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स्वदेशी रक्षा उत्पादन के जरिए ‘औद्योगिक राष्ट्र ‘ की ओर बढ़ता भारत

स्वदेशी रक्षा उत्पादन के जरिए ‘औद्योगिक राष्ट्र ‘ की ओर बढ़ता भारत

स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने दो साल पहले रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्धन नीति 2020 की घोषणा की। इस नीति में आत्मनिर्भरता और निर्यात के लिये देश की रक्षा उत्पादन क्षमताओं पर केंद्रित किया गया है। भारत में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सामरिक भागीदारी की रणनीति पर भी काम तेज किया है। इसके तहत भारतीय कंपनियों को विदेशी ईकाइयों के साथ सहयोग करने और प्रौद्योगिकी प्राप्त करने के साथ ही देश में निर्माण की अनुमति दी जाती है। इसके तहत देश की उन परियोजनाओं को भी बनाए रखने की क्षमता प्राप्त करने की सुविधा दी जा रही है। इसके साथ ही सरकार  उन वस्तुओं के आयात पर पाबंदी लगा रही है, जिन्हें भारत में बनाया जा रहा है।

इसके तहत भारत सरकार स्वदेशी रक्षा उपकरणों और अस्त्र-शस्त्रों के लिए तीन सूचियां जारी कर चुकी है। हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीसरी सकारात्मक सूची जारी की। इस सूची में उन 101 हथियार को शामिल किया हैं, जिन्हें स्वदेश में ही विकसित किया जा रहा है। इन रक्षा वस्तुओं या उपकरणों के आयात पर अगले पांच वर्षों में प्रतिबंध रहेगा और इनकी खरीद सिर्फ और सिर्फ भारतीय फर्मों से ही की जाएगी। तीसरी सूची में शामिल उपकरणों को दिसंबर 2022 से दिसंबर 2027 तक पूरी तरह से स्वदेशी बनाया जाना है। इससे पहले 2020 से अब तक दो सूचियां जारी करके 209 हथियारों के आयात पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इससे पहले भी स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए 101 हथियारों और प्लेटफार्मों की ‘पहली सकारात्मक स्वदेशीकरण’ सूची 21 अगस्त, 2020 में अधिसूचित की गई थी।

पहली सूची में मुख्य रूप से 155 एमएम और 52 कैलीबर के अल्ट्रा-लाइट होवित्जर, हल्के लड़ाकू विमान  एमके-1ए के लिए उन्नत स्वदेशी सामग्री, पारंपरिक पनडुब्बी और संचार उपग्रह जीसैट-7सी शामिल थे। इसी तरह टैंक इंजन, रडार, कोरवेट सहित 108 हथियारों और प्लेटफार्मों की दूसरी सूची 31 मई, 2021 को जारी की गई थी। इसमें अगली पीढ़ी के कार्वेट, भूमि आधारित एमआरएसएएम हथियार प्रणाली, स्मार्ट एंटी-फील्ड वेपन सिस्टम एमके-आई, टैंक टी-72, ऑनबोर्ड ऑक्सीजन जनरेशन सिस्टम आधारित लड़ाकू विमानों के लिए एकीकृत जीवन समर्थन प्रणाली और 1000 हॉर्स पावर इंजन को शामिल किया गया है। तीसरी सूची में जो 101 हथियार शामिल हैं, उन्हें स्वदेश में ही विकसित किया जा रहा है। इस तरह 310 रक्षा उपकरणों वाली इन तीन सूचियों को जारी करने के पीछे सरकार का मकसद घरेलू उद्योग की क्षमताओं को बढ़ावा देना है। भारतीय रक्षा उद्योग का लक्ष्य सिर्फ भारतीय सशस्त्र बलों की मांग को पूरा करना ही नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के उपकरणों का निर्यात भी है। इससे प्रौद्योगिकी और निर्माण क्षमता में जहां नया  निवेश आने की संभावना है, वहीं स्वदेशी अनुसंधान और विकास की क्षमता भी प्रोत्साहित होगी। सरकार की कोशिश घरेलू रक्षा उद्योग को सशस्त्र बलों की भविष्य की जरूरतों को समझने के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करना है। 101 हथियारों को साल 2027 तक पूरी तरह से स्वदेशी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उम्मीद की जा रही है कि इससे भारतीय रक्षा उद्योग को 2,10,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऑर्डर मिल सकेगा।

यहां एक और बात ध्यान देने की है कि भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ का मतलब दुनिया के बाकी हिस्सों से अलग-थलग रहकर काम करना नहीं है। बल्कि देश में नई और नवोन्मेषी तकनीक को विकसित करते हुए अपना उत्पादन करना है। सही मायने में सरकार रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के अपने लक्ष्य को हासिल करने की तैयारी में है।

प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल का असर यह हुआ है कि जहां तकनीशियनों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों में उत्साह का माहौल है, वहीं रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनियों में कॉरपोरेट की तरह काम हो रहा है। अतीत में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सरकारी सुस्त गति से काम होता था। उनकी संजीदा जवाबदेही कम ही दिखती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है। इसका असर यह है कि भारत लगातार रक्षा उत्पादन क्षेत्र में स्वदेशीकरण की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी पर उसके विरोधी देश को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन जिस तरह भारत रक्षा प्रोद्योगिकी, उपग्रह प्रौद्योगिकी और उत्पादन के क्षेत्र में स्वदेशीकरण की ओर बढ़ रहा है, कह सकते हैं कि नरेंद्र मोदी की सोच के मुताबिक भारत ‘औद्योगिक राष्ट्र’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

 

 

उमेश चतुर्वेदी

 

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