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खाने की बर्बादी को रोकने के लिए करें प्रयास

खाने की  बर्बादी को रोकने के लिए करें प्रयास

भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र रहा है कि थाली में अन्य का एक भी कण न रहे। भोजन से जुड़े भी कई नियम हमारे धर्म ग्रंथों में बताए गए हैं। फिर क्यों हम बहुत सा खाना बिना खाए ही छोड़ देते हैं! जूठा भोजन छोडऩे से पहले आप जान लें संयुक्त राष्ट्र संघ (एफएल) के अनुसार प्रतिवर्ष विश्व में 1.3 बिलियन टन खाना बर्बाद किया जाता है? यदि यह खाना बर्बाद न हो तो प्राकृतिक संसाधनों पर बिना कोई अतिरिक्त दबाव डाले 500 मिलियन लोगों को खाना उपलब्ध करवाने के लिए पर्याप्त है। जब हमारे भारत देश में लाखों लोगों को  सही रूप से दो वक्त का भोजन भी नहीं मिलने के कारण बड़ी सख्या में बच्चे कुपोषण का शिकार होकर असमय ही मौत के मुंह में  जाने के लिए बिवश हो जाते  हैं।

भारत अत्यधिक भोजन बर्बाद करने वाले देशों में से एक है। जर्मनी आदि अनेक देशों में होटलों में खाना बचा कर छोडऩा अपराध माना जाता है और उसके लिए जुर्माना भी लगाया जाता है। कई देशों में बचे हुए खाने की समस्या से निपटने के लिए गंभीरता से विचार किया जा रहा है। जर्मनी में एक वेबसाइट की शुरूआत की गई है जो कि बचे हुए खाने को शेयर करने की सुविधा उपलब्ध करवाती है। दुबई के एक होटल के मालिक ने खाना आर्डर करके उसे पूरा न खाने वाली पर जुर्माना लगाने का फैसला किया है। फ्रांस की सरकार ने भी खाने की बर्बादी को रोकने की दिशा में अनेक कदम उठाए हैं। इसलिए विचार करें कि खाना बनने के पीछे कितना श्रम होता है। आपका खाना सिर्फ आपका नहीं है अपितु भले ही आपने पैसे देकर खरीदा हो। जो खाना खेत से आपकी थाली तक पहुंचा है उसे वहां तक पहुंचने में बहुत सारे संसाधनों का इस्तेमाल हुआ है। प्रकृति और मानव के अनेक उपयोगी तत्व उसमें लगे है और तब कहीं जाकर वह आप तक पहुंचा है। जैसे पानी, खाद, धूप, हवा, ईंधन, और बिजली आदि। भोजन की बर्बादी  रोकने के बारे में विचार करें, ब्रह्मा यता:। हमारे शास्त्रों में भोजन की बहुत ही पवित्र माना गया है। भोजन के सन्दर्भ में समर्थ गुरु रामदास जी के दासबोध 11/3/21 तथा 12/10/1 में कहा है-

चंकाग्र असावें मन। तरी मग जेबितां भोजन। गोड वाटे।

भरपेट भोजन के बाद बाकी अन्न को बाँट देना चाहिए, व्यर्थ नहीं फेकना चाहिए।

आपण येथेष्ट जेवणे। उरले ते अन्न वाटणे।। परंतु कया दवडणे। हा धर्म नव्हे।

ऋग्वेद 10/117/1-2 में कहा गया है- है। सृष्टि कर्ता ने प्राणियों को क्षुधा देकर लगभग मार ही डाला है जो अन्न दानकर जठराग्नि को शान्त करता है वही दाता है। जो जरूरतमंद को भोजन न देकर स्वयं भोजन करता है, एक दिन वह भी मरता है, देने वाले को कभी घाटा नहीं होता, उसे ईश्वर देता है।

मानद भ्रियेत जठरं तावत् स्वत्व हि देिद्रनाम। अधिकं योडमिमन्येत स स्तेनो दण्डमर्हति।।

जितने अपने उदर पूर्ति हो उतने ही अन्न पर अपना अधिकार है,भूखे को भोजन देने के लिये महाभारत अनुशासन पर्व कहा गया है-

सर्वेषामेव दानानामन्नं श्रेष्ठ मुदाहृतम् तं हि प्राणस्य दातारस्तेम्यो धर्म: सनातन:।

ब्रह्मपुराण 218/26-27 में भोजन देने वाले कह गया-अन्नस्य प्रदानेन नरो याति परां गतिम

अत: आज से ही प्रण लें कि खाने की बर्बादी को रोकने के लिए आपनी ओर से हर संभव प्रयास करेंगे। थाली में जूठा भोजन नहीं छोडेंगे। हमेशा परिवार के लोगों की रुचि, स्वाद और उनकी सेहत को ध्यान में रखकर ही खाना बनें। हमेशा कोशिश यही रहे भले ही खाना कम पड जाए लेकिन बचना नहीं चाहिए। खाना कम पड़ जाने की स्थिति से निपटने के बहुत से उपाय हमारे पास उपलब्ध हैं लेकिन अधिक बचे हुए खाने को कचरे के डिब्बे में फेंकने के अलावा कोई चारा नजर नहीं आता। पेट और आपकी भूख को आप से बेहतर कौन समझ सकता है। इसलिए जो भी कुछ खाने के लिए प्लेट में रखें सोच समझ कर ही रखें।

हर व्यक्ति अपने-अपने स्तर पर थोड़ा सा प्रयास करें तो हम सब मिलकर खाना  बर्बाद होने से रोक सकते हैं। बस इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखे। फिर भी खाना घर पर बच जाता है तो आस-पास के लोगों में वितरित करें अथवा अपने शहर की एनजीओ से संपर्क करें जो बना हुआ खाना जरूरतमंदों में बांटती हैं। वेद व्यास ने कहा है ‘अदानं समं दानं त्रिलोकेशु न नियते अर्थात भूखे लोगों को अन्न दान करने से बड़ा कोई दान तीनों लोकों में नहीं है। मनुस्मृति में भी कहा गया है जल का दान करने बाला पूर्ण संतुष्टि प्राप्त करता है और अन्न का दान करने बाला अक्षय सुख की प्राप्ति करता है। याद रखे जो खाना आप बिना खाए ही छोड़ रहे हैं वह सिर्फ आपकी ही नहीं  देश की भी निधि है।

 

अंजू अग्निहोत्री

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