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HAL : आत्मनिर्भर भारत का अग्रदूत

HAL : आत्मनिर्भर भारत का अग्रदूत

भारत तेजी से आत्मनिर्भरता के रास्ते पर बढ़ रहा है।  भारत रक्षा के क्षेत्र में सारी स्वदेशी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। भारत रक्षा उत्पादन का केंद्र बनना चाहता है यह हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच है  कि भारत विदेशों से रक्षा उपकरण और रक्षा तकनीक का आयात कम करें। हम सब ने देखा कि कैसे भारत में INS वक्रांत का सफलतापूर्वक जलावरण किया जैसा कि आप सभी ने देखा कि भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लाइट कॉन्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड को सेना को समर्पित किया। प्रचंड का निर्माण भारत एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने किया था। इस सफलता की गाथा कैसे लिखी गई इस बारे में HAL के चेयरमैन सी.बी.अनंतकृष्णन से बात की उदय इंडिया के समूह संपादक दीपक रथ ने-

उदय इंडिया- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने सफलतापूर्वक प्रचंड की लॉन्चिंग की इसके लिए आपको बधाई। इसके साथ ही हम यह जानना चाहेंगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने के लिए आप क्या प्रयास कर रहे हैं ?

सी.बी.अनंतकृष्णन-  आप सभी जानते हैं कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाया गया प्रचंड हेलीकॉप्टर भारतीय वायु सेना को समर्पित किया है। यह कार्य रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था । हम धन्यवाद करते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का और भारत सरकार का जिन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड पर भरोसा किया। और हमें मौका दिया कि हम देश के विकास में भागीदार हो। लाइट कॉन्बैट हेलीकॉप्टर यानी एलसीएच हमारे बहुत सारे स्वदेशी उत्पादों में से एक है। यह एक अटैक हेलीकॉप्टर है जो कि बहुत ऊंचाई वाली जगहों पर भी बहुत अच्छी तरह काम करता है। उदय इंडिया-भारत को आत्मनिर्भर बनाने में HAL की कितनी बड़ी भूमिका है ?

सी.बी.अनंतकृष्णन- आपने सही कहा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड पहले से ही स्वदेशी रक्षा उत्पादों के लिए काम कर रहा है।  इसके लिए हमने कई निजी कंपनियों को अपने साथ अपने मिशन में शामिल किया है। HAL के साथ 300 से भी ज्यादा लघु और मध्यम उद्योग इकाइयों जुड़ी हुई हैं जिन्होंने  LCA प्रचंड के लिए भी काम किया है और बाकी कई सारे प्रोजेक्ट में वह हमारे साथ काम कर रहे हैं। हम सब मिलकर देश को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। लेकिन इस काम में रिसर्च का बहुत अहम रोल है।

उदय इंडिया-  हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड शोध के जरिए भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कैसे काम कर रहा है ?

सी.बी.अनंतकृष्णन- दुनिया की बड़ी रक्षा कंपनियां जैसे लॉकहीड मार्टिन एअरबस यह सभी रिसर्च में अपने फंड का एक बड़ा हिस्सा खर्च करती हैं। अभी तक हम अपने मुनाफे का 6 से 7 फ़ीसदी रिसर्च के लिए खर्च करते थे जिसे हमने बढ़ाकर 10 फ़ीसदी किया है। भविष्य में हम अपने मुनाफे का 15 प्रतिशत शोध के काम में खर्च करेंगे।

उदय इंडिया- HAL की सहयोगी कंपनियां कौन-सी हैं,  जिनके साथ आपने टाईअप किया है ?

सी.बी.अनंतकृष्णन- हमने देश की कई कंपनियों के साथ टाईअप किया है जिसमें से एलसीए के लिए हमने लार्सन एंड टूब्रो के साथ काम किया डाटा पैटर्न वेब टेक्नोलॉजी अल्फा कंपनी बीपीएल जैसे ऐसी लगभग 20 कंपनियां जो पहले से ही रक्षा क्षेत्र में काम कर रही हैं वह HAL की सहयोगी है।

उदय इंडिया- वैसे तो HAL ने कई सारे उत्पाद बनाए हैं लेकिन पिछले विगत वर्षों में हम देखें तो कई सारे उत्पादों की डिलीवरी में बहुत समय लगा है आखिर इसका कारण क्या रहा है  ?

सी.बी.अनंतकृष्णन -आप जो कह रहे हैं वह सही है लेकिन यह भूतकाल की बात थी। अब स्थितियां बदल गई है पिछले 3 वर्षों में हम देरी को बर्दाश्त नहीं कर रहे हैं पिछले कुछ वर्षों में हमने जो काम अपने हाथ में लिया , उसे समय पर पूरा किया। अब हम रिसर्च डेवलपमेंट के लिए अप्रूवल का इंतजार नहीं करते हैं। जैसे ही कांट्रेक्ट पर बातचीत शुरु होती है। हम अपनी तैयारी शुरु कर देते हैं, जिससे कि कांट्रेक्ट होते ही हम प्रोडक्ट की डिलीवरी शुरू कर दें।

उदय इंडिया- अब हम बात करें  प्रचंड की इसमें भी बहुत सारे हिस्से, बहुत सारे पुर्जे उन्हें बाहर से मंगाना पड़ा । आखिर कब हम पूरी तरह स्वदेशी को बढ़ावा दे पाएंगे कब पूरी तरह अपने पैरों पर खड़े हो पाएंगे  ?

सी.बी.अनंतकृष्णन- एमसीएच  को विकसित करने पर हमें कई सारे ग्राहकों से बहुत तारीफ प्राप्त हुई है यह एक बहुत ही सक्षम हेलीकॉप्टर है, जोकि कई विषम परिस्थितियों में बहुत सफलतापूर्वक काम कर सकता है। इसके विकास करने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्योंकि यह देश का पहला अटैक हेलीकॉप्टर था भारत उन 49  देशों में शामिल हो गया है जिसने अपना खुद का अटैक हेलीकॉप्टर बनाया और डिजाइन किया है हम भारतीय सेना को एलसीएच की सप्लाई कर रहे हैं। कई विदेशी ग्राहक भी एलसीएच में रुचि दिखा रहे हैं।   हम इस हेलीकॉप्टर के निर्यात के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।

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