेखक पूर्व संपादक, यूनीवार्ता, हैं)

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