ब्रेकिंग न्यूज़ 

नमस्कार का चमत्कार

नमस्कार का चमत्कार

पूरे विश्व में भारत एक ऐसा देश है। जिसकी संस्कृति और सभ्यता को सबसे अनोखा माना जाता है और भारत की पहचान है, उसकी नमस्कार की मुद्रा। दुनिया में जहां कहीं भी भारतीय होते हैं, वह आपस में मिलने पर नमस्कार से ही एक दूसरे का अभिवादन करते हैं। इसीलिए भारतीय अपने नमस्कार शब्द और मुद्रा के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। कोरोना काल में पूरी दुनिया ने भारत के नमस्कार की परंपरा को अपनाया था। क्योंकि उस समय दो गज की दूरी सबके लिए जरुरी थी और हाथ मिलाने से सबको डर लगता था। इसलिए उस समय तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन ने पूरी दुनिया से नमस्कार अपनाने की अपील भी की थी। नमस्कार, हिंदुओं का एक दूसरे के प्रति अथवा किसी बड़े के प्रति अभिवादन दर्शाने की प्रक्रिया है। नमस्कार के माध्यम से एक आत्मा दूसरी आत्मा के प्रति आभार प्रकट करती है। नमस्कार करने वाला व्यक्ति नम्र भाव में दिखाई देता है। वहीं जिसे नमस्कार किया जाता है, उसके मन में हमारे लिए सद्भावना जागृत होती है। नमस्कार का अर्थ है-हमारे अंदर दूसरों के प्रति सद्भाव है। दूसरों के प्रति सम्मान का भाव रखना अपने आप में बड़ी बात है। किसी को नमस्कार करने से दूसरों की सम्मान वृद्धि होने के साथ-साथ हमारा अहंकार भी नष्ट होता है। इसके साथ ही हमारा सम्मान भी बढ़ जाता है। नमस्कार तीन प्रकार से किया जाता है- 1. साधारण नमस्कार 2.अर्द्ध नमस्कार 3.भूमिष्ठ नमस्कार।

साधारण नमस्कार हम रोजमर्रा के जीवन में अपने से किसी बड़े व्यक्ति से मुलाकात होने पर करते हैं। नमस्कार करने की सही मुद्रा में हम अपने दोनों हाथों को जोड़कर अनाहत चक्र पर रखते हैं,जो कि दोनों सीने के मध्य में होता है। हाथों को हृदय के पास लाने से दैवी प्रेम का प्रवाह होता है। इसके साथ ही सिर को झुकाकर आंखों को बंद किया जाता है। इसका अर्थ है कि आप हृदय में रहने वाले परमात्मा के आगे समर्पित हो रहे हैं। इसका वैज्ञानिक पक्ष देखा जाए, तो उस समय दोनों हथेलियों को दबाकर जोड़ने से हृदय चक्र और आज्ञा चक्र सक्रिय हो जाते हैं। उसके द्वारा मन शांत हो जाता है और चेहरे पर खुशी आती है। हमारे हाथों के तंतु मस्तिष्क से जुड़े रहते हैं। यूं कहें तो हमारे पूरे शरीर के एक्यूप्रेशर प्वाइंट हमारे हाथों में होते हैं। नमस्कार की मुद्रा में अपने दोनों हाथ दबाने से मस्तिष्क अधिक सक्रिय होता है। हमारी स्मरण शक्ति बढ़ जाती है। दिन में हम जितनी अधिक बार हाथ जोड़कर नमस्कार करते हैं, वह हमारे अपने मस्तिष्क के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होता है। जब हम किसी भी व्यक्ति से मिलते हैं और वह हाथ जोड़कर नमस्कार करते हैं, तो ऐसे व्यक्ति हमारे दिमाग को अधिक समय तक याद रहते हैं। इन दिनों हम नमस्कार को अलग अलग तरीकों से करते हैं-जैसे कोई सिर्फ एक हाथ से नमस्कार करता है, तो कोई सिर्फ सिर को झुकाकर नमस्कार करता है। इसे अर्द्ध नमस्कार कहते हैं। लेकिन असली नमस्कार दोनों हाथों को जोड़कर उसे सीने से लगाकर किया जाता है।

हमारे दोनों हाथों में एक हाथ में धनात्मक चार्ज होता है, दूसरे में ऋणात्मक चार्ज होता है। दोनों हाथों को जोड़ने से हमारी शारीरिक विद्युत उर्जा का प्रवाह सही तरीके से होता है। अब बात भूमिष्ठ नमस्कार या पद नमस्कार के बारे में। आम तौर पर बड़े बुजुर्गों से मुलाकात करने पर पैर छूकर प्रणाम किया जाता है, जिसे पद नमस्कार कहते हैं। वहीं किसी देव मंदिर में पूरी तरह पेट के बल लेटकर प्रणाम करने को भूमिष्ठ या दंडवत प्रणाम कहते हैं। यह शरीर के लिए बेहद लाभदायक होता है, क्योंकि इससे शरीर के समस्त चक्र भूमि को स्पर्श करते हैं। यही नहीं दंडवत प्रणाम करने से पूरे शरीर का एक्सरसाइज भी हो जाता है।

तो यह थे नमस्कार के फायदे, आइए हम और आप संकल्प लेते हैं कि आज से जब भी हम किसी से मुलाकात करेंगे, तो उसे नियम के अनुसार अच्छी तरह नमस्कार करेंगे। जिससे दोनों व्यक्तियों को फायदा हो।

 

#

उपालि अपराजिता

Leave a Reply

Your email address will not be published.