ब्रेकिंग न्यूज़ 

शिक्षा, संस्कृति, पर्यावरण के लिए हरियाणा सरकार का गंभीर प्रयास

शिक्षा, संस्कृति, पर्यावरण के  लिए हरियाणा सरकार का गंभीर प्रयास

उदय इंडिया- हम आपसे यह जानना चाहते है कि एक जमाना था, जब हरियाणा राज्य शिक्षा के क्षेत्र में बहुत पीछे था। लेकिन मनोहर लाल खट्टर के  मुख्यमंत्री बनने के बाद प्राइमरी एजुकेशन, सेकेंडरी एजुकेशन, इन्फ्रास्ट्रक्चर  डेवलपमेंट के लिए क्या बड़े कदम उठाए गए है?

कंवरपाल सिंह, मंत्री, हरियाणा- मुझे जिम्मेवारी मिलने के बाद मैने बच्चों की क्वालिटी एजुकेशन पर इस काफी जोर दिया। अपने कार्यकाल में विद्यार्थियों को काफी अच्छी शिक्षा दी। जब मुझे जिम्मेदारी मिली,  उससे पहले हरियाणा में 60 प्रशित बच्चों का रूझान प्राइवेट स्कूलों की तरफ था और 40 प्रतिशत बच्चों का रूझान सरकारी स्कूलों की तरफ। हमारे प्रयास से इस प्रतिशत को सुधारा गया और बच्चों का रुझान प्राइवेट की तरफ से कम करके सरकारी स्कूलों की तरफ रूझान बढ़ाया। अब हरियाणा के बच्चों का प्राइवेट और सरकारी शिक्षण का प्रतिशत 50-50 हो गया है। हमने सरकारी स्कूलों के लिए एक स्कीम लांच की।  जिसमें स्कूलों को कहा गया क आपको किसी भी वस्तु तथा सामग्री की आवश्यकता हो तो वह हम आप लिखित में भेजो और उसके कार्य के लिए जो पैसे खर्चा होता है। तो उसमें हम 1 लाख रूपये से लेकर 25 लाख तक सीधा पैसा स्कूल मैनेजमेन्ट कमिटी को भेज देंगे। जिसके बाद स्कूल मैनेजमेन्ट कमिटी अपने आप स्कूल से जुड़ी हुई समस्याओं का निवारण करवाएगी।  चाहे वह समस्या स्कूल के रास्ते से जुड़ी हो या स्कूल की चारदीवारी, शौचालय, पीने का पानी, स्कूल की छत से जुड़ी हो।  इन कार्यों के लिए हमने सीधा पैसा एसएमसी को दे दिया। हमने हर जिले में एक एजुकेशन ब्लॉक लिया है। मुझे लगता है कि इसके परिणाम बहुत अच्छे रहेगे।

इसके अलावा हमने हायर एजुकेशन यानी कि कॉलेज के स्तर पर कार्य किया। हमारी सरकार बनने के बाद हमें यह महसूस हुआ कि कहीं कॉलेज ज्यादा थे कहीं कम थे। माननीय मुख्यमंत्री जी ने  घोषणा की 20 किलोमीटर के दायरे में कॉलेज खोले जाएंगे। जिससे बच्चों को दूर पढ़ने नहीं जाना पड़े। इस घोषणा के बाद अब हमने 71 कॉलेज खोले है। हमारे कार्यकाल से पहले हरियाणा में कॉलेजों की संख्या 105 थी। हमने अपने छोटे से यानी की 8 वर्ष के कार्यकाल में 71 कॉलेजों का उद्घाटन किया।

अगर बात संस्कृत मॉडल के स्कूलों की हो तो हमारे जिले में ऐसा एक स्कूल था।  हमने निर्णय  लिया कि ऐसे स्कूलों की संख्या बढ़नी चाहिए और हमने लोगों के रूझान को देखतु हुए उसको सीबीएसई से मान्यता दिला दी। ताकि उसमें किसी के साथ पक्षपात न हो।  जितने भी एजुकेशन ब्लॉक है उसमें सभी ब्लॉको में एक-एक स्कूल दिया। आने वाले समय में 500 स्कूल और खोलने का निर्णय लिया गया है। उससे स्कूलो की संख्या और बढ़ेगी। नई एजुकेशन पॉलिसी जिस प्रकार से आई है ओर उसे भी हम 2025 तक पूरा करेंगे। उस पॉलिसी में उनका पूरा जोर रहा है कि 3 साल के बच्चे का दिमाग विकसित हो जाता है। इसके लिए हमने कई स्कूल छोटे बच्चो के लिए शुरु कर दिए है।

इसके साथ ही हमारा बहुत ही अच्छा प्रयोग सुपर 100 भी है। जिसमें सरकारी स्कूल के बच्चे जिनके नम्बर 80 प्रतिशत से ऊपर है। ऐसे बच्चों को हम चुनते है और उनको पांच दिन की कोचिंग देते है और फिर कोचिग देने के बार दोबारा उनका टेस्ट लेते हैं। उस टेस्ट में जो 100 बच्चे टॉपर होते है। उनको चुनते है। जिसके बाद उन्हें सरकार की तरफ से हॉस्टल, खाना-पीना, कोचिंग आदि देते है। जब हमने इसकी शुरुआत की तो उसमें 26 बच्चे आईआईटी में गए। अगली बार उसमें 29 बच्चे आईआईटी में गए। अबकी बार 41 बच्चे आईआईटी में गए है और मेडिकल का रिजल्ट आना अभी बाकी है।  उसका परिणाम भी पता चल जाएगा।

इस सफलता से उत्साहित होकर हमने अब उसे सुपर 600 बना दिया है। जिसमें कि 400 बच्चों को हम सीधे-सीधे कोचिंग देंगे। उसमें से 200 बच्चों को हम ऑनलाइन कोचिंग देंगे। आने वाले समय में रिजल्ट और अच्छा रहेगा ताकि उनकी बुनियाद मजबूत हो। हमने 9वीं क्लास के बच्चों का टेस्ट लेंगे। सेलेक्ट होंगे उसको सप्ताह में 3 दिन 3 बार उनको कोचिंग देंगे । ताकि उसको प्रतियोगिता परीक्षा पास करने की दिशा में पढ़ने के लिए उनको लाभ मिले।  हमने बच्चों को टेबलेट देने का निर्णय लिया है।  मुझे लगा है जितने टैबलेट हमने हरियाणा में बच्चों को शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए दिए हैं,  शायद ही उतने टेबलेट देश में किसी अन्य राज्य सरकार ने बच्चों को दिए होंगे।  हमने 7 लाख टेबलेट देने के निर्णय लिया है, जिसमें से 550000(साढ़े पांच लाख) टेबलेट बच्चों को उपलब्ध करवा दिया।  इसके साथ ही बच्चों की 2GB डाटा भी फ्री में दिया है, जिससे कि वह फ्री डाटा के जरिए पढ़ाई कर सकें।  यहां तक कि जो सबसे बड़ी समस्या थी अभी तक वही टीचरों की कमी थी।  हमने टीचरों की भी कमी को देखते हुए, हमने भर्ती प्रक्रिया शुरु की।  हम लगभग 12 हजार रेगुलर शिक्षकों की भर्ती कर रहे हैं। इसके अलावा 8000 टीचर हम कौशल विकास के माध्यम से ले रहे हैं।  जब 20 हजार टीचरों की भर्ती पूरी हो जाएगी तो शिक्षा के क्षेत्र में हरियाणा का विकास अच्छी तरह होगा।

उदय इंडिया-  हरियाणा एक ऐसा राज्य है, जहां से सबसे ज्यादा खिलाड़ी स्पोर्ट्स में जाते हैं। आपने अपने स्कूल में ऐसा क्या प्रबंधन कर रखा है, जहां बच्चों का मन पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी लगे?

कंवरपाल सिंह, मंत्री, हरियाणा- हमने खेल मंत्रालय के साथ बातचीत करके स्कूल में स्पोर्ट्स को प्रोत्साहन देने का प्रयास किया है। बच्चे  क्लास 6 से ही खेल में भाग लें और उनका उत्साह बढ़ सके, इसके लिए कार्य शुरू कर दिया है। जिस प्रकार से ट्रेनिंग दी जा रही है,  उसमें हरियाणा से सबसे अधिक बच्चे स्पोर्ट्स में जा रहे हैं। इस मामले में हमारा रिकॉर्ड सबसे अच्छा है।

जहां तक की स्मार्ट क्लासरूम की बात है, उसके लिए हमने 302 करोड रुपए खर्च किए हैं।  इसका काम भी अभी प्रगति में है।  काफी बड़ी संख्या में स्मार्ट क्लासरूम,  स्मार्ट बोर्ड आदि जो भी आधुनिक शिक्षा से जुड़ी हुई बच्चों की जरूरतें हैं, हम उनको पूरा कर रहे हैं।  आने वाले 2 साल में हम काफी हद तक आधुनिक शिक्षा के जुड़ी सभी सामग्री लाकर स्कूलों के क्लास रूम को कंप्लीट कर लेंगे। यह मैं दावे के साथ कह सकता हूं।

उदय इंडिया- आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए क्या रणनीति तैयार की गई है? जमीनी स्तर पर इसकी क्या प्रतिक्रिया है? यह पुरानी शिक्षा नीति से कैसे बेहतर है? एक शिक्षा मंत्री होने के नाते आप हमें बताएं?

कंवरपाल सिंह, मंत्री, हरियाणा- अभी हमारी जितने शिक्षकों और दूसरे लोगों से बात हो पाई है, उन सभी ने इस शिक्षा नीति की तारीफ की है। हम नई एजुकेशन पॉलिसी को लेकर आए है, यह बहुत अच्छी है।  जितना बड़ा अध्ययन इस नई शिक्षा नीति पर किया गया है, उतना अध्ययन और किसी विषय पर नहीं किया गया है। दो लाख से ज्यादा लोगों के साथ संपर्क किया गया। उनसे बातचीत की गई। जिसमें कि चुने हुए प्रतिनिधि भी थे और अधिकारी भी। यह सबके साथ हुई बातचीत और अध्ययन के बाद निकला हुया विचार है।  मुझे लगता है कि इस शिक्षा नीति का परिणाम आने वाले समय में बहुत अच्छे होगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी ने जानकारी दी है  कि प्रधानमंत्री ने इसको पूर्ण रुप से लागू करने वर्ष 2030 तक की समय अवधि तय की गई है। पर हमारे मुख्यमंत्री ने इसको 2025 तक लागू करने को कहा है और इस दिशा में हमने कार्य शुरू भी कर दिया है। हमने 40 से अधिक स्कूलों में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को छठवीं क्लास से लागू करना शुरू कर दिया है।  पूरे देश में हमारा राज्य अभी तक नंबर वन है।  डेढ़ लाख से ज्यादा बच्चे नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तरह शिक्षा ले रहे हैं।

उदय इंडिया – आपने शिक्षा तथा स्कूलों पर काफी इन्वेस्टमेंट किया है। स्कूलों में मैनेजमेंट कैसे हो, पीने का पानी कैसे मिले, बिजली कैसे मिले, बच्चों को अच्छा खाना कैसे मिले आपने स्कूल में बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए शिक्षकों की भर्ती तो की। लेकिन  प्राइवेट बच्चों के समग्र विकास पर ध्यान देता है, सरकारी संस्थान उतना नहीं करते।  सरकार अगर एक रुपए विकास के लिए देती है तो जमीनी स्तर पर आधा भी नहीं बच पाता है। इसके लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?

कंवरपाल सिंह, मंत्री, हरियाणा- हमने सीबीएसई के साथ स्कूलों में संस्कृति मॉडल को भी जोड़ा स्कूल में अच्छा इन्फ्राट्रक्चर देने का प्रयास कर रहे हैं।  आने वाले 2 सालों में हम काफी परिवर्तन करने का प्रयास कर रहे हैं।  लोगों की मानसिकता होती है कि फ्री की शिक्षा से विकास नहीं होगा।  इस मानसिकता को बदलने के लिए हमने स्कूलों में इन्फ्राट्रक्चर तथा अच्छे मॉडल को और बढ़ावा दिया है।  हम सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों से बेहतर कर देंगे।  पर इसके लिए हमें थोड़ा समय चाहिए।  पहले लोग यह सोचते भी नहीं थे कि हमारा बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़े। लेकिन हमें 2 साल और दीजिए। इतने समय में हम सरकारी स्कूलों और प्राइवेट के बीच कंपटीशन तैयार कर देंगे। जिसके बाद लोग प्राइवेट स्कूल में जाने से पहले सरकारी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाने के बारे में सोचेंगे।

उदय इंडिया- आपके पास पर्यावरण मंत्रालय भी है।  जलवायु परिवर्तन इतना बढ़ गया है कि जो कि पूरे विश्व के लिए एक चिंता का विषय है। साथ ही हरियाणा भारत का एक ऐसा राज्य है जहां जंगल और पेड़-पौधे का घनत्व सबसे कम है। इसको बढ़ावा देने के लिए आपके क्या कदम उठाए हैं?

कंवरपाल सिंह, मंत्री, हरियाणा- हां, हमारे पास जंगल का क्षेत्रफल बहुत कम है।  हमने इसके लिए वनों के क्षेत्रफल को बढ़ावा देने के लिए पंचायत वगैरह के इलाके में खाली पड़ी जमीनों पर पेड़ लगाने का प्रयास किया है।  जिसमें कि वन क्षेत्र को बढ़ावा मिल सके। हमने 2 से 3 हजार एकड़ में पेड़ों का बाग लगाया है। यह प्रयास सफल होने के बाद, हमने वन रोपण को बढ़ावा दिया है। आने वाले समय में इन्हीं प्रयासों से जलवायु परिवर्तन को रोका जा सकेगा।  जो लोग अपने खेतों में अपनी तरफ से पेड़ लगाते हैं तो उनको पेड़ के पालन-पोषण के लिए मेहनताना मिलना चाहिए।  यह बात मैनें माननीय मुख्यमंत्री जी को कहीं तो उन्होंने इससे सहमति जताई। इसके बाद जो लोग अपनी तरफ से पेड़ लगाएंगे,  उनको हम एक एकड़ का 7000 से लेकर 14000 रुपया 3 साल तक किसानों को मिलेगा। हमने एक मीटिंग में यह बात रखी है कि जितने भी श्मशान घाट हैं, जिसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं है, वह जितनी भी एकड़ की भूमि में बना हुआ है।  हम पंचायत के साथ मिलकर यह प्रयास रहेगा कि उसके चारों ओर पेड़ लगाए जाने का टारगेट रखा गया है।  भले ही हमारे पास जमीनें कम हों। लेकिन इसके बाद भी हम दूसरों से ज्यादा पेड़ लगा सकते हैं। हमारे पास कुल वन क्षेत्र 3.5 प्रतिशत है। जिसको 10% करने का हमारा प्रयास है।  ताकि पेड़ों की क्वालिटी अच्छी हो और ज्यादा पेड़ लगे और ज्यादा से ज्यादा औषधि मिल पाए।

उदय इंडिया- आपके पास संस्कृति विभाग भी है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में ही गीता का उपदेश दिया गया। जिसके लिए भारत ही नहीं विश्व भी हरियाणा की चर्चा करता है।  राष्ट्रपति जी के द्वारा भी गीता समारोह में भी इस बात का उल्लेख किया गया। इस बारे में आप हमें बताएं ?

कंवरपाल सिंह, मंत्री, हरियाणा- गीता जयंती तो पहले से ही मनाई जाती है। जिस स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण में गीता को उपदेश दिया, वह बहुत महत्वपूर्ण जगह है।  भागवत गीता ही अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है।  दुनिया का मार्गदर्शन के लिए यह एक अनूठा ग्रंथ है।  यह हमारे लिए ही नहीं पूरी मानवता के लिए एक अनूठा ग्रंथ है।  इसमें मानवता के लिए क्या कर्तव्य और उसके बारे में सारी जानकारी दी गई है आज विश्व स्तर पर इस जयंती को मनाया जाता है।

उदय इंडिया-  आपके पास शिक्षा विभाग भी है संस्कृति भी है।  क्या आपको यह प्रयास नहीं करना चाहिए कि स्कूलों में बच्चों को भी भागवत गीता पढ़ाई जाए। इसके लिए कुछ प्रयास होना चाहिए?

कंवरपाल सिंह, मंत्री, हरियाणा- हमने इस साल स्कूल के पाठ्यक्रम के साथ गीता को पढ़ाना शुरू कर दिया है।  दूसरा हमने भगवान श्रीकृष्ण के विराट रूप की स्थापना की है।  भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति का सौंदर्य मन मोह लेने वाला है।  उसके लिए हम 200 करोड़ से ज्यादा खर्च कर रहे हैं।  मंदिर की मूर्ति के साथ वहां कलाकृतियों की प्रस्तुति लाइट और डेकोरेशन के माध्यम से होगी तथा यह world-class मंदिर होगा जो कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.