ब्रेकिंग न्यूज़ 

कभी भुलाए नहीं जा सकेंगे मुलायम सिंह यादव

कभी भुलाए नहीं जा सकेंगे मुलायम सिंह यादव

मुलायम सिंह यादव नहीं रहे, देश के बड़े बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। भारतीय राजनीति में उनके योगदान को याद किया। उनकी तारीफ में बड़े बड़े शब्द कहे, उनके साथ अपने निजी संबंधों को याद किया। मुलायम सिंह यादव का परिवार दुखी है और हो भी क्यों ना आखिर उन्होंने अपना पूरा जीवन अपने परिवार को स्थापित करने में जो लगा  दिया। बेटा, भाई, भतीजा, बहू, दूर दराज के रिश्तेदार, सबको बड़ी मशक्कत से राजनीति में स्थापित कर दिया। किसी को सांसद बनाया तो किसी को विधायक, किसी को जिला परिषद् में ही पद दिला दिया, और बेटे को तो मुख्यमंत्री बनवा कर ही छोड़ा।

मुलायम सिंह ने राजनीति में अपने परिवार को ऐसे स्थापित किया..कि उनके परिवार में ही पूरा समाज समाहित हो गया।  शायद यही वजह है कि मुलायम सिंह यादव को बड़ी इज्जत से समाजवाद का पुरोधा घोषित किया गया।  मुलायम सिंह जी ने अपने जीवन में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की। उनके उपर तकदीर की विशेष कृपा भी रही। तभी तो एक ऐसा शख्स, जिसके खिलाफ सन् 1981 में  यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के आदेश पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने शूट ऐट साइट का वारंट जारी किया था। उसी उत्तर प्रदेश में उन्होंने एकछत्र राज किया और जो पुलिस अधिकारी मुलायम सिंह यादव को गोली मारने के लिए तलाश कर रहे थे। उन्हीं पुलिस अधिकारियों को मुलायम को सैल्यूट करने के लिए विवश होना पड़ा। यह किस्मत नहीं तो और क्या है? मुलायम सिंह यादव ने देश की राजनीति में कई मील के पत्थर स्थापित किए।  जिसके लिए उन्हें लंबे समय तक जाना जाएगा।  जैसे राम भक्तों का बेरहमी से कत्लेआम करवाना या फिर रामपुर तिराहा कांड।  जिसने मुलायम सिंह यादव का नाम अमर कर दिया। उनके इन कारनामों के लिए कोई उनकी तारीफ करेगा, तो कोई विरोध करेगा। लेकिन इतना तो तय है कि समर्थक हों या विरोधी..कोई भी मुलायम सिंह यादव को भुला नहीं पाएगा। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मुलायम सिंह यादव का देहांत 10 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर हुआ।

यह वही दिन है, जब हनुमानगढ़ी जा रहे रामभक्तों को गोलियों से भून दिया गया था। मुलायम सिंह ने अपनी पुलिस को सख्त आदेश दे रखा था कि किसी भी सूरत में कारसेवा नहीं होने देनी है।  इसलिए रामभक्तों पर गोलियों की बरसात कर दी गई। इस बर्बर कार्रवाई का मकसद रामभक्तों को रोकना नहीं था, बल्कि अपने राजनीतिक विरोधियों को संदेश देना और अपनी कुर्सी बचाना था। इसीलिए किसी भी रामभक्त के पैरों पर गोली नहीं चलाई गई। बल्कि उन्हें पूरी बेरहमी से सीधा सीने या सिर में गोली मारी गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस गोलीकांड में डेढ़ दर्जन लोगों की मौत हुई थी। .लेकिन बाद में लोगों को सरयू में बहते हुए, किनारे की रेत में लापरवाही से दफनाए गए अनगिनत शव मिले। इसी गोलीकांड में कोलकाता के मशहूर कोठारी बंधुओं की भी मौत हुई थी। मुलायम सिंह यादव को रामपुर तिराहा कांड के लिए भी याद किया जाएगा।  जब उत्तराखंड को अलग करने के लिए आंदोलन चल रहा था और आंदोलनकारी अपनी मांगे लेकर दिल्ली जाना चाहते थे। जिसमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चियां भी शामिल थीं।  यह कोई हिंसक आंदोलन नहीं था। लेकिन मुलायम सिंह यादव पहाड़ियों से बेहद नाराज थे। क्योंकि वो उनकी पार्टी को वोट नहीं देते थे। मुलायम ने खुद अपनी जुबानी यह बयान दिया था कि मैं इन पहाड़ियों की परवाह क्यों करूं, ये मुझे वोट नहीं देते। मुलायम सिंह यादव की यह नाराजगी उत्तराखंड के लोगों पर कहर बनकर टूटी।  एक अक्टूबर 1994 को रामपुर तिराहे पर मुलायम की पुलिस ने गोली चला दी।  सरकारी आंकड़े कहते हैं कि इस गोलीकांड में सात लोग मारे गए। लेकिन सबसे बुरा यह रहा कि उस आंदोलनकारियों में शामिल उत्तराखंड की महिलाओं पर अमानवीय जुल्म किया गया। उस काली रात को क्या क्या हुआ यह कोई नहीं जानता। लेकिन आस पास के खेतों में कई दिनों तक महिलाओं की टूटी हुई चूड़ियां और फटे हुए कपड़े मिलते रहे।  मुलायम सिंह यादव को इस वाकये के लिए भी कभी नहीं भूला जाएगा। वैसे तो मुलायम सिंह यादव बेहद लोकप्रिय नेता थे। उन्हें धरतीपुत्र की उपाधि दी गई थी। लेकिन यूपी के छात्रों में उनकी लोकप्रियता बहुत ज्यादा थी। खास तौर पर यूपी के वह छात्र जिनकी पढ़ने लिखने में ज्यादा रुचि नहीं होती थी। वह मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री बनने का इंतजार करते थे। क्योंकि उस दौरान उन्हें नकल करने की पूरी छूट मिलती थी। पढ़ने लिखने वाले छात्रों को तो वैसे भी राजनीति से कोई लेना देना नहीं होता। मुलायम सिंह यादव की मौत पर पूरा देश शोकाकुल है। हम सब भी हैं। लेकिन हम उतने शोकाकुल कभी नहीं हो पाएंगे। जितना मुलायम की पुलिस के हाथों मारे गए कोठारी बंधुओं की मां हुई थी और रोते रोते अंधी हो गई थीं। हम कभी भी उस शोक का अंदाजा नहीं लगा सकते। जब कारसेवा करने गए अनगिनत लोगों की लाशें तक नहीं मिली। उनके घर पर बूढ़ी माएं, पत्नी और बच्चे इंतजार करते रह गए।

मुलायम सिंह यादव जैसे बड़े नेता के निधन पर पूरी दुनिया मातम मना रही है। लेकिन रामपुर तिराहा कांड में जिन माताओं और बहनों के फटे कपड़े खेतों में मिले, उनके मातम का अंदाजा हम  कैसे लगा सकते हैं। मुलायम सिंह यादव को भारतीय राजनीति में उन्हें कोई भी भुला नहीं पाएगा। चाहे अच्छी वजहों से या फिर नकारात्मक कारणों से। लेकिन नेताजी का नाम अमर रहेगा, यह अकाट्य सत्य है।

 

अंशुमान आनंद

Leave a Reply

Your email address will not be published.