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क्या है शंख की विशेषता

क्या है शंख की विशेषता

सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति पूरी तरह वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। हमारी कोशिश है कि आप भारतीय संस्कृति के बारे में ना केवल जानें, बल्कि उसके तार्किक पक्ष को समझकर उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। इसी सिलसिले में आज हम आपको बताने वाले हैं, एक ऐसी वस्तु के बारे में, जिसका प्रयोग प्रत्येक पूजा और शुभ कार्यों में करना जरुरी होता है, वो है शंख। कहा जाता है कि देवता और असुरों ने जब समुद्र मंथन किया था। तब यह अमूल्य वस्तु उन्हें प्राप्त हुई थी। शंख की विशेषताओं को देखते हुए देवताओं ने शंख को सदैव अपने पास स्थान दिया। कोई भी पूजा शंखध्वनि के बिना पूरी नहीं होती। प्रत्येक सनातनी के पूजाघर में शंख जरुर पाया जाता है। वैसे तो शंख की बहुत सी किस्में होती हैं। यह दक्षिणावर्त, वामावर्त और मध्यमवर्त यानी गणेश शंख होता है। ओडिशा जो कि श्री जगन्नाथ का क्षेत्र माना जाता है। वह भौगोलिक दृष्टि से शंख के आकार का होता है। दक्षिणावर्त शंख बेहद दुर्लभ होता है। इसे अपने घर में रखना बेहद शुभ माना जाता है। भारत में शंख रखने की परंपरा बहुत पुरानी है। प्राचीन काल में हर एक योद्धा अपने पास एक शंख जरुर रखता था। भगवान कृष्ण के पास पांचजन्य अर्जुन के पास देवदत्त युधिष्ठिर के पास अनंतविजय भीम के पास पौंड्रिक नकुल के पास सुघोष और सहदेव के पास मणिपुष्पक शंख मौजूद था।

सभी शंखों की महत्व और शक्ति अलग अलग हुआ करती है। शंख को घर में रखने से धन की वृद्धि और सुख शांति आती है। क्योंकि शंख को धन की देवी माता लक्ष्मी का भाई माना जाता है। शंख का महत्व केवल इष्टपूजन तक सीमित नहीं है। शंख का औषधीय महत्व भी है। यह शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। प्रतिदिन सुबह-शाम शंख फूंकने से रक्तचाप यानी ब्लडप्रेशर नियंत्रित रहता है। अस्थमा जैसी सांस में होने वाली तकलीफ दूर होती है। यहां तक कि दिल की बीमारी में भी नियमित रुप से शंख फूंकने से राहत मिलती है। शंख फूंकने की प्रक्रिया भी एक तरह का प्राणायाम ही है। प्रतिदिन शंख फूंकने से हकलाने जैसे वाणी दोष दूर हो जाते हैं। शंख फूंकने वाले व्यक्ति के चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़ती हैं। और उसके चेहरे पर अलग तरह की चमक आ जाती है। शंख फूंकने से जो ध्वनि पैदा होती है।  वह भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।

शंख ध्वनि का हमारे वातावरण पर बहुत असर पड़ता है। शंख की आवाज जहां तक पहुंचती है। वहां तक की हवा शुद्ध और उर्जावान हो जाती है। 1928 में बर्लिन यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध से यह बात पता चली। कि शंख की ध्वनि से हवा में मौजूद कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। यहां तक कि शंख में रखे हुए पानी से भी वातावरण शुद्ध बनता है। इसीलिए पूजा के बाद पुजारी शंख से पानी छिड़ककर शुद्धिकरण की प्रक्रिया अपनाते हैं। शंख की भस्म आयुर्वेद में एक बहुत विशेष औषधि का काम करती ह इससे जांडिस पेट की बीमारियों और किडनी या गॉल ब्लैडर के स्टोन की समस्याओं में भी राहत मिलती है।

 

 

उपालि अपराजिता

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