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हाई वोल्टेज साइबर दुनिया

हाई वोल्टेज साइबर दुनिया

भारत दो परमाणु शक्तियों से घिरा है जिनके साथ उसके संबंध हमेशा युद्ध की छाया से घिरे रहते हैं। भीतरी हालात भी इस्लामी आतंकवाद, माओवादी और नक्सलवादी हिंसा तथा उत्तर-पूर्वांचल के विद्रोही संगठनों के कारण प्राय: अशांत रहते हैं। ऐसे संवेदनशील वातावरण में भी भारत साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बहुत पीछे तथा अपने नागरिकों की निजता की रक्षा करने में नितांत उपेक्षा के व्यवहार वाला देश है। इसलिए यदि यह कहा जाए कि देश के शीर्षस्थ नेताओं से लेकर सामान्य नागरिक तक की ई-मेल, वित्तीय स्थिति और व्यक्तिगत खर्च का हिसाब, बातचीत तथा संदेश कोई देख रहा है और सुन रहा है तो यह कोई आश्चर्य का विषय नहीं होना चाहिए।

जी-मेल, याहू, सोशल मीडिया पर फेसबुक तथा ट्विटर और मास्टर कार्ड, वीसा जैसे क्रेडिट और डेबिट कार्ड के जरिए होने वाला समस्त कार्य व हम सबकी बहुत सी महत्वपूर्ण और गोपनीय सूचनाएं हमारे कम्प्यूटरों पर और खासकर हम जिस मेल व्यवस्था का इस्तेमाल करते हैं, उसके डाटा बैंक में लगातार इकट्ठा होता रहता है। व्यस्तता और लापरवाही के कारण तथा साइबर सुरक्षा तकनीक की जानकारी न होने के कारण इस बात की चिंता नहीं की जाती कि उस व्यक्तिगत डाटा को किसी दूसरे के हाथ में न आने देने के लिए क्या उपाय किए जाएं। नतीजतन हमारी सारी निजी सूचनाएं सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध हो सकती है और कोई भी साइबर कंपनी उसका हमारी इजाजत के बिना जायज-नाजायज इस्तेमाल कर सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एन. एस. ए.) के भारत सहित विश्व के सभी प्रमुख देशों के खिलाफ व्यापक इलेक्ट्रोनिक जासूसी के जाल का उसके भूतपूर्व कर्मचारी एडवर्ड स्नोडन द्वारा भांडाफोड़ किये जाने के बाद से दुनिया भर की सरकारें साइबर सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने लगी हैं। ‘टाइम्स ऑफ इण्डिया’ दैनिक के अनुसार इस क्षेत्र में भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन की भी सक्रियता बढ़ी है। खबर है कि गृह मंत्रालय से प्राप्त खुफिया जानकारी के आधार पर भारत के रक्षा मंत्रालय ने 12 मार्च को जारी किये गए अपने निर्देश में देश की सशस्त्र सेनाओं और रक्षा संगठनों को गोपनीय और संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा के फौरी उपाय करने और सतर्कता के साथ 21वीं सदी के इस गंभीर खतरे का सामना करने की मांग की है।

एक अनाम अधिकारी के हवाले से दैनिक ने बताया की साइबर जासूस पेन ड्राइव, रिमूवेबल हार्ड डिस्क या एक मामूली सीडी के जरिये मजबूत से मजबूत नेटवर्क में घुस कर आराम से घर बैठे सारी जरूरी जानकारी को जमा कर लेते हैं। यही नहीं वे नेटवर्क सेंट्रिक सेना के संचालन को जाम करके उसे निष्क्रिय तक बनाने में समर्थ हैं।

अब तक के सबसे बड़े सर्वज्ञात साइबर हमले को पांच साल पहले ईरान भुगत चुका है जब कहा जाता है कि इजराइल और अमेरिका द्वारा बनाये गए Stuxnet ‘वर्म सॉफ्टवेयर’ ने उसके परमाणु कार्यक्रम को ठप्प कर दिया था।

सारी दुनिया के उन्नत देश साइबर हमलों का मुकाबला करने के लिए दिन-रात प्रयास कर रहे हैं क्योंकि उनसे न केवल सैनिक, बल्कि बिजलीघरों, रेल यातायात आदि के काम को भी अस्त-व्यस्त किया जा सकता है। भारत में जहां सेना के तीनों अंगों की संयुक्त साइबर कमान की स्थापना का प्रस्ताव अभी भी अधर में लटका है वहीं चीन ने 30 हजार की संख्या वाली कंप्यूटर मिलिशिया के साथ एक जोड़ी हैकर ब्रिगेडों का गठन कर डाला है।

15-08-2015

साइबर आतंकवाद के बारे में बात करते हुए अक्सर लोग इसकी बड़ी संकीर्ण व्याख्या करते हैं। अक्सर इसे आतंकी संगठनों की ऐसी कार्रवाइयों के साथ जोड़ा जाता है, जिनमें खतरा और दहशत पैदा करने के इरादे से सूचना तंत्र को दुष्प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। लेकिन, इस संकीर्ण व्याख्या से साइबर आतंकवाद को परिभाषित करना बेहद मुश्किल है। साइबर आतंकवाद को और सामान्य एवं विस्तृत तरीके से समझा जा सकता है। इसे ऐसे समझा जाये की जैसे किसी सामाजिक, धार्मिक, सैद्धांतिक, राजनीतिक या अन्य उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कंप्यूटर या कंप्यूटर तंत्र को बाधित करना या ऐसा करने की जानबूझकर की गई कोशिश जिसका उद्देश्य लोगों को डराना-धमकाना या अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति करना हो सकता है।

कंप्यूटरों और वेब पेजों को हैक करने के हाल के दिनों में बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर अधिकांश साइबर विशेषज्ञों की यही राय है कि हम आतंकवाद के एक नए एवं अनोखे चेहरे से मुखातिब हैं और इससे निपटने के लिए हमें हर तरीके से तैयार हो जाना चाहिए। एक समाज के रूप में आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए हमारे पास तमाम संसाधन मौजूद है। हमारे पास कानून का अनुभव है और श्रेष्ठ प्रौद्योगिकी है, लेकिन क्या हम साइबर दुनिया से उपजे आतंकवाद से लोहा लेने के लिए तैयार हैं? किसी भी तरह की जबाबी कार्रवाई की रणनीति बनाते समय दुश्मन के लक्ष्यों, उसके काम करने के तरीके, संसाधनों और अंजाम देने वाले लोगों के बारे में जानकारी आवश्यक है। तो आइये जानते हैं साइबर दुनिया के अपराधों के विषय में :-

साइबर अपराधों को मुख्यत: दो श्रेणी में बांटा जा सकता है

  • पहला, जहां कंप्यूटर या सर्वर लक्ष्य है।
  • दूसरा, जहां कंप्यूटर का प्रयोग अपराध करने के लिये किया जाता है पर उनका लक्ष्य कंप्यूटर या सर्वर नहीं होता है।

हांलाकि इन श्रेणियों की सीमायें ठीक प्रकार से परिभाषित नहीं हैं। कुछ अपराध एक से अधिक श्रेणी में भी रखे जा सकते हैं।

चलिए अब चर्चा करते हैं पहली श्रेणी के अपराधों के बारे में।

डिनायल ऑफ सर्विस

अलग अलग वेबसाइटें, अलग तरह की सेवायें देती हैं। यदि उस वेबसाइट पर बहुत सारी ई-मेल भेज दी जाए या हिट होने लगें, तब उसका कानूनन प्रयोग करने वाले, उसकी सेवायें नहीं ले पाते हैं। वह बंद हो जाती है। इसे डिनायल आफ सर्विस कहते हैं।

वायरस

कम्यूटर में वायरस दूषित पेन ड्राइव, या फ्लॉपी या सीडी लगाने से आ सकते हैं। यह किसी ई-मेल से भी मिल सकते हैं। यह आपके कंप्यूटर के डाटा को समाप्त कर सकता है। इसके लिए किसी भी ई-मेल के साथ लगे संलग्नक को मत खोलिये, यदि वह किसी आपके जानने वाले व्यक्ति ने न भेजा हो।

वेबसाइट हैकिंग और डाटा की चोरी

कंप्यूटर डाटा भी कॉपीराइट की तरह सुरक्षित होता है। बहुत से कंप्यूटरों, वेबसाइटों में डाटा गुप्त, या निजी, या फिर गोपनीय होता है। वेबसाइट या कंप्यूटर को हैक कर इसे कॉपी या नष्ट करना, इसी श्रेणी में आता है।

साइबर अपराध, जिनका लक्ष्य कंप्यूटर नहीं होता है

बहुत से साइबर अपराध, कंप्यूटर का प्रयोग करके किये जाते हैं पर उनका लक्ष्य कंप्यूटर या सर्वर नहीं होता है। इस तरह के अपराधों को मुख्यत: निम्न श्रेणी में बांटा जा सकता है।

साइबर आतंकवाद

साइबर गतिविधियों के द्वारा धार्मिक, राजनैतिक उन्माद पैदा करना साइबर आतंकवाद के अन्दर आता है। यह किसी भी देश की आंतरिक सुरक्षा को समाप्त कर सकता है।

आर्थिक अपराध

इस समय अधिकतर बैंकों का काम इंटरनेट पर हो रहा है। व्यापार भी इंटरनेट पर हो रहा है। क्रेडिट कार्ड से गलत तरह से पैसा निकाल लेना, ऑनलाइन व्यापार या बैकिंग में धोखाधड़ी करना- यह सब आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है।

फिशिंग

अक्सर कुछ ऐसे ईमेल मिलते है जिससे प्रतीत होता है कि वे किसी बैंक से या किसी अन्य संस्था की बेबसाइट से हैं। यह आपके बैंक के खाते या अन्य व्यक्तिगत सूचना पूछने का प्रयत्न करते हैं। ये सारी ई-मेल फर्जी हैं और यह आपकी व्यक्तिगत सूचना को जानकर कुछ गड़बड़ी पैदा कर सकती है। इसे फिशिंग कहा जाता है। इस तरह की ई-मेल का जवाब न दें।

15-08-2015

साइबर छल

अक्सर ई-मेल, एसएमएस मिलते है कि भेजने वाली विधवा है जिसके पति का बहुत सारा पैसा फंसा हुआ है और वह पैसा निकालने में आपकी सहायता चाहती है। इस तरह के भी ई-मेल या एसएमएस आते हैं कि आपके ई-मेल या फोन नम्बर ने करोड़ों की लॉटरी जीत ली है, जिसे पाने के लिए सम्पर्क करें। यह सब फर्जी होता है। यह धोखाधड़ी कर, आपको फंसाना चाहते हैं। यह साइबर अपराध है और इस पर कभी भी अमल नहीं करना चाहिए।

साइबर जासूसी

इसे एडवेयर या स्पाईवेयर भी कहा जाता है। आपके कंप्यूटर में कभी आपकी अनुमति से और कभी बिना अनुमति के यह आपके कंप्यूटर में स्थापित हो जाते हैं, साथ ही आपकी गतिविधियों की आपकी व्यक्तिगत सूचना एकत्र कर, अन्य को दे देतें है जिसके द्वारा वे स्थापित किये जाते हैं। यह हमेशा आपके कंप्यूटर को धीमा भी कर देतें हैं।

पहचान की चोरी

किसी व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति की पहचान चोरी करना या उसके इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर को हैक करना या किसी अन्य के नाम से फर्जी काम करना, पहचान की चोरी कहलाता है। अपने पासवर्ड में नम्बर तथा वर्णमाला दोनों का प्रयोग करें। उसे बदलते रहें। किसी को न बतायें।

स्पैम

स्पैम माने अनचाही ई-मेल। यह भी साइबर अपराध है। हिन्दी चिट्ठाजगत में, यह काफी पॉपुलर है। अक्सर चिट्ठाकार बन्धु आपको अपनी चिट्ठी भेज कर उनकी चिट्ठियों को पढऩे के लिये कहते हैं। यह गलत है। आप इस तरह की ईमेल तभी किसी व्यक्ति को भेजें जब उस व्यक्ति से आप उस चिट्ठी में कुछ करने के लिये कहते हैं या उसके बारे में लिखते हैं। यह न केवल इंटरनेट शिष्टाचार के विरुद्ध है पर साइबर अपराध भी है।

स्पिम

यदि स्पैम अनचाहे ई-मेल है तो स्पिम इंटरनेट पर बातों के दौरान अनचाही बातें। इंटरनेट पर पीछा करना पीछा करना, तंग करना, इस हद तक घूरना कि दूसरा खीज जाये, डर जाय। यही काम जब इंटरनेट पर हो तो साइबर स्टॉकिंग कहलाता है।

अश्लीलता

अश्लील ई-मेल, अशलील चित्र, चित्रों को बदल कर किसी अन्य का चित्र लगा देना, यह सब अश्लीलता के अन्दर आता है। इस तरह के साइबर अपराध सबसे अधिक हैं। अश्लील साहित्य, अश्लील प्रदर्शन सहित अश्लील सामग्री के प्रसार और बाल-अश्लीलतायुक्त साहित्य, आज का एक सबसे महत्वपूर्ण साइबर अपराध हैं। मानवता के लिए इस तरह के एक अपराध की संभावित हानि को दुर्लक्षित करना कठिन है। यह ऐसा साइबर अपराध है जो यदि नियंत्रित नहीं किया गया तो युवा पीढ़ी पर, अपूर्णीय और चोट के स्वरूप में युवा पीढ़ी के विकास को प्रभावित करेगा। अभी पिछले साल चीन ने साइबर दुनिया में फैले अश्लीलता को हटाने के लिए लगभग एक अरब अश्लील पोस्टों को हटाने की मुहीम चालू की और उसमें सफलता भी पायी।

साइबर उत्पीडऩ

साइबर उत्पीडऩ एक विशिष्ट साइबर अपराध है। साइबर स्पेस में या साइबर स्पेस के प्रयोग के माध्यम से, उत्पीडऩ के विभिन्न प्रकार होते और हो सकते हैं। उत्पीडऩ धार्मिक, जातीय या सेक्सुअल स्वरूप में किया जा सकता है। लोगों का इस प्रकार उत्पीडऩ करने वाले भी साइबर अपराध के दोषी हैं। साइबर उत्पीडऩ के रूप में नागरिकों की गोपनीयता का उल्लंघन भी साइबर अपराध से संबंधित एक और क्षेत्र में हमें लाता है। नेटिजन्स (नेट पर बैठने वाले सिटिजन) की गोपनीयता का ऑनलाइन उल्लंघन एक गंभीर प्रकृति का साइबर अपराध है। कोई भी किसी अन्य व्यक्ति को स्वयं की गोपनीयता और अत्यंत भावुक एवं महत्वपूर्ण क्षेत्र पर आक्रमण को पसंद नहीं करता है जो कि इंटरनेट के माध्यम से मिला हुआ अनुदान है।

साइबर कानून विशेषज्ञों की बढ़ती मांग

साइबर लॉ, कानून की दुनिया में तेजी से उभरती विधा है, जिसके तहत डिजिटल व मोबाइल दुनिया से जुड़ी गतिविधियों के कानूनी पक्षों पर काम करना होता है। साइबर वकील इलेक्ट्रॉनिक फॉरमेट, ऑनलाइन कॉन्ट्रेक्ट व साइबर अपराध से जुड़े मुद्दों के कानूनी पक्षों पर राय देते हैं। मुवक्किल को सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, डोमेन नेम विवाद व साइबर दुनिया में बौद्धिक संपदा अधिकार से जुड़े मुद्दों पर कानूनी सलाह देने का काम भी साइबर लॉ विशेषज्ञों का होता है। डाटा सुरक्षा व उसकी निजता से जुड़े मामले भी साइबर लॉ विशेषज्ञों के जिम्मे होते हैं। वे या तो कानूनी पेशेवर के तौर पर प्रेक्टिस करते हैं या किसी कंपनी में बतौर इनहाउस काउन्सल काम करते हैं। इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण जिस तेजी से हैकिंग व मनी ट्रांसफर से जुड़े अपराध बढ़ रहे हैं, उससे करियर के तौर पर साइबर लॉ का महत्व बढ़ रहा है। साइबर लॉ के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक कंप्यूटर व नई तकनीक के इस्तेमाल में दक्ष होने चाहिए, साथ ही अपने क्षेत्र में विकास की नई जानकारियों से भी अपडेट रहना उनके लिए जरूरी है।

साइबर क्राइम एक बढ़ती वैश्विक समस्या है, जिसे कठोर कदम उठाकर रोकना ही होगा। प्रौधोगिकी के आगमन से साइबर क्राइम और खासकर महिलाओं का उत्पीडऩ उच्च सीमा पर हैं और इस प्रकार साइबर क्राइम किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। हालांकि भारत उन बहुत थोड़े देशों में से एक है जिसने साइबर अपराधों से निपटने के लिए आईटी अधिनियम 2000 को अमल में लाया है, लेकिन इस अधिनियम में महिलाओं से संबंधित मुद्दे अभी भी अछूते ही रहे हैं। इस अधिनियम के तहत कुछ अपराधों जैसे हैकिंग, नेट पर अश्लील सामग्रियों का प्रकाशन और डेटा के साथ छेड़छाड़ को दण्डनीय अपराध घोषित कर दिया है। लेकिन सामान्य तौर पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरों को इस अधिनियम में पूरी तरह से कवर नहीं किया गया है। खैर जो भी सच्चाई हो पर वर्तमान सरकार ने देश के मामले में साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कुछ ठोस कदम जरूर उठाये हैं। सर्वविदित है कि जासूसी करने वाले सॉफ्टवेर प्राय: इलेक्ट्रोनिक मेल के जरिये कंप्यूटरों में घुसपैठ करके अपना नियंत्रण कर लेते हैं। गत 18 फरवरी को जारी किये गए एक आदेश के द्वारा सरकारी मुलाजिमों को जी-मेल, याहू, होट-मेल जैसी सभी प्राइवेट ई-मेल सेवाओं के उपयोग की कड़ी मनाही कर दी गयी है, इसके बदले वे सिर्फ नेशनल इन्फोर्मेटिक्स सेंटर (NIC) द्वारा प्रदान की जाने वाली ई-मेल सेवा का ही सरकारी कामकाज के लिए उपयोग कर सकेंगे। इसके अलावा वे अपने सरकारी एकाउंट से अपने निजी एकाउंट में कोई भी जानकारी नहीं भेज सकेंगे। यही नहीं, NIC इस प्रकार की जानकारी और डाटा को ब्लॉक कर देगा। इसके अलावा, साइबर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘ऑटो सेव पासवर्ड’ जैसी सुविधाएं भी नहीं दी जाएंगी। हमें यह ध्यान रखना होगा की साइबर दुनिया हमारी एक साझा विरासत है, जिसे हमने अपने जीवन काल में बढ़ती प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से पाया है और अगर हमें यह वीरासत अपनी आने वाली पीढ़ी तक पहुंचानी है, तो इसे अपराध मुक्त रखना हम सभी की साझी जिम्मेदारी है।

नीलाभ कृष्ण

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