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फिर से आतंकवादी हमला! क्या गुरदासपुर से ‘गुरूमंत्र’ सिखेगा भारत?

फिर से आतंकवादी हमला! क्या गुरदासपुर से ‘गुरूमंत्र’ सिखेगा भारत?

पाकिस्तान इस समय बड़े आराम की स्थिति में है, क्योंकि उसे अमेरिका से आर्थिक सहायता, रशिया से अस्त्र और शस्त्र व चीन से साजो-सामान की प्राप्ति हो रही है। जोकि पूर्णरूप से सशस्त्र तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा गुरदासपुर के पुलिस स्टेशन में हुए आतंकी हमले में दिखी, इससे अलग इन्होंने अपने लक्ष्ति क्षेत्र को बढ़ाने का संकेत दिया। एक सेवानिवृत्त मेजर जरनल अफसिर करीम ने कहा कि पाकिस्तान के जरनल इस बात से काफी परेशान है कि जम्मू-कशमीर में इतने हमले करने के बाद भी भारत की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही है। वे न केवल संपूर्ण भारत बल्कि यूके और यूएस में जहां बड़ी संख्या में पंजाबी समुदाय के लोग रहते है, में भारत के खिलाफ आवाज उठाने में सफल नहीं हो पा रहे है।

गुरदासपुर में पाकिस्तान जनरल तीन बातों का प्रयास कर रहे हैं। पहला अपनी आतंकी सेना का विस्तार करना, जिसमें वे इसे जम्मू से पठानकोट सेक्टर तक फैलाने में सफल भी हो गए है। पाकिस्तानी जनरलों का मानना है कि भारतीय सेना जितनी अपनी शक्ति आतंकवाद के प्रति गुप्त योजना बनाने में लगाएगी उतना ही उसके सैनिकों को ट्रेनिंग के लिए कम समय मिलेगा।

एक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल कहते हैं। कि पाकिस्तानी आतंवादियों द्वारा पंजाब में हमला करने का मुख्य कारण है कि जिससे भारतीय इंटेलीजेंस एजेंसी द्वारा पंजाब में सुरक्षा क्षेत्र का विस्तार किया जाए और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का सारा ध्यान जम्मू-कशमीर से हट जाए। तीसरा, इससे भारतीय सेना को एक मनोवैज्ञानिक संदेश जाता है कि पाकिस्तान के अंदर समय की नजाकतता को देखते हुए हमला करने की क्षमता है, उसमें स्थान और समय को चुनकर अपने लक्ष्य के चुनाव की भरपूर क्षमता है। हमारे पुलिस जवानों की निकली हुई तोंद और अत्यधिक वजन के साथ शस्त्र पकड़े होना भी एक कारण है, उनका आतंकवादियों से कमजोर होने का, जिस वजह से अधिक क्षति होती है। पंजाब में पुलिस की पिछले 20 सालों से कई समस्याएं है। यहां अलगाववादी आतंकवादियों की लीडरशीप का आस्तित्व आज भी पाकिस्तान में मौजूद है। देखा जा सकता है कि हमारे पुलिसकर्मियों में चपलता का अभाव है, जो आतंकी हमलों से जुझने के लिए तैयार नहीं है।


बदलती रणनीति


15-08-2015गुरदासपुर में हुआ आतंकी हमला आशातीत था, क्योंकि इससे पहले भी पाकिस्तान हाई प्रोफाइल वार्ता से पहलेआतंकवादी हमले कर चुका है। यह हमला कारगिल विजय दिवस के अगले ही दिन हुआ। कुछ ही घंटे पहले भारत ने कारगिल विजय दिवस का जश्र मनाया था, ऐसे में सीमा पार और सीमा पर आक्रोश होना स्वभाविक ही है। आक्रोश में पाकिस्तान मुर्खतापूर्ण हरकतें करता ही है और वैसे भी पाकिस्तान का इतिहास रहा है कि वो बिना सोचे-समझे कार्यवाही करता है। पाकिस्तान के आतंकी एजेंसियों और संगठनों द्वारा गुरदासपुर में किए गए असफल आतंकी हमले भारत को ‘छद्दम युद्ध’ की याद दिलाता है। जम्मू-कशमीर में आतंकवाद लगभग अपने हाशिये पर है, लेकिन इसकी भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि ये वहां एक बार फिर से अपनी पैठ बना सकता है। यहां पर आतंकियों का नया ढ़ांचा हाई-प्रोफाइल गतिविधियों से जूझने के लिए सक्षम नहीं है। उनके स्थानीय कैडर इतने सक्षम नहीं है कि वे कोई हाई-प्रोफाइल हरकत कर सके। उनका कोई प्रभावशाली नेतृत्व नहीं है और सीमा नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ के खिलाफ भारत की कड़ी कार्यवाही की वजह से उनको अपने संख्याबल बढ़ाने में काफी परेशानियां हो रही है। एक क्षेत्र के सकारात्मक काम का दूसरे क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जो रणनीति बनाने के लिए बुनियादी आधार है। 2014 में पाकिस्तान ने अपना गठजोड़ नियंत्रण रेखा से जम्मू-पठानकोट अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थानांतरित करने पर जोर दिया, पाकिस्तान इसे वर्किंग बाउन्ड्री कहता है।

श्रीनगर, अनंतनाग और राजौरी के स्थान पर पाकिस्तान ने कठुआ और सांबा को अपना लक्ष्य बनाया है, क्योंकि यहां घुसना आसान है। इन घने और पूर्णरूप से समन्वित क्षेत्र में घुसना इसलिए आसान है, क्योंकि यहां नियंत्रण रेखा पर किसी भी तरह की बाड़ नहीं है, जो पाकिस्तान के लक्ष्य से मात्र कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नेशनल हाइवे से अंदर घुसना बहुत आसान है, यहां से किसी ट्रक को हाइजैक करके मात्र 10-15 (या और) किलोमीटर की दूरी पर स्कूलों, पुलिस स्टेशन, मिलिट्री कैम्प्स, डिप्टी कमिशनर का ऑफिस आदि कई ऐसी जगह है जिन्हें निशाना बनाया जा सकता है, किसी एक लक्ष्य को निशाना बनाने में चूक होने पर कुछ ही मिन्टों में दूसरे लक्ष्य को निशाना बनाया जा सकता है, नियंत्रण रेखा के विपरित, जहां आर्मी तुरंत कार्यवाही करके सभी संभावित क्षेत्रों को बंद कर देती है। पठानकोट दक्षिण में आतंकवादियों द्वारा अपनी गतिविधियां ले जाने का कारण सेना की 9वीं कोर और पश्चिमी कमान है, जो आतंकवाद के खिलाफ अपनी गतिविधियों को मजबूत कर रही है।

वास्तव में लेफ्टिनेंट जनरल के.जे. सिंह, पश्चिम कमान के जीओसी-इन-सी लगातार जम्मू अंतरर्राष्ट्रीय सीमा का मुआयना कर रहे हैं और अपने कमांडर्स और फौज का हौसला बढ़ा रहे हैं। हालात के सुधरने के बाद पाकिस्तान पंजाब की तरफ ही अपना ध्यान केन्द्रित करेगा। नियंत्रण रेखा से आतंकवादियों के जम्मू-पठानकोट और पंजाब के पश्चिमी क्षेत्रों की तरफ स्थानांतरण का सामरिक कारण नहीं है। इसका कारण है कि सेना की वहां कम उपस्थिति जबकि गुरदासपुर और अमृतसर सेक्टर में सेना तैनात है, यहां अब शांति और प्रशिक्षण का माहौल बना हुआ है।

श्रीनगर बेस्ड 15वीं कोर के पूर्व जनरल कमांडिंग ऑफिसर जो अब विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन से भी जुड़े हुए है द्वारा लिखे लेख के अंश   


बादल के शासन काल में बड़ी संख्या में नशीली दवाओं का सेवन भी मौजूदा प्रशासनिक संकट का कारण बना हुआ है, जोकि एक बहुत बड़े आघात के समान है। पंजाब में कोई भी आतंक के दिनों को याद करने के लिए तैयार नहीं है। जबकि पंजाब सीमा से लगा प्रदेश है और इसके जम्मू-कशमीर के साथ लगे होने का सामरिक महत्व है। ऐसे में ये कहना मुश्किल है कि आतंकवादी जम्मू की तरफ से आए थे या सीमापार से। जनरल अफसिर का कहना है कि अगर आतकंवादी जम्मू क्षेत्र से आए थे, तो इसका मतलब है कि पाकिस्तान ने इस हमले की प्लानिंग जम्मू में की थी, जो इस तरफ इशारा करता है कि पाकिस्तान के जनरल जम्मू प्रांत से आतंकवादी गतिविधियों के लिए जम्मू-कशमीर और पंजाब दोनों जगह से संचालित करेंगे। यहां सीमा पार करना बहुत आसान है। घाटी में सीमा और उसके आस-पास के क्षेत्रों को अच्छी तरह से सील कर दिया गया है और उनकी मुस्तैदी से निगरानी कि जा रही है। इस मुस्तैदी की वजह से घाटी में घुसपैठ करना मुश्किल हो गया है फिर भी जम्मू के अलावा बहुत सी ऐसी जगह हैं जिनके द्वारा पाकिस्तान पंजाब में एक बार फिर खालिस्तान आंदोलन की शुरूआत कर सकता है। एक जनरल ने कहा कि अपने भौगोलिक क्षेत्र में दंगे और आतंक का विस्तार भारत के सुरक्षा समुदाय के लिए चिंताजनक हो सकता है। रेलवे ट्रेक उड़ाने की विफलता हमारी खुशकिस्मती ही रही, लेकिन किस्मत भी हर बार साथ देगी ऐसा सोचना उचित नहीं है।

उफा के बाद, क्या हम इस तरह के प्रहार का इंतजार ही कर रहे थे? अंतरर्राष्ट्रीय सीमा क्षेत्र और नियंत्रण रेखा के आस-पास के हिस्सों में गोलीबारी की गई, जिसे बाद में रोक दिया गया। पहले निम्र स्तर की गतिविधि करना फिर उसके संगीन होने से पहले ही उसे रोक देना हमारे विरोधी की एक उत्कृष्ट चाल थी। यह उनके पिछले पैटर्न से मिलती-जुलती प्रक्रिया है, जिसमें वह हाई प्रोफाइल वार्ता के समय आतंकवादी हमले की प्रक्रिया को तेज कर देते हैं। जम्मू की तरफ से आतंकवादी गतिविधियों का होना चिंता का विषय है। अंतरर्राष्ट्रीय सीमा के अलावा पंजाब और जम्मू-कशमीर की पुलिस को इंटेलीजेंस और बीएसएफ के साथ समायोजित होकर कार्य करना होगा। अंतरर्राष्ट्रीय सीमाबाड़ को जल्द-से-जल्द बेहतर निगरानी के लिए हाई-टेक करना बेहद जरूरी है। कुछ महीनों में पाकिस्तान के साथ होने वाली बातचीत से पहले इस तरह के अन्य प्रयास अपेक्षित है। हालांकि भारत के पास विकल्प बहुत सीमित है।

विजय दत्त

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