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इमरान खान की हत्या की साज़िश और पाकिस्तान की सेना

इमरान खान की हत्या की साज़िश और पाकिस्तान की सेना

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर एक रैली के दौरान चंद दिनों पहले हमला हुआ। बताया जा रहा है कि गोली उनके पैर में लगी और सौभाग्य से वे बच गए। लेकिन उनकी पार्टी का एक कार्यकर्ता इस हमले में मारा गया तथा सात और नेता भी घायल हो गए। इमरान खान इन दिनों मौजूदा सरकार को हटाकर फ़ौरन चुनाव कराने के लिए लांग मार्च पर निकले हुए हैं। गोली चलने की ये घटना वज़ीराबाद में हुई जो पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में पड़ता है। दिलचस्प बात ये है कि इस प्रान्त में इमरान की पार्टी पीटीआई की ही सरकार है। वहाँ की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रांतीय सरकार की ही है।

हमलावर को स्थानीय पुलिस ने पकड़ लिया है। हमलावर के शुरुआती बयान के अनुसार उसने खुद ये हमला किया है क्योंकि वो ये समझता था कि अपनी रैलियों में डीजे बजाने जैसा गैर इस्लामी काम करके इमरान खान देश को गर्त में ले जा रहे थे। इस लांग मार्च के दौरान इमरान खान सीधे-सीधे नाम लेकर पाकिस्तानी सेना के मौजूदा सेनाध्यक्ष जरनल बाजवा व अन्य जनरलों पर निशाना साध रहे थे। इस देश में ये पहली बार हो रहा है कि कोई राजनीतिक पार्टी इस तरह सेना के नेतृत्व को खुलेआम निशाना बनाये।

सब जानते हैं कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री कोई भी हो, देश को वहां का सेनाध्यक्ष और मुख्य जनरल ही चलाते है। इमरान खान भी 2018 में सेना की मदद से ही प्रधानमंत्री बने थे। शुरू में तो सेना के साथ इमरान के सम्बन्ध ठीक रहे लेकिन बाद में दोनों की बनी नहीं। देश की विदेश नीति, डगमगाती अर्थव्यवस्था और ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख की नियुक्ति को लेकर सेनाध्यक्ष जनरल बाजवा और इमरान के बीच विवाद हो गया। ये मतभेद इतने गहरे थे कि पिछले अप्रैल में अविश्वास प्रस्ताव के बाद इमरान को गद्दी छोड़नी पड़ गयी।

उसके बाद विपक्षी दलों की साझा सरकार नवाज़ शरीफ के छोटे भाई शहवाज शरीफ के नेतृत्व में बनी। दिलचस्प बात है कि नवाज़ शरीफ को भी अदालत के ज़रिये चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया गया था। इसके लिए भी जानकार सेना के नेतृत्व और जरनल बाजवा को ही जिम्मेदार मानते हैं। नवाज़ शरीफ इन दिनों लन्दन में एक तरह से निर्वासन में हैं।

अप्रैल में गद्दी से हटाए जाने से पहले इमरान ने सार्वजनिक घोषणा की थी कि वे अगर प्रधानमंत्री नहीं रहे तो वे ‘बहुत खतरनाक’ हो जायेंगे और सबकी पोल खोल कर रख देंगे। उन्होंने ऐसा ही किया और वे सड़कों पर उतर आये। सार्वजनिक सभाओं में उन्होंने सेना के मौजूदा नेतृत्व को मीर जाफ़र, जानवर, चौकीदार और गद्दार और न जाने कितनी और गालियाँ दी हैं। ऐसा वे तकरीबन हर रैली में कर रहे हैं। जरनल बाजवा की तरफ से उन्हें समझाने और कोई समझौता करने की कोशिश भी की गई।  परन्तु इमरान अपनी ज़िद पर अड़े हुए हैं कि मौजूदा सरकार की फ़ौरन बर्खास्तगी होकर नए चुनाव हों। साथ ही वे ये भी चाहते हैं कि नया सेनाध्यक्ष वे ही नियुक्त करें। जरनल बाजवा इसी महीने रिटायर होने वाले हैं।

जरनल बाजवा और इमरान खान के बीच तलवारें इतनी खिंच गयी है कि पिछले हफ्ते पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख जर्नल नदीम अंजुम और सेना के प्रवक्ता जरनल बाबर इफ्तिखार ने बाकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इमरान खान की बातों का खंडन किया। पाकिस्तान के इतिहास में ये पहली बार हुआ जबकि आईएसआई के मुखिया ने इस तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस की हो। जानकार कहते है कि पाकिस्तान के किसी नेता ने सेना के खिलाफ ऐसी आक्रामकता नहीं दिखाई कि अपने बचाव के लिए इस तरह ख़ुफ़िया एजेंसी को सामने आना पड़ा हो।

इससे पहले पाकिस्तान के इमरान समर्थक एक टीवी एंकर पत्रकार अशरफ शरीफ की 23 अक्टूबर को कीनिया में हत्या कर दी गई थी। इमरान की पार्टी के लोगों ने  इसका आरोप आईएसआई पर ही लगाया था। इस खूनखराबे और राजनीतिक अस्थिरता के बीच पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। देश के पास अपना कर्जा चुकाने के लिए पैसे नहीं है। देश में मासिक महंगाई की दर 26 प्रतिशत से ऊपर है। लोगों को रोज़मर्रा की चीजें नहीं मिल पा रहीं। पाकिस्तान की सरकार कभी विश्व बैंक, कभी सऊदी अरब, कभी अमेरिका, कभी संयुक्त अरब अमीरात तो कभी चीन के आगे कटोरा लिए खड़े नज़र आते है। प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ इन दिनों भी चीन की यात्रा पर हैं। वहां वे मिन्नतें कर रहे हैं कि उन्हें कर्ज़ अदायगी में ढील दी जाए।

इस बीच दुनिया और भारत के लिए बेहद खतरनाक खबर है कि पाकिस्तान चुपके चुपके यूक्रेन को परमाणु बम तकनीक बेचने की कोशिश में हैं। रूसी सीनेट की रक्षा मामलों के कमेटी के सदस्य इगोर मोरोज़ोव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया है कि इसके लिए यूक्रेन के विशेषज्ञ पाकिस्तान गए थे। हालांकि पाकिस्तान ने इसका खंडन किया है। पर पाकिस्तान की माली हालत ऐसी है कि वह पैसे के लिए कुछ भी कर सकता है। पहले भी पाकिस्तानी वैज्ञानिक ऐसा करते हुए पकड़े गए हैं। कुल मिलाकर कहा जाए तो पाकिस्तान में कुछ भी हो सकता है।

अब इमरान खान पर हमले के बाद पाकिस्तान की पहले से ही डगमगाई राजनीति और तेजी से नीचे जा रही अर्थव्यवस्था में एक नया तूफ़ान आ सकता है। वैसे इमरान खान ने अब आरोप लगा दिया है कि इस हमले के पीछे प्रधान मंत्री शाहबाज़ शरीफ, गृहमंत्री राना सनाउल्लाह और सेना के मेजर जरनल फैसल हैं। उन्होंने इन तीनों की फ़ौरन बर्खास्तगी की मांग की है। जरनल बाजवा के लिए ऐसा करना तकरीबन नामुमकिन होगा। सेना के नेतृत्व में दरार की ख़बरों के बीच एक मेजर जरनल को हटाने के गलत संकेत जायेंगे।

एक बार और ध्यान देने की है कि पाकिस्तान के कई टिप्पणीकारों की मानें तो पिछले दिनों इमरान के लांग मार्च में अपेक्षा से कम भीड़ आ रही थी। इस लिहाज से ये हमला उनके लिए राजनीतिक रूप से प्राणदायक हो सकता है।अब उनके प्रति सहानभूति जताने के लिए और भीड़ बाहर निकलेगी। इस हादसे के बाद उनकी पार्टी ने पूरे देश में कड़े विरोध प्रदर्शन का एलान किया है।  पहले से ही खून खराबे से लहूलुहान पाकिस्तान के लिए आने वाले दिन बेहद मुश्किल वाले है। वहां और अधिक खून खराबे और गृहयुद्ध की आशंका अब बढ़ गयी है।

 

उमेश उपाध्याय

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