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पांच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था सच हो रहा स्वप्न

पांच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था सच हो रहा स्वप्न

पूरी दुनिया जहां मंदी की मार से जूझ रही है। यूरोप और अमेरिका के कथित विकसित देशों  में लोगों के लिए भरपेट खाना जुटाना मुश्किल हो रहा है। वहीं भारत में लोग लाइन लगाकर गाड़ियां खरीद रहे हैं। रेस्टोरेन्ट और होटलों में कई हफ्तों की बुकिंग चल रही है। फैशनेबल कपड़ों की खरीद तेज हो रही है। टूरिस्ट स्थानों पर कई महीनों की बुकिंग चल रही है। ए़डवांस बुकिंग के चलते रेल और फ्लाइट्स में टिकट नहीं मिल रहा है। लग्जरी वस्तुओं की खरीद में बढ़ोत्तरी हो रही है। यह सब इस बात का संकेत देता है कि आने वाले वक्त में भारत दुनिया की अर्थव्यवस्था का केन्द्र बनेगा। ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था का 5 ट्रिलियन तो क्या 10 ट्रिलियन के आंकड़े पर पहुंचना भी बेहद आसान दिखाई दे रहा है। आइए जानते हैं कैसे…

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन साल पहले यानी साल 2019 में वाराणसी में एक कार्यक्रम में देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन  डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। यानी साल 2024-25 तक देश की अर्थव्यवस्था को 5 हजार अरब डॉलर तक पहुंचाने का सपना देखा गया था। लेकिन इस बीच कोरोना का दौर शुरु हो गया। जिसकी वजह से देश को लगभग 83 अरब डॉलर यानी 6 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। जिसके बाद लगा कि 5 ट्रिलियन डॉलर तक का लक्ष्य कुछ ज्यादा ही बड़ा है। जहां तक पहुंचना शायद संभव नहीं हो सके। लेकिन यह संकल्प यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का है। जिनके इरादे ठोस योजनाओं पर आधारित होते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था ने ना केवल कोरोना से मिले झटके को बर्दाश्त कर लिया है, बल्कि उससे निजात पाकर 5 ट्रिलियन डॉलर की विजय रेखा को पार करने की तैयारी कर रहा है। फिलहाल यानी 2022 के मध्य तक भारत की अर्थव्यवस्था 3  ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। अभी तीन साल का समय और बाकी है। अर्थव्यवस्था की रफ्तार को देखकर लगता है कि देश समय से पहले ही 5 ट्रिलियन के आंकड़े तक पहुंच जाएगा। इसके सात (7) प्रमुख संकेत दिखाई देने लगे हैं-

  1. अनाज के रिकॉर्ड उत्पादन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत

भारत एक कृषि प्रधान देश है। हमारे देश की अर्थव्यवस्था ग्रामीण इलाकों के उत्पादन पर आधारित होती है। जो कि बेहद ठोस बुनियाद पर टिकी हुई है। हमारे देश की ग्रामीण और आंतरिक अर्थव्यवस्था ही हमें हर बार वैश्विक मंदी के बाहरी झंझावातों से बचाती है। रूस-यूक्रेन के बीच जब युद्ध शुरु हुआ, तो पूरी दुनिया में खाद्यान्न का संकट पैदा हो गया। उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘भारत के पास इतना खाद्यान्न है कि वह पूरी दुनिया का पेट अकेले भर सकता है’। प्रधानमंत्री ने यह बात ठोस आकंड़ों के आधार पर कही थी। क्योंकि खाद्यान्न उत्पादन के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय किसानों की पैदावार लगातार बढ़ रही है-

2021-22 में देश में रिकॉर्ड 31.451 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ है। जो कि पिछले 5 वर्षों के औसत खाद्यान्न उत्पादन से 2.38 करोड़ टन अधिक है

2021-22 में खाद्यान्न उत्पादन 2020-21 के उत्पादन की तुलना में 37.7 लाख टन अधिक है

इस साल चावल का उत्पादन 130.29 मिलियन टन हुआ है। जबकि एक साल पहले चावल उत्पादन 124.37 मिलियन टन था। यानी लगभग 6 मिलियन टन ज्यादा

देश में दालों का उत्पादन 25.46 मिलियन टन से बढ़कर रिकार्ड 27.69 मिलियन टन हुआ है। यानी दाल उत्पादन दो मिलियन टन बढ़ा है

सरसों, तिल, सूरजमुखी जैसे तिलहन फसलों का उत्पादन भी पिछले साल के 35.94 मिलियन टन से बढ़कर रिकार्ड 37.69 मिलियन टन हुआ है।

–     गन्ने के उत्पादन में बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है। यह पिछले वर्ष के 405.39 मिलियन टन से बहुत ज्यादा बढ़कर 431.8 मिलियन टन हुआ है। यानी लगभग 26 मिलियन टन ज्यादा

–     सिर्फ गेहूं का उत्पादन 109.54 मिलियन टन से घटकर 106.84 मिलियन टन हुआ। वह भी इसलिए क्योंकि देश के किसानों ने गेहूं की बजाए दूसरी नकदी फसलें बोने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। यानी गेहूं की बुआई का रकबा कम रहा।   कृषि के यह आंकड़े बेहद अहम हैं। क्योंकि खेती हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है। इस साल मौसम की मार के बावजूद फसलों का उत्पादन बढ़ना यह बताता है कि मोदी सरकार की कृषि नीति सफल रही है। देश के किसान इसका फायदा उठा रहे हैं। किसानों की आमदनी का बढ़ना देश की अर्थव्यवस्था को एक ठोस आधार देता है। जो कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था तक पहुंचने का रास्ता तैयार करता है।

  1. मध्यम वर्ग की समृद्धि बढ़ी

जहां खाद्यान्नों का उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत देता है। वहीं लग्जरी वस्तुओं की खपत का बढ़ना शहरी और मध्यम वर्ग की आर्थिक मजबूती का प्रतीक है। देश में त्योहारी सीजन में गाड़ियों की बिक्री में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली है। जो कि यह बताती है कि देश का मध्यम वर्ग समृद्ध हुआ है। उद्योग जगत के आंकड़े बताते हैं कि साल 2022 के त्योहारी सीजन में गाड़ियां खरीदने के लिए लोगों की लाइन लगी रही। मांग इतनी ज्यादा रही कि डीलर्स ने नई गाड़ियों की बुकिंग कैंसिल कर दी।

धनतेरस पर कार खरीदने के लिए 4 लाख लोगों ने बुकिंग कराई। वहीं नवरात्रि के मौके पर लगभग 5,39,227 लाख गाड़ियां बिकी

टाटा, रेनॉ, मारुति जैसी कंपनियों की प्रचलित गाड़ियों पर तो 65 सप्ताह की वेटिंग देखी जा रही है

त्योहारी सीजन के दौरान गाड़ियों की बिक्री में पिछले सालों के मुकाबले औसतन 57 फीसदी की भारी बढ़ोत्तरी हुई

दोपहिया वाहनों की बिक्री में 52 प्रतिशत, तिपहिया वाहनों की बिक्री में 115 फीसदी, ट्रक जैसे वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में 48 फीसदी, बस जैसे यात्री वाहनों में 70 फीसदी और ट्रैक्टर की बिक्री में 58 फीसदी की तेजी देखी गई

गाड़ियों की बिक्री में हर साल दोगुनी वृद्धि हो रही है

  1. लग्जरी वस्तुओं की बिक्री में भारी वृद्धि

देश में विलासिता वस्तुओं यानी लग्जरी आइटम्स की बिक्री में भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है। जो कि यह दर्शाता है कि भारतीयों की जेब में पर्याप्त पैसा मौजूद है। वह उसे खर्च करने से भी नहीं हिचक रहे हैं। यह देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती का दृढ़ संकेत है। क्योंकि यह बताता है कि भारत के लोग आवश्यक जरुरतों को लेकर निश्चिंत हैं। उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के सशक्त नेतृत्व पर पूरा भरोसा है। वह जमकर लग्जरी वस्तुओं की खरीदारी में जुटे हैं। क्योंकि उनके पास भविष्य के लिए सेविंग मौजूद है। बचा हुआ पैसा वह सामान खरीदने पर खर्च करने से हिचक नहीं रहे हैं।

साल 2022 के त्योहारी सीजन में कपड़ों की बिक्री में 25 फीसदी तेजी देखी गई

इस साल खुदरा बाजारों में 1.5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की बिक्री हुई। जो कि कोरोना काल की बिक्री से 60 हजार करोड़ ज्यादा है

साल 2021-22 में 4.5 करोड़ लोग अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट्स में खाने के लिए गए

बाहर खाने के लिए भारतीयों ने पिछले साल के मुकाबले 40 फीसदी ज्यादा खर्च किया

घर से बाहर जाकर महंगा भोजन करने का ट्रेंड 120 फीसदी बढ़ा है

  1. इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की राह आसान

देश के विकास के लिए अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर बेहद जरुरी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासनकाल के पिछले 8 सालों के दौरान सड़कों के निर्माण में जबरदस्त तेजी देखी गई। सड़कों के निर्माण की गति तेज होने के साथ साथ निर्माण की लागत भी घटी है। पिछले 8 सालों में देश में राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 1.47 लाख करोड़ किलोमीटर तक पहुंच गई। जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

आजादी के 67 सालों तक यानी साल 2014 तक देश में मात्र 91,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग बने थे। जो कि मात्र 8 सालों में बढ़कर 1 लाख 47 किलोमीटर हो गए। यह लगातार बढ़ता जा रहा है

राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई में 61 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है

साल 2009 से 2014 के बीच प्रतिदिन 12 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हो पाया

साल 2014 से 2021 के बीच प्रतिदिन ढाई गुना ज्यादा यानी 29 किलोमीटर सड़कें बनाई गईं

राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर एक ही लेन में 5.33 घंटे में 75 किलोमीटर बिटुमिनस कंक्रीट सड़क बनाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया गया

सड़क और परिवहन विभाग ने साल 2020-21 में 11 हजार किलोमीटर सड़क बनाने का लक्ष्य रखा था। जबकि इस साल लक्ष्य से बेहद ज्यादा 13 हजार 327 किलोमीटर सड़कें तैयार कर दी गईं

केन्द्र सरकार ने साल 2025 तक 2 लाख किलोमीटर राजमार्ग तैयार करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी लक्ष्य से ज्यादा काम होगा और हमें देश की विकास की नई इबारत देखने को मिलेगी

  1. स्वदेशी रक्षा उत्पादन से मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था

दुनिया में सैन्य हथियारों का बाजार बहुत बड़ा है। भारत ने इस क्षेत्र में धमाकेदार शुरुआत की है। अभी तक हमारा देश रक्षा उत्पादों का सबसे बड़ा आयातक हुआ करता था। जिसमें देश की बेशकीमती विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा खर्च होता था। लेकिन स्वदेशी रक्षा उत्पादन के बढ़ने से आयात लगातार कम हो रहा है। जिससे हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। वहीं दूसरे देशों को रक्षा सामग्री के निर्यात से हमें फायदा भी हो रहा है।

भारत रक्षा सामग्री के 25 प्रमुख निर्यातक देशों के क्लब में शामिल हो गया है

पिछले पांच सालों में रक्षा सामग्री के निर्यात में तीन गुना ज्यादा यानी 334 फीसदी की बड़ी तेजी देखी गई

भारत दुनिया के 75 देशों को रक्षा सामग्री का निर्यात कर रहा है

साल 2021-22 में भारत का रक्षा निर्यात 13 हजार करोड़ रुपए का रहा है, जो कि अभी तक का सबसे ज्यादा है

भारत ने अपनी सैन्य जरुरतों की पूर्ति स्वदेशी रक्षा उद्योग से करने का फैसला किया है। भारतीय कंपनियों ने 20 हजार करोड़ की लागत से INS विक्रांत जैसा विमानवाहक पोत तैयार कर लिया है। जो कि 80 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी है। नौसेना प्रमुख ने दावा किया है कि साल 2047 तक भारतीय नौसेना पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगी। रक्षा मंत्रालय ने दर्जन भर ज्यादा स्वदेशी तकनीक विकसित करने का फैसला किया है। जिनसे घरेलू जरुरतें पूरी होंगी और उनका निर्यात भी किया जा सकेगा। इसके लिए विदेशी कंपनियों के तकनीक के ट्रांसफर का समझौता भी किया जा रहा है। जिससे कि इन उपकरणों को भारतीय जमीन पर तैयार किया जा सके। इसमें एके-203 ऑटोमेटिक रायफल, 60 मिमी मोर्टार, हल्का लड़ाकू विमान तेजस, एलसीएच प्रचंड, आकाश और ब्रह्मोस मिसाइल, धनुष तोप, 52 कैलिबर गन, 30 मिमी ट्विन बैरल एयर डिफेंस गन समेत कई छोटे हथियार शामिल हैं। इसमें से कई तरह के हथियारों का निर्माण शुरु हो चुका है और कई निर्माण की प्रक्रिया में हैं। इसमें से प्रचंड, तेजस, ब्रह्मोस, आकाश जैसे कई उत्पादों को हासिल करने के लिए कई देश लालायित हैं। क्योंकि यह बेहद कम कीमत में पश्चिमी देशों की कंपनियों के बनाए उत्पादों जैसी उन्नत तकनीक से लैस हैं।  डिफेन्स एक्सपो 2022 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऐलान किया कि भारत ने 300 से ज्यादा रक्षा उपकरणों के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। क्योंकि इनका निर्माण देश में ही किया जाएगा। रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां आश्चर्यजनक हैं। यह बेहद कम समय में बहुत बड़ी सफलता दिला रही हैं-

लगभग 2700 रक्षा संबंधित कल-पुर्जों और सब सिस्टम का निर्माण देश के अंदर शुरु किया जा चुका है

सशत्र बलों की 65 फीसदी रक्षा खरीद भारत में निर्मित किया जा रहा है

भारतीय व्यक्तिगत सुरक्षा सामग्री, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणाली, इंजीनियरिंग यांत्रिक उपकरण, अपतटीय गश्ती ज़हाज़, उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर, एवियोनिक्स सूट, रेडियो सिस्टम तथा रडार सिस्टम की विदेश में भारी मांग है

इटली, मालदीव, श्रीलंका, रूस, फ्रांस, नेपाल, मॉरीशस, श्रीलंका, इज़रायल, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, भूटान, इथियोपिया, सऊदी अरब, फिलीपींस, पोलैंड, स्पेन, इंडोनेशिया, वियतनाम जैसे देशों को भारतीय रक्षा उत्पादों का निर्यात शुरु हो चुका है

  1. मानव संसाधन को विकसित करने की योजना तैयार

भारत ने अभी तक अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जो कदम उठाए हैं। वह तो महज एक झलक है। असली खेल तो अब शुरु होने वाला है। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच ने भारत की जड़ें मजबूत करने के लिए भी भारी निवेश करने का फैसला किया है। देश में नई शिक्षा नीति का ऐलान हो गया है। जिसका उद्देश्य छात्रों को नौकरी दिलाने से ज्यादा स्वरोजगार के लिए तैयार करने पर है। यानी देश की नई पीढ़ी के लिए एक ऐसी कार्ययोजना तैयार की गई है कि नई पीढ़ी के छात्र अपनी रुचि के अनुसार मनमर्जी के विषय पढ़ सकें और देश की विकास में योगदान दे पाएं। नई शिक्षा नीति के लिए केन्द्र सरकार ने बजट बढ़ाने का भी ऐलान किया है। पहले जहां केन्द्रीय बजट का मात्र 4 फीसदी शिक्षा के लिए खर्च किया जाता था, वहीं अब शिक्षा पर केन्द्रीय बजट का 6 फीसदी खर्च करने का फैसला किया गया है। जो कि देश की नींव मजबूत करने के लिए जरुरी है। साल 2022 में शिक्षा पर खर्च के लिए 1 लाख 4 हजार 277 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। जो कि पिछले सालों की तुलना में बेहद ज्यादा है। उच्च शिक्षा और रिसर्च पर विशेष जोर दिया गया है। जो कि देश के आर्थिक विकास को नए आयाम प्रदान करेगा। देश की नई शिक्षा नीति भारत के विकास का एक नया अध्याय लिखेगा। जो कि देश की आने वाली पीढ़ियों को शैक्षणिक और बौद्धिक रुप से सशक्त बनाकर उन्हें राष्ट्रीय संपत्ति के रुप में ढाल देगा।

  1. क्या है आर्थिक विशेषज्ञों की राय

भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी तत्व बेहद मजबूत हैं। दुनिया के जाने माने आर्थिक विशेषज्ञ भारत की आर्थिक प्रगति को गौर से देख रहे हैं और सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं। यह एक ऐसा समय है, जब पूरी दुनिया आर्थिक मंदी के अंधेरे से घबराई हुई है। लेकिन भारत तेज गति से तरक्की कर रहा है। इसलिए पूरी दुनिया की नजर भारत पर टिकी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलीना जियोर्जिया ने कहा है कि ‘अंधेरे में भारत एक रोशनी की किरण के रूप में उभरा है। इस कठिन समय में भी जिस तरह से ढांचागत सुधारों के जरिए भारत ने अपनी ग्रोथ संभाल रखी है, वह सराहनीय है।’

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख अर्थशास्त्री पियरे ओलिवियर गौरिनचास के मुताबिक ‘भारतीय  अर्थव्यवस्था ऐसे समय में तेजी से उभर रही है जब दुनिया मंदी की संभावनाओं का सामना कर रही है। भारत 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था छूने की क्षमता रखता है। अगर कुछ ठोस कदम उठाए जाएं तो जल्द ही अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। पियरे ओलिवियर ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश पर जोर देना होगा। इमारतों और सड़कों में निवेश तो हो ही रहा है लेकिन अगर मानव संसाधन, मानव पूंजी, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि में निवेश हो तो भारत तेजी से आगे बढ़ेगा।’

दक्षिण एशिया के लिए विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री हैंस टिमर ने कहा है कि ‘भारतीय अर्थव्यवस्था ने दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तुलना में मजबूत वृद्धि दर्ज कर अच्छा प्रदर्शन किया है। कोविड के पहले चरण में तेज संकुचन से जोरदार वापसी की है। भारत के ऊपर कोई बड़ा विदेशी कर्ज नहीं है और उसकी मौद्रिक नीति विवेकपूर्ण रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने विशेष रूप से सेवा क्षेत्र और सेवा निर्यात में अच्छा प्रदर्शन किया है।’

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा है कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल ऑफ लोकल और आत्मनिर्भर भारत अभियान का उपभोक्ताओं पर काफी असर पड़ा है। सस्ता होने के बावजूद उपभोक्ता अब चीन के सामानों की जगह भारतीय उत्पादों की मांग कर रहे हैं। भारतीय कारोबारियों ने इस साल धनतेरस-दिवाली से जुड़ी किसी भी वस्तु का चीन से आयात नहीं किया। भारतीयों के इस कदम से त्योहारी सीजन में भारत को 75,000 करोड़ रुपये का फायदा और चीन को इतने का ही नुकसान हुआ है।’

खेती-किसानी, गाड़ियों की बिक्री, सड़कों का निर्माण, होटल-रेस्टोरेंट और पर्यटन क्षेत्र का विकास, मानव संसाधन में निवेश, रक्षा निर्यात में वृद्धि, सड़कों का लगातार निर्माण जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति यह दर्शाती है कि भारत जल्दी ही 5000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का रुतबा हासिल कर लेगा। अब समय है कि हमें देश को 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के स्वप्न को साकार करना होगा।

 

 

अंशुमान आनंद

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