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आरोपों मे घिरी वसुंधरा निकाय चुनावों में सरकार का आकलन

आरोपों मे घिरी वसुंधरा निकाय चुनावों में सरकार का आकलन

संसद के मानसून सत्र में पूर्व आई.पी.एल. कमिश्नर ललित मोदी प्रकरण में विपक्ष के निशाने पर रही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पार्टी हाईकमान के समक्ष अपनी जोरदार पैरवी के साथ जिला प्रशासन को चुस्त-दुरूस्त करने की कवायद की है वहीं बीते सप्ताह राजस्थान में राजनीतिक हलचल के बीच सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी एवं प्रमुख प्रतिपक्ष कांग्रेस ने 17 अगस्त को होने वाले अजमेर नगर निगम सहित 129 निकाय चुनाव की अगली खेप के माध्यम से पांचवे शक्ति परीक्षण के लिए कमर कस ली है। इसके नतीजे से पार्टी सरकार के ग्राफ का आकलन होगा।

उधर कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पंजाब से लगते राजस्थान के नहरी क्षेत्र के किसानों से सम्पर्क के लिए पदयात्रा की साथ ही जयपुर में पार्टी पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के सम्मेलन में ललितगेट प्रकरण में वसुंधरा राजे पर आक्रामक हमले किए। वहीं वसुंधरा राजे ने दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मिलकर अपने तथा सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह के बारे में दस्तावेजी सबूत सौंपे ताकि पार्टी मानसून सत्र में विपक्ष के हमले का करारा जवाब दे सके। वसुंधरा ने केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली तथा राजस्थान से निर्वाचित भाजपा सांसदों से मुलाकात की और कांग्रेस पर जवाबी हमले की रणनीति पर चर्चा की।

राहुल गांधी के दौरे के चार दिन बाद ही जयपुर में 22 से 24 जुलाई तक जिला कलेक्टर-एस.पी. द्वारा कॉन्फ्रेस का आयोजन किया गया। पिछले साल की तुलना में इस बार सम्मेलन की अवधि चार दिन रखी गई। प्रशासन को जनता के प्रति संवेदनशील बनाने और जनसमस्याओं के समाधान तथा विकास की गति तेज करने पर सरकार एवं अधिकारियों ने विभिन्न सत्रों में मंथन किया। इस माथापच्ची की बोझिलता के बीच सरकार एवं अधिकारियों ने एक साथ फिल्म बजरंगी भाईजान भी देखी। हालांकि वसुंधरा राजे के अचानक दिल्ली जाने पर मुख्य सचिव सी.एस. राजन के साथ अधिकारियों ने परिवार सहित फिल्म का आनंद लिया।

प्रशासनिक स्तर पर इस वार्षिक कर्मकाण्ड की तैयारियां जोर- शोर से की जाती हैं। जिला कलेक्टरों का रिपोर्ट कार्ड बनता है और प्रजेन्टेशन के बहाने सरकार के सामने अपनी बेहतर छवि प्रस्तुत करने की स्पर्धा रहती है। मार्केटिंग के इस फंडे में अब अफसर भी माहिर हो चुके है और सत्ता में बैठे अपने आकाओं के टेस्ट के हिसाब से प्रजेन्टेशन की रस्म अदायगी करते है। इस प्रकिया में कुछ को शाबाशी मिलती है तो कुछ सरकार के कोपभाजन भी बन जाते है। इस बार शौचालय निर्माण के मामले में स्वयं मुख्यमंत्री वसुंधरा के गृह जिले झालावाड़ के पिछडऩे की बात आयी तो उनकी नाराजगी स्वाभाविक थी। प्रदेश को 2018 तक खुले में शौच से मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। साफ-सफाई तथा जन भागीदारी के मामले में उदयपुर जिले से प्रेरणा लेने की बात कही गई। अपने संबोधन तथा विभिन्न सत्रों में मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों को नसीहत दी कि वे भी उनकी तरह जनता के बीच जायें उनके दुख दर्द सुने। जनप्रतिनिधियों के टेलीफोन तथा पत्रों का उचित जवाब भी दें। कोशिश यह रहे कि स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं का समाधान हो ताकि लोगों को जयपुर तक आने की जेहमत नहीं उठानी पड़े। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाने पर कड़ा ऐतराज जताया और यह दावा किया कि वे सभी लोगों के फोन उठाती हैं और कॉल बैक भी करती है तथा लोगों के पत्रों का जवाब भी देती हैं तो कलेक्टर ऐसा क्यों नहीं कर सकते।

gulabchand-kataria-INVC-NEWSपुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में तो गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के तेवर देखने लायक थे। अपनी साफगोई के लिए चर्चित कटारिया ने इन अधिकारियों की बातें सुनी तो उन्हें जमकर सुनाया भी। मीडिया में आयी खबरों के अनुसार जयपुर कमिश्नर की प्रस्तुति के बाद तल्ख शब्दों में कटारिया ने लम्बित मामलों का उलाहना देते हुए कह दिया कि थाने वाले मनमर्जी करते हुए अपने तरीके से जांच कर रहे है। चोरी व नकबजनी बढ़ रही है तथा चालान, बरामदगी का स्तर गिर रहा है। एक जिले में पुलिस अधिक्षक ने अपने इलाके में जवानों के जातियों में बंटे होने तथा गुर्जर आंदोलन में सूचनाएं लीक होने का मसला उठाया तो गृहमंत्री ने संबंधित जिले को भ्रष्टाचार में अग्रणी बताते हुए कह दिया कि उनके पास सबकी रेटिंग है। इसी चर्चा के दौरान जब मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक से तबादला नीति के बारे में जानना चाहा तो कटारिया तपाक से बोले किस विभाग में है तबादला नीति। गृहमंत्री ने यहां तक कहा कि जयपुर में पुलिस का ध्यान क्राइम कन्ट्रोल पर कम तथा जमीनों के धंधे से जुड़े मामलों पर ज्यादा है। यदि कमिश्नर चाहे तो वे प्रमाण भी दे सकते है। जयपुर में केस पेंडेंसी भी अधिक है। उन्होंने दौसा, अलवर, नागौर तथा गंगानगर जिले में पुलिस परफोर्मेंस पर भी नाराजगी जताई। मुख्यमंत्री ने अपराधों की रोकथाम के लिए हर जिले में सोशल मीडिया सेल बनाने के निर्देष दिए। गृहमंत्री ने अनफिट पुलिस भर्तियों को फील्ड ड्यूटी से दूर रखने और थोड़ी सी मेहनत से क्राइम कंट्रोल से प्रदेश को मॉडल स्टेट बनाने की बात कही। उधर विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने गृहमंत्री के गृह जिले उदयपुर के मावली क्षेत्र में आयोजित एक समारोह में पुलिस की लचर व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस का ढीटपन अब हद पार कर रहा है। उन्होंने गृहमंत्री को अपने गृह क्षेत्र में भी जागरूकता दिखाने की नसीहत दे डाली।

इस सम्मेलन को गुड गवर्नेंस को प्रभावी बनाने के लिहाज से अच्छा माना गया है। सचिवालय में मॉनिटरिंग के लिए बैठे विभागीय शासन सचिवों ने भी पहली बार मुख्यमंत्री एवं जिला कलेक्टरों के समक्ष प्रजेन्टेशन दिया। जिला कलेक्टरों की प्रस्तुति से प्रशासनिक कामकाज को बेहतर बनाने सम्बन्धी मैकेनिज्म के नये फॉर्मूले सामने आये जिनमें वाट्स एप, सेल्फी आदि तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। अब सरकार के स्तर पर अफसरों की परफोर्मेंस का आकलन कर प्रशासनिक फेरबदल किया जाएगा जिसका असर अगस्त माह के आखिर में दिखाई देगा। राज्य में अभी 32 में से 22 जिला कलेक्टर 40 आयु वर्ग के हैं। बांसवाड़ा के जिला कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित तो 28 साल के हैं। 10 कलेक्टरों की आयु 50 से अधिक है। राज्य में 8 महिला कलेक्टर भी हैं।

सम्मेलन की श्रृंखला में जिलों के अनुसार भी बैठके आयोजित की गईं जिनमें प्रभारी मंत्री, शासन सचिव, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक तथा विधायकगण उपस्थित थे। कुछ बैठकों में भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष व अन्य नेता भी पहुंच गये। कांग्रेस विधायकों ने इसकी निंदा करते हुए यह भी आरोप लगाया कि उन्हें ऐसी बैठकों के आयोजन की सूचना नहीं दी गई। प्रभारी मंत्रियों की उपस्थिति में जिला बैठकों से मुख्यमंत्री के विरोधी गुट में समझे जाने वाले वरिष्ठ भाजपा विधायक घनश्याम तिवारी, नरपत सिंह राजवी और राव राजेन्द्र सिंह ने अपने को दूर रखा। जयपुर में प्रभारी मंत्री कालीचरण सराफ की बैठक में मंदिर तोड़े जाने संबंधी मुद्दे पर चर्चा तक नहीं हुई। सड़कों पर विरोध करने वाले भाजपा विधायकों ने चुप्पी साधे रखी जबकि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ समर्थित मंदिर बचाओं समिति ने आठ सूत्री मांगपत्र के लिए सरकार को 31 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया है।

आखिरी दिन मुख्यमंत्री ने भरतपुर, बीकानेर और उदयपुर संभाग के अधिकारियों की बैठक में सरकार आपके द्वार कार्यक्रम तथा इस दौरान प्राप्त जनशिकायतों के निस्तारण के संबंध में समीक्षा की। विधायकों ने बिजली समस्या को गंभीरता से उठाया और अपनी वेदना व्यक्त करते हुए कहा कि बिजली आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों को लेकर उन्हें कई मर्तबा अपने मोबाइल स्विच ऑफ रखने पड़ते हैं। मुख्यमंत्री ने बिजली कंपनियों पर 80 हजार करोड़ रूपये से अधिक कर्जे का जिक्र करते हुए बिजली चोरी रोकने को कहा। राज्य में 16 अगस्त से विद्युतीकरण शिविर तथा बिजली चौपालों का आयोजन किया जा रहा है। वसुंधरा राजे ने शासन सत्ता संभालने के बाद फरवरी 2014 में भरतपुर संभाग मुख्यालय से इस अभियान की शुरूआत की थी। समूचे मंत्रिमंडल एवं मुख्य सचिव सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने दूरदराज गांवों में जनसुनवाई की थी। बीकानेर तथा उदयपुर संभाग में भी इसे दोहराया गया और अब कोटा संभाग में अगस्त माह में यह अभियान चलेगा। तीनों संभागों की समीक्षा में बताया गया कि 74 फीसदी मामलों का निस्तारण हो पाया है तथा 24 फीसदी प्रकरण अभी भी लम्बित है। इस मामले में चित्तौडग़ढ़ में बेहतर काम हुआ है तथा करौली, प्रतापगढ़ में अधिक शिकायतें लम्बित हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों, कर्मचारियों को कार्यालय में समय पर आने-जाने तथा जनता की समस्याओं के समाधान में रूचि लेने की हिदायत दी। गौरतलब है कि वसुंधरा राजे के प्रथम शासनकाल में सरकारी कार्यालयों में पांच दिन कार्यदिवस का नियम लागू किया था। उन्होंने ‘न्याय आपके द्वार अभियान’ की सराहना करते हुए कहा कि इससे सालों से लम्बित नामांतरण खातेदारी इत्यादि मामले सुलझाये गए। इन प्रकरणों को यदि समय पर निपटाया जाता तो अभियान चलाने की आवश्यकता नहीं होती। मुख्यमंत्री ने भरतपुर जिला स्तर पर विधायकों तथा अधिकारियों की उपस्थिति में जनसमस्याओं के समाधान मॉडल को प्रदेश स्तर पर लागू करके हर माह के तीसरे गुरूवार को जिला कलेक्टर द्वारा जनसुनवाई करने के निर्देष दिए। इससे पहले रोटेशन के स्तर पर उपखण्ड या ब्लॉक स्तर पर सुनवाई की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री का यह मानना है कि जिला कलेक्टर सरकार का चेहरा है। कलेक्टरों के अच्छे काम तथा नवाचार राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर डालने से इसका विस्तार होगा। वसुंधरा राजे ने दूसरी बार शासन सत्ता संभालते ही 8 जनवरी 2014 को कलेक्टर/एस.पी स्तर की कान्फ्रेंस बुलाई। तब जिला कलेक्टर को एक-एक बालिका गोद लेकर उसके लालन-पालन तथा शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने को कहा गया। इस बार ‘आपणी बेटी’ कार्यक्रम में शिक्षा एवं खेल क्षेत्र से एक-एक बेटी को गोद लेने के निर्देष दिए गये है। इसी तरह एक गांव को गोद लेकर आदर्श गांव बनाने, बेसहारा बच्चों की देखभाल, बिजली, पानी, सड़क, साफ-सफाई, शिक्षा, चिकित्सा की व्यवस्था सुधारने संबंधित निर्देष कागजों में सिमिट कर रह गए है। इसी तरह पुलिस क्षेत्र में हर जिले तथा रेंज मुख्यालय पर साइबर सैल की स्थापना पर भी सवालिया निशान लगे हुए हैं।

राजस्थान पंचायतराज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के लिए शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता को लागू करने की पहल के साथ अब स्थानीय निकायों में भी पार्षद के दसवीं पास होने तथा घर में शौचालय की बाध्यता होगी। इस बारे में जारी अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर स्थगनादेष देने से मना करते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय की खण्डपीठ ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है कि चुनाव लडऩा कानूनी या संवैधानिक बाध्यता हो सकती है लेकिन यह मूलभूत अधिकार नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिस प्रकार राज्य सरकार जनप्रतिनिधियों की योग्यता का निर्धारण कर रही है वह अयोग्यता भी निर्धारित कर सकती है राजस्थान की यह पहल तथा उच्च न्यायालय की टिप्पणी देश में चुनाव सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। उधर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा बाड़मेर, भरतपुर के अलावा 31 जिलों में 129 स्थानीय निकायों के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। मतदान 17 अगस्त को होगा और 20 अगस्त को मतगणना होगी। अगले दिन अध्यक्ष का निर्वाचन किया जायेगा। उधर राज्य के विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में 22 अगस्त को छात्रसंघ चुनाव होने हैं। देखना यह है कि स्थानीय निकाय चुनावों का छात्र राजनीति पर क्या असर होता है। कांग्रेस ने निकाय प्रतिनिधियों के लिए शैक्षणिक योग्यता लागू किए जाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाये जाने की बात कही थी।

प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की पहली बैठक 26 जुलाई को आयोजित की गई। सुबह प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने जिला अध्यक्षों की बैठक बुलाई। भाजपा के प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने कार्यकर्ताओं का मान -सम्मान बनाए रखने और राजनीतिक नियुक्तियां शीघ्र करने का फरमान दोहराया। लेकिन, मुख्यमंत्री का कहना था कि सत्ता की लालबत्ती के मोह से ऊपर उठकर संगठन को महत्व दें। लालबत्ती बहुत सीमित है और सभी को इसे समझना चाहिए। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने आर्थिक संकटों से जूझता हुआ राजस्थान सौंपा है जिसे पटरी पर लाना चुनौती था अब प्रदेश ने विकास की रफ्तार पकड़ी है। नवम्बर में रिसर्जेंट राजस्थान से निवेश एवं रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। उधर निकाय चुनाव की आचार संहिता के चलते राजनीतिक नियुक्तियां अगस्त माह तक टल गईं हैं। कार्यसमिति की बैठक में संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौर द्वारा प्रस्तुत और सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री डॉ. अरूण चतुर्वेदी द्वारा अनुमोदित राजनैतिक प्रस्ताव पारित किया गया। आर्थिक प्रस्ताव स्वायत्त शासन मंत्री राजपाल सिंह शेखावत ने रखा तथा राज्य वित्त आयोग की अध्यक्ष डॉ. ज्योति किरण ने इसका अनुमोदन किया। राजनैतिक प्रस्ताव में कांग्रेस पर तीखे प्रहार करते हुए कांग्रेस को भ्रष्टाचार एवं माफिया संस्कृति को बढ़ावा देने वाला तथा भाजपा नेताओं पर लगाए गये कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद बताया गया। आर्थिक प्रस्ताव में रिसर्जेंट राजस्थान तथा कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं की जानकारी देते हुए यह दावा किया गया कि सरकार ने लगभग 53 हजार नियुक्तियां कर दीं हैं तथा करीब 90 हजार भर्तियां की जा रही हैं। निकाय चुनाव की रणनीति के साथ केन्द्र स्तर पर पार्टी के महाजनसम्पर्क अभियान, बेटी बचाओं बेटी पढाओं, प्रशिक्षण वर्ग, पार्टी के जिला कार्यालयों के निर्माण तथा आजीवन सहयोग निधि पर भी चर्चा हुई।

जयपुर से गुलाब बत्रा

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