ब्रेकिंग न्यूज़ 

G-20: एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य

G-20: एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य

 

 

 

 

दीपक कुमार रथ
(editor@udayindia.in)

आखिरकार बाली में हुए जी-20 सम्मेलन के बाद भारत को इस प्रतिष्ठित समूह की अध्यक्षता प्राप्त हो गई। इसके बाद वैश्विक स्तर पर भारत की छवि मजबूत हुई है। दिसंबर महीने की पहली तारीख से जी-20 के अध्यक्ष के तौर पर भारत ने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्य रणनीतिकार के तौर पर अपने कंधों पर दुनिया को आगे ले जाने की जिम्मेदारी उठा ली है। उदय इंडिया भारत के विश्वगुरु के रुप में आगे बढ़ने के हर चरण को बारीकी से प्रदर्शित कर रहा है। अब वक्त आ गया है कि भारत द्वारा इस ऐतिहासिक चरण को पार करने का जश्न मनाया जाए। हर एक सच्चा भारतीय अपने प्यारे देश को आगे बढ़ता हुआ देखकर प्रसन्न हैं। क्योंकि देश आर्थिक रुप से उत्तरोत्तर प्रगति कर रहा है, सकल घरेलू उत्पाद में बढ़ोत्तरी हो रही है और सबसे महत्वपूर्ण  बात तो यह है कि हमने आर्थिक शक्ति के तौर पर ब्रिटेन को भी पीछे छोड़ दिया है। जी-20 के अध्यक्ष के तौर पर भारत की जिम्मेदारी वास्तव में बहुत बड़ी है। क्योंकि यही 20 देश वैश्विक जीडीपी का 85 फीसदी, विश्व व्यापार का 78 प्रतिशत, 90 फीसदी पेटेंट और दो तिहाई जनसंख्या को धारण करते हैं। हालांकि कहा तो यह भी जा सकता है कि भारत के लिए यह गंभीर परीक्षा की भी घड़ी है, क्योंकि पूरी दुनिया भू-राजनैतिक संकटों से घिरी हुई है। जैसा हम वाकिफ हैं कि इस समय दुनिया के 70 देश ऋण संकट से जूझ रहे हैं और कोरोना महामारी के बाद 20 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे चले गए हैं। संसार जलवायु परिवर्तन की समस्या से भी जूझ रहा है, जिसे नियंत्रित करने के लिए बड़े कदम उठाए जाने की जरुरत है। अब बदलाव की चाभी प्रधानमंत्री मोदी के हाथ में हैं, जिन्हें अपनी चमत्कारी नेतृत्व क्षमता को फिर से साबित करना होगा।

पूरी दुनिया उम्मीद भरी नजरों से भारत की तरफ देख रही है कि कैसे नरेन्द्र मोदी दुनिया में शांति, समृद्धि लाने के लिए रणनीति तैयार करते हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को फिर से गति प्रदान करने के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को पुनर्जीवित करते हैं। नरेन्द्र मोदी के सामने चुनौती तो वास्तव में बहुत बड़ी है, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि उन्हें  जीवन की हर चुनौती को अवसर में बदलने में महारत हासिल है। साल 2014 में जब मोदी ने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली थी, तब देश के लोग लगभग हर क्षेत्र में असुरक्षित महसूस कर रहे थे। लेकिन उन्होंने देशवासियों का भरोसा जीतने में ज्यादा समय नहीं लगाया। मेक इन इंडिया, लोकल फॉर वोकल, स्वच्छ भारत अभियान जैसे उपायों के जरिए उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और स्वास्थ्य सेवा को दुरुस्त कर दिया।

अब यह बात किसी से छिपी हुई नहीं है कि नरेन्द्र मोदी खुद को मिले हुए अवसरों से फायदा उठाने के लिए निर्णायक फैसले लेने वाले साहसी नेता हैं, जिनके हाथ में अब जी-20 की कमान है।

अब उन्हें दुनिया में वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और तकनीकी प्रगति को सबके पास पहुंचाने के लिए जरुरी सुधार करने आवश्यकता है। हमें खाद्यान्नों, उर्वरक और ईंधन के आयात निर्यात में आई बाधा को दूर करने की जरुरत है क्योंकि यूरोपीय देशों में युद्ध का माहौल है। चीन के साथ भारत के संबंध अच्छे नहीं है और अमेरिका साथ भी चीन का जुबानी युद्ध जारी है। ऐसे में भारत को सबसे पहले दुनिया के देशों के बीच की गुटबंदी को खत्म करना होगा।

नरेन्द्र मोदी ने अपने 17 पूर्ववर्ती जी-20 के अध्यक्षों द्वारा लिए गए फैसलों की सराहना की है और उनका फायदा उठाते हुए आगे बढ़ने का संकल्प लिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा है कि  क्या हम मानवता के लाभ हेतु मूलभूत मानसिकता में बदलाव कर सकते हैं? मुझे यकीन है कि हम ऐसा कर सकते हैं। मोदी ने आगे कहा कि कुछ लोग ऐसा तर्क देते हैं कि आपसी मतभेद और लालच मनुष्य के स्वभाव में शामिल है, लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता। अगर मनुष्य स्वाभाविक रुप से स्वार्थी होता तो दुनिया भर में अलग-अलग तरह की इतनी आध्यात्मिक परंपराओं की शुरुआत कैसे होती। जो कि सभी में एक ही मूल तत्व को देखने की वकालत करते हैं। ऐसी ही एक आध्यात्मिक परंपरा, जो कि भारत में लोकप्रिय है, उसमें बताया गया है कि दुनिया की सभी सजीव और निर्जीव वस्तुएं पांच मूलभूत तत्वों से निर्मित हैं- धरती, आकाश, अग्नि, जल और अंतरिक्ष। हमारे अंदर और हमारे बीच इन पांचो तत्वों का संतुलन, हमारे भौतिक, सामाजिक और पर्यावरणीय कल्याण के लिए आवश्यक है। भारत को जी-20 की अध्यक्षता प्राप्त होने के बाद हम इस सार्वभौमिक एकता को बढ़ावा देने का काम करेंगे।  हमारी थीम है- एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य। वास्तव में हमारे प्रधानमंत्री ने दुनिया भर के देशों को यह संदेश दिया है कि वह टकराव का रास्ता छोड़कर अपने अस्तित्व को बचाए रखने और मूलभूत मानवीय जरुरतों को पूरा करने के लिए एक साथ आएं। युद्ध कभी भी किसी अंतरराष्ट्रीय समस्या का समाधान नहीं रहा है और ना ही वर्तमान समय में भी यह किसी तरह का समाधान प्रस्तुत कर सकता है। युद्ध की बजाए पूरी दुनिया को आतंकवाद का खात्मा करने, पर्यावरण की सुरक्षा करने और कोरोना महामारी के बाद की परिस्थितियों  का सामना करने पर ध्यान देना चाहिए। उम्मीद है कि जी-20 संगठन के सदस्य देश भारत की सार्वभौमिक एकता के विचार को स्वीकार करेंगे और दुनिया को शांतिपूर्ण बनाने का संदेश फैलाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published.