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गुजरात में एक बार फिर चौंकाएगा पीएम मोदी का जादू

गुजरात में एक बार फिर चौंकाएगा पीएम मोदी का जादू

 

 

 

 

दीपक कुमार रथ
(editor@udayindia.in)

गुजरात विधानसभा चुनाव की गहमागहमी जारी  है। भाजपा, कांग्रेस और आप तीनों मतदाताओं को लुभाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। भाजपा का यह गढ़ सत्ता विरोधी रुझान का सामना तो कर रहा है। लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इसका फायदा उठाने में नाकाम है। क्योंकि गांधी परिवार के वफादार अहमद पटेल ने गुजरात में कांग्रेस का जो सांगठनिक ढांचा तैयार किया था, वह अब बिखर चुका है। हालांकि कांग्रेस ने पिछली बार 41.5 फीसदी वोट लेकर बड़ी सफलता हासिल की थी. जो कि भाजपा को मिले 49.1 प्रतिशत वोट से थोड़ा ही कम था। लेकिन भाजपा ने साल 2017 में 99 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस 79 पर सिमट गई थी। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं की पिछले चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा के सामने कड़ी चुनौती पेश की थी और उसे डबल डिजिट पर समेट दिया था। लेकिन इस बार कांग्रेस पहले ही उम्मीदें गंवा चुकी है, क्योंकि उसने इस बार के चुनाव में ताकत लगाई ही नहीं है। गुजरात के ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं ने, जिन्होंने पहले कांग्रेस को वोट दिया था, उनमें भी कांग्रेस को लेकर कोई जोश दिखाई नहीं दे रहा है। हार्दिक पटेल जैसे चर्चित नेता द्वारा पार्टी छोड़ने से भी कांग्रेस की किरकिरी हुई है। अब कांग्रेस को अनाम से अपने वयोवृद्ध अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भरोसे है। हालांकि यह उम्मीद की जा रही थी कि गांधी खानदान के चश्मोचिराग राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत गुजरात से करेंगे। लेकिन उनके सलाहकारों और रिसर्च टीम ने शायद उन्हें समझाने में सफलता हासिल कर ली, कि गुजरात में कांग्रेस के लिए कुछ बचा नहीं है.. क्योंकि वहां अहमद पटेल जैसे रणनीतिकार के निधन के बाद नेतृत्व करने वाला कोई बचा ही नहीं है।

गुजरात जैसे राज्य में चुनाव जीतने के लिए किसी भी राजनीतिक दल को विश्वसनीय और दमदार चेहरे की जरुरत है, सिर्फ राष्ट्रीय नेतृत्व के भरोसे राज्य का चुनाव जीतना मुश्किल है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दलित, जनजातीय और वंचित तबकों के उत्थान के लिए शुरु की गई योजनाओं वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने अच्छी तरह अंजाम तक पहुंचाया है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के सभी तबकों के विकास के लिए योजनाएं चलाकर कांग्रेस को रणनीतिक रुप से बेहद पीछे छोड़ दिया है।

वास्तविकता में देखें तो गुजरात अब विश्वस्तरीय निर्माण योजनाओं, बढ़ती अर्थव्यवस्था और मजबूत कानून और व्यवस्था के कारण विकसित भारत का प्रतीक बन चुका है। गुजरात को उसके तेल शोधक इंडस्ट्री, रिफायनरी, अच्छे बंदरगाहों, ट्रांसपोर्ट हब, बुलेट ट्रेन, आयुर्वेद का केन्द्र, वस्त्र उद्योग और हीरा उद्योग के कारण पहले ही जाना जाता रहा है। यहां सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टरों में नौकरी की अपार संभावनाएं हैं। हालांकि यहां पर यह भी तर्क दिया जाता है कि विकास की राजनीति करके चुनाव में जीत हासिल करना बेहद मुश्किल है, जैसे साल 2004 में अच्छा शासन देने के बावजूद स्व.अटल बिहारी वाजपेयी चुनाव हार गए थे।  यह एक बात है जो कि गुजरात चुनाव में सत्ता विरोधी रुझान की वजह से कांग्रेस के पक्ष में जाती है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गुजरात में कांग्रेस इस हालत में भी नहीं है कि चुनाव में मुकाबला भी कर पाए। लेकिन उनका यह भी मानना है कि कांग्रेस पार्टी अपने परंपरागत वोट बैंक को हासिल करने में सफल रहेगी। गुजरात चुनाव कवर करने वाले कुछ पत्रकार यह भी खबर फैला रहे हैं कि राज्य में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय है। आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस की कमजोरी का फायदा उठाकर एक अस्थायी सांगठनिक ढांचा खड़ा करने में सफलता हासिल कर ली है और उसके वोट बैंक पर भी डाका डाल रही है।

भाजपा के परंपरागत विरोधी रहे तबकों ने केजरीवाल की पार्टी को हाथोंहाथ लिया है, जिससे कि उन्हें नरेन्द्र मोदी के मुकाबले खड़ा किया जा सके। लेकिन पंजाब की तरह गुजरात में आम आदमी पार्टी अपना आधार जमा नहीं पाई है। लेकिन केजरीवाल ने अपनी पार्टी को अखिल भारतीय स्वरुप में देने में सफलता जरुर हासिल कर ली है। स्वस्थ लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना जरुरी है।

भाजपा में अंदरुनी तौर पर टिकट वितरण के दौरान कुछ नाराजगी दिखाई दी। कुछ भाजपा सदस्य जो इस बार फिर टिकट हासिल करने में सफल नहीं हो पाए, वह चुनाव में गड़बड़ी की कोशिश करेंगे। लेकिन मतदाताओं पर इसका ज्यादा प्रभाव पड़ता हुआ दिखाई नहीं देता। हर चुनाव के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास अपनी अलग रणनीति होती है। इस बार भी मोदी ने कुछ अलोकप्रिय विधायकों का टिकट काट दिया है। लेकिन मोदी इस तरह का खतरा उठा सकते हैं। क्योंकि गुजरात में उनका सिक्का चलता है। हमने देखा है कि हिमाचल प्रदेश में भी वहां के मतदाता मोदी के दीवाने दिखाई देते हैं। प्रधानमंत्री की लोकप्रियता भारत ही नहीं विदेश तक लगातार फैलती दिख रही है। अच्छा प्रशासन देने के लिए पीएम मोदी रोजाना 18 घंटे काम करते हैं। उनका कोई निजी स्वार्थ नहीं है। मोदी जैसे नेता चंद दिनों या महीनों में तैयार नहीं हो पाते हैं। बल्कि इस तरह का व्यक्तित्व हर तरह के संघर्ष से जूझते हुए तैयार होता है। सुयोग्य नेतृत्व और पार्टी के मजबूत संगठन ने मोदी को एक सफल प्रधानमंत्री बनाया है। मुझे पूरा भरोसा है कि उनका चमत्कारी नेतृत्व गुजरात में भाजपा को 120 से कम सीटें नहीं दिलाएगा।

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