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सभी का अस्तित्व सुनिश्चित करें

सभी का अस्तित्व सुनिश्चित करें

समाज के कमजोर वर्गों का ध्यान रखा जाना चाहिए। हमें ऐसे समाज को संगठित करना चाहिए जो मजबूत हो क्योंकि सभी के अस्तित्व को सुनिश्चित करना मजबूत वर्ग का कर्तव्य है। कमजोरों की रक्षा करना बलवानों का कर्तव्य है। समाज की एकता का सिद्धांत हमारी संस्कृति, मातृभूमि के प्रति समर्पण, हमारी पूर्वजों की परंपरा है और इसे हिंदुत्व कहा जाता है। ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग के समापन में आरएसएस के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत की टिप्पणियां हैं, जो 08 दिसंबर, 2022 को रेशिमबाग, नागपुर में संपन्न हुआ। इस अवसर पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने पुनः इस बात पर बल दिया कि सारा विश्व भारत की ओर मार्गदर्शन के लिए देख रहा है। और इसकी पुष्टि इस तथ्य से होती है कि भारत ने G20 की अध्यक्षता प्राप्त की, जो कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। भारत को समृद्ध करने और उसे ‘विश्वगुरु’ बनाने में संघ का कार्य महत्वपूर्ण है।

 उन्होंने स्वयंसेवकों से अपने-अपने क्षेत्र में चमकने और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने और दूसरे लोगों के लिए रोल मॉडल बनने को कहा। हमारा राष्ट्रीय चरित्र क्या है – पूरी दुनिया को संतुलन बनाए रखना सिखाना क्योंकि सारी दुनिया एक है और हम पूरी दुनिया से प्यार का रिश्ता रखेंगे।

हिन्दू कौन है, इसकी व्याख्या करते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि जो भारत को अपना मानते हैं, जो भारत के प्रति श्रद्धा रखते हैं, जो उस संस्कृति के रीति-रिवाजों पर चलते हैं, जो इस प्रकार की एकता का परिचय देते हैं, और जो इससे ओत-प्रोत हैं, वे हिंदू हैं। इस संस्कृति के संवर्धन के लिए खून बहाने वाले पूर्वजों के गौरव को ध्यान में रखते हुए जो उनका अनुसरण करता है, वह हिंदू है, चाहे वह कोई भी भाषा बोलता हो, चाहे वह किसी भी पूजा पद्धति को अपनाता हो या नहीं अपनाता हो, चाहे वह कोई भी वेश धारण क्यों न करता हो, चाहे वह किसी भी धर्म और जाति में पैदा हुआ हो।

 

उदय इंिडया ब्यूरो

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