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गुजरात की बाज़ी नरेंद्र मोदी के हाथ में

गुजरात की बाज़ी नरेंद्र मोदी के हाथ में

गुजरात की विधान सभा का चुनाव दो चरण में होने जा रहा है। पहला चरण १ दिसम्बर को होगा और दूसरा चरण ५ दिसम्बर को, चुनाव परिणाम हिमाचल प्रदेश के साथ ही यानि ८ दिसम्बर को घोषित होंगे। १८२ विधान सभा सीट वाले राज्य में अभी तक बीजेपी और कांग्रेस का ही मुकाबला होता आया है लेकिन इस बार के चुनाव में आम आदमी पार्टी का पंजाब में चुनाव जीतने के बाद हौसला बढ़ गया है और अरविन्द केजरीवाल ने दावे के साथ कहा है कि उसकी पार्टी का मुकाबला सीधा बीजेपी के साथ है।

पिछले २७ साल से बीजेपी का गुजरात में एकचक्रीय शासन रहा है। नरेंद्र मोदी ने जब से गुजरात की कमान संभाली है तब से चुनाव उसी के चेहरे से जीता जाता है। गुजरात में विकास के साथ-साथ हिंदुत्व कार्ड भी चुनाव जीतने में एक बड़ा रोल निभाता रहा है।  इसी वजह से तो अरविन्द केजरीवाल ने अपने आप को सेक्युलर मानने वाला नेता कहकर इंडियन करेंसी में गणेश और लक्ष्मी जी की तस्वीर लगाने की बात कही।

१९९५ से पहले की बात करे तो कांग्रेस KHAM (क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम) थ्योरी पर चुनाव लड़ती थी और जीत भी जाती थी। बीजेपी हिंदुत्व के आधार पर चुनाव लड़ती है और गोधरा कांड के बाद गुजरात में बीजेपी को हराना मुश्किल नहीं लेकिन नामुमकिन हो गया था। नरेंद्र मोदी का २०१४ में प्रधानमंत्री बनने के बाद तीन मुख्यमंत्री आये जिसमे आनंदीबेन पटेल, विजय रुपानी और भूपेंद्र पटेल। नरेंद्र मोदी की तुलना में ये तीनो मुख्यमंत्री अभी तक कुछ खास प्रभाव छोड़ नहीं पाए है।

बीजेपी और नरेंद्र मोदी किस मुद्दे पर चुनाव जीतने की कोशिश करेंगे? मोदी के लिए गुजरात विधान सभा का चुनाव जितना एक प्रतिष्ठा का सवाल है। यदि गत २०१७ के  चुनाव पर नज़र डाले तो बीजेपी की स्थिति अच्छी नहीं कह सकते। क्योंकि बीजेपी ९९ बैठक पर जीती थी और कांग्रेस ७७ पर।  यदि वोट  प्रतिशत के  हिसाब से देखे तो बीजेपी को ४९.५ प्रतिशत  वोट मिले थे जबकि कांग्रेस को ४१.४४  प्रतिशत। इसलिए बहुत ही कम मार्जिन के साथ बीजेपी सत्ता में आई थी।  गुजरात में ऐसी काफी बैठक थी जिसमे २०१७ में बीजेपी और कांग्रेस के कैंडिडेट ५००० से लेकर १००० से भी कम वोटो से जीते थे।

इस बार बीजेपी और  कांग्रेस के साथ आम आदमी पार्टी भी जोर-शोर से मैदान में  कूद गई है। अरविंद केजरीवाल तो गुजराती भाषा में वीडियो बनाने लगे है और स्वयं को गुजरातियों का भाई कहने लगे है।  लेकिन दोनों पार्टी के पास कोई  लोकल चहेरा  नहीं  है,  वैसे तो बीजेपी  के पास भी नहीं है, मोदी का जादू भी पहले जैसा नहीं रहा, लेकिन फिर भी उनका प्रभाव और प्रभुत्व दोनों है, इसलिए गुजरात में बीजेपी सरकर बना लेगी ऐसा १० में से ८ लोग कह रहे है।

पिछले २७ सालों से गुजरात में बीजेपी का शासन रहा है और सरकार के सामने काफी नाराजगी भी है। मोरबी पुल का टूटना और १३५  लोगो की जान गंवाने को भी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी काफी भुनाएगी।

गुजरात के चुनाव की जातिगत राजनीति की बात करे तो महत्वपूर्ण पाटीदार बिरादरी को साधने के लिए बीजेपी ने हार्दिक पटेल को  अपने खेमे में शामिल कर लिया है, जिससे माना जा रहा है कि पाटीदार पटेलों का वोट बीजेपी को जा सकता है, लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है काफी पाटीदार  इस बार नाराज भी है।   नितिन पटेल जैसे काफी पटेल है जिसकी टिकिट कट सकती है और वो चुप नहीं बैठेंगे।

राज्य में कुल OBC ५२ प्रतिशत है, वही क्षत्रिय ६ प्रतिशत, पाटीदार १६, दलित ७, आदिवासी ११ और मुस्लिम आबादी ९ प्रतिशत है, और ब्राह्मण, बनिया और अन्य जाति  को मिलाकर ५ प्रतिशत मतदाता है।

बीजेपी पाटीदार और OBC वोटो पर जोर देगी जब की कांग्रेस अभी भी आदिवासी और गाँवो के मतदाताओं पर उम्मीद रखती है और उसको वोट भी मिलता हे। मुस्लिम की वोट भी कांग्रेस को मिल सकते है। जबकि आम आदमी पार्टी ३०० यूनिट तक मुफ्त  बिजली के साथ १००० रुपयों का महिला अलाउंस और ३००० रुपये बेरोजगार भत्ता देने का वादा कर रही है।

बीजेपी के लिए गुजरात को  हिंदुत्व की लेबोरटरी कहा जाता है, लेकिन इस बार चुनाव जितना इतना सरल नहीं होगा। बेरोजगारी और बढ़ती हुए महंगाई भी एक बड़ा मुद्दा है। बीजेपी विकास और हिंदुत्व के नाम पर कितनी सीट ले जाती है, वो देखना है।

अभी तो चुनाव में, और परिणाम आने में काफी समय है लेकिन अंदाजन बीजेपी १०० से ११० बैठक पर, कांग्रेस ५० के आसपास और आम आदमी पार्टी ८ से १० बैठक पर चुनाव जीत सकती है।

बीजेपी के लिए इस बार का चुनाव जितना इतना आसान नहीं होगा पर सरकार बना लेगी। गुजरात में बीजेपी की इज्जत मोदी के हाथ में है।

गीता दवे, अहमदाबाद

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