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भटकती राह पर

भटकती राह पर

 

 

 

 

दीपक कुमार रथ
(editor@udayindia.in)

राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा को लेकर देश के कई राज्यों से गुजरे, एक लोकतांत्रिक देश में यह उनका अधिकार भी है। अपनी इस यात्रा में राहुल ने देश की आम जनता से जुड़ने और उनकी समस्याओं को समझने की पूरी कोशिश की। लेकिन हाल ही में अपनी यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने भाजपा पर तेज हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्र सरकार की आलोचना की तथा भाजपा को शैतान साबित करने की कोशिश की। राहुल का आरोप है कि भाजपा ने देश को हिंदू और मुसलमान में बांट दिया।  यह ना केवल उनकी अज्ञानता को दर्शाता है, बल्कि मुस्लिम वोटरों को लुभाने की कोशिश करते हुए उनके दोहरे चरित्र को भी दिखाता है। उन्होंने बड़ी आसानी से यह भुला दिया कि कैसे कांग्रेस पार्टी ने देश के बहुसंख्यक हिंदुओं की अनदेखी करते हुए संविधान में धर्मनिरपेक्ष शब्द को शामिल किया। कांग्रेस के शासनकाल में देश में सबसे ज्यादा हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए। यही नहीं कांग्रेस की तरफ से दो बार प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह ने देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का बताया था। इन सभी तथ्यों को देखते हुए कहा जा सकता है कि अगर राहुल गांधी खुद को गंभीर राजनेता के रुप में शामिल करना चाहते हैं, तो उन्हें कम से कम तथ्यों की जानकारी तो हासिल कर लेनी चाहिए थी। ऐसी गलतियों को कोई स्वीकार नहीं कर सकता है। वास्तविकता यह है कि कांग्रेस सिर्फ अपनी पुरानी तुष्टिकरण की नीति पर ही चलना चाहती है। इसकी पुष्टि इस तथ्य से भी होती है कि कांग्रेस पार्टी देश हित से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक बहस से दूर रहती है और किसी तरह का तार्किक सुझाव नहीं देती। लेकिन सड़कों और गलियों पर हंगामा मचाने से बाज नहीं आती, जैसा कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी देखा गया। ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी को पर्दे के पीछे से चलाने वाली आभासी अध्यक्ष सोनिया गांधी इस देश और नागरिकों की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं हैं।  वह महाभारत के धृतराष्ट्र की तरह हो गई हैं, जो कि अपने अयोग्य पुत्र को देश पर राज करते हुए देखने के लिए बेचैन हैं।

राहुल गांधी ने जो नया रुप धारण किया है, वह कोई नया नहीं बल्कि नई बोतल में पुरानी शराब की तरह है। भले ही कांग्रेस पार्टी लगातार उनकी छवि को सुधारने के लिए नए-नए प्रयोग कर रही है। लेकिन राहुल गांधी की अजीबोगरीब बयानबाजी थम नहीं रही है, जिसकी वजह  से उनकी छवि एक मसखरे जैसी बन गई है। इन कारणों से राहुल गांधी को रिलांच करने का कार्यक्रम ना केवल खटाई में पड़ सकता है, बल्कि इससे उनकी अज्ञानता भी सामने आती है। इससे यह भी साबित होता है कि राहुल गांधी और उनके सलाहकारों की टीम का कांग्रेस पार्टी पर पूरी तरह नियंत्रण कायम है और पार्टी अध्यक्ष का पद सिर्फ दिखावा है। वास्तव में कांग्रेस पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र कभी था ही नहीं।

आजादी के पहले भी निर्णय लेने का अधिकार गांधी और नेहरु जैसे चंद लोगों के पास रिजर्व था। जिसके कारण सुभाष चंद्र बोस जैसे लोग हाशिए पर चले गए। भारत में राजा-महाराजाओं की लंबी परंपरा रही है। जिसकी वजह से कांग्रेस पार्टी इतने दिनों तक सत्ता पर काबिज रही। लेकिन चाटुकारों की इस पार्टी ने भारतीय राजनीति को बहुत नुकसान पहुंचाया है। यही कारण है कि साल 2014 आते आते जनता इतनी परेशान हो चुकी थी कि उसने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया।  लेकिन कांग्रेस अब भी सीख लेने के लिए तैयार नहीं है। कांग्रेस पार्टी का अंदरुनी माहौल असंतोष और घुटन से भरा हुआ है। जिसकी प्रमुख वजह है नेहरु-गांधी परिवार और उनके चमचों का पार्टी पर सख्त नियंत्रण। कांग्रेस में व्याप्त भाई-भतीजावाद 137 साल पुरानी इस पार्टी को धीरे-धीरे इसके अंत की तरफ धकेल रहा है।

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