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नया साल नई चुनौतियां मोदी का विश्व जोड़ो अभियान

नया साल नई चुनौतियां मोदी का विश्व जोड़ो अभियान

नया साल 2023 शुरू हो गया है। भारत के लिये यह साल राष्‍ट्रीय मोर्चे पर ही नहीं बल्कि अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर अपने आपको सुव्‍यवस्थित और दूरदर्शी साबित करने के लिये एक सुनहरा मौका होगा। अपने आपको सुव्‍यवस्थित करने की चुनौतियां बड़ी हैं जिसमें अर्थव्‍यवस्‍था को कोरोनाकाल की मंदी से उबारकर विकास को गतिवान बनाना सबसे अहम है। जब हम विकास की बात करते हैं तो वह नये राजमार्ग और इमारतें बनाने तक सीमित नहीं है। हमे भारत को समृद्ध बनाने के लिये विकास के पहिये पर भविष्‍य की तमाम जरूरतों के साथ सवारी करनी होगी।

सबसे पहली जिम्‍मेदारी खाद्य सुरक्षा की है और सौभाग्‍य से अच्‍छी फसलों के कारण हमारे अनाज के भंडार भरे पड़े हैं और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करनेवालों को मुफ्त अनाज देने की स्थिति में हैं। कहते हैं कि जीवन यापन के लिये रोटी कपड़ा और मकान जरूरी है। केंद्र की नरेन्‍द्र मोदी सरकार ने इन तीनों चीजों के साथ शिक्षा को जोड़कर नई पीढ़ी के भविष्‍य को संवारने के लिये नई राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के माध्‍यम से शिक्षा को सरल और सुलभ बनाया है। शिक्षा किसी एक भाषा की मोहताज न हो और इस संकल्‍प के साथ अब मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढाई को भी हिंदी और बाकी भारतीय तक पहुंचाने के लिये यह साल अहम साबित हो सकता है।

सरकारी खजाने के हालात किसी भी देश की असली ताकत को ज्‍यादा अच्‍छी तरह से बयां करते हैं। कर संग्रह की दृष्टि से वित्‍त वर्ष 2022-2023 के अबतक अपेक्षा से कहीं अधिक लाभदायक रहा है। दिसंबर 2022 में जीएसटी के माध्‍यम से सरकारी खजाने में डेढ़ लाख करोड़ रूपये जमा हुये जिसके कारण शेयर बाजार में फिर से रौनक लौट आई। राज्‍यों को भी जीएसटी के माध्‍यम से आय में बढ़ोत्‍तरी के कारण बड़ी राहत मिली है। पहले जीएसटी के संग्रहण को लेकर तरह तरह की आशंकायें व्‍यक्‍त की जा रहीं थीं लेकिन अब यह शिकायत दूर होती जा रही है। उम्‍मीद की जा सकती है कि नये साल में कर संग्रह न केवल बढ़ेगा बल्कि उसकी प्रामाणिकता को लेकर पैदा होने वाले संशय का निराकरण भी होगा।

गुजरे साल का अंत आते आते महंगाई के मोर्चे पर राहत की खबर मिली। नवंबर महीने में खुदरा महंगाई दर 11 महीने के निचले स्तर 5.88 फीसदी पर आ गई जो अक्टूबर 2022 में 6.77 फीसदी रही थी। एक वर्ष पूर्व नवंबर 2021 में खुदरा महंगाई दर 4.91 फीसदी रही थी। खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर में भी भारी कमी आई है। नवंबर 2022 में खाद्य महंगाई दर 4.67  फीसदी पर आ गई है जबकि अक्टूबर में यह 7.01 फीसदी थी। वहीं नवंबर महीने में शहरी के साथ ग्रामीण दोनों ही इलाकों में खाद्य महंगाई में कमी आई है।

कारोनाकाल के कारण पूरी दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था चरमरा गई थी जिससे उबरने के लिये विकसित देशों को कड़ी मशक्‍कत करनी पड़ रही है। भारत भी इससे अछूता नही रहा लेकिन उसने आर्थिक और नीतिगत उपायों से अपनी अर्थव्‍यवस्‍था को हाथ से कभी भी फिसलने नहीं दिया। नये साल में भारत पर अपनी अर्थव्‍यवस्‍था को गति देने की बडी जिम्‍मेदारी है और यह फरवरी में आनेवाले केंद्रीय बजट पर काफी हद तक निर्भर करेगा। मोदी सरकार के लिये लिये यह एक बडी चुनौती है और उसके राजनीतिक भविष्‍य को आगे ले जाने में अहम भूमिका अदा कर सकता है। चुनावी दृष्टि से 2023 भारत की राजनीति की दिशा का भांपने का अवसर देगा। इस साल कर्नाटक, राजस्‍थान, मध्‍यप्रदेश और छत्‍तीसगढ के विधानसभा चुनाव होने हैं। पिछली दफा इन राज्‍यों में कांग्रेस ने बाजी मारी थी जहां पहले भारतीय जनता पार्टी की सरकारें थीं। कर्नाटक एवं मध्‍यप्रदेश में राजनीतिक उथल पुथल ने समीकरण पलट दिये और भाजपा फिर से सरकार बनाने में कामयाब हो गई थी। ये चारो राज्‍य ऐसे हैं जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच फिर सीधी टक्‍कर होने की उम्‍मीद है। इसी के साथ तेलंगाना के विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राष्‍ट्रीय दलों को सत्‍तारूढ क्षेत्रीय दल भारत राष्‍ट्र समिति  (तेलंगाना राष्‍ट्र समिति) का सामना करना पड़ेगा।

दरअसल, 2023 में दस राज्‍यों के विधानसभा चुनाव होने हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे बड़े राज्यों के अलावा पूर्वोत्तर के त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड और मिजोरम में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। जम्मू-कश्मीर में लगातार की जा रही तैयारियों के बीच यह संभावना जताई जा रही है कि विधानसभा चुनाव कराने के अपने वादे के तहत सरकार इस राज्य में भी इसी साल विधानसभा का चुनाव करवा सकती है। ऐसे में  2024 में होने वाले लोक सभा चुनाव से पहले 2023 में दस राज्यों में होने वाले चुनाव यह संकेत देंगे कि देश में राजनीतिक हवा किस राजनीतिक दल के पक्ष में बह रही है।

रक्षा तैयारियों की दृष्टि से 2023 चुनौती भरा रह सकता है। पाकिस्‍तान से जुड़ी सरहद पर उसे चौकस रहने के साथ चीन से जुड़ी सरहद कड़ी नजर रखनी होगी। चीन भारत की सरहद में घुसपैठ करने की कोशिश से बाज नही आ रहा है। उसपर हमारी फौजों को कडी नजर रखने की जरूरत है। कोरोना काल में चीन की विश्‍वसनीयता और कम हुई जिसके कारण वैश्विक संतुलन बिगडा है। ताईवान को लेकर अमरीका के साथ उसके संबंध बिगडने के बाद चीन की आर्थिक ताकत भी कमजोर पडी है और वह बुरी तरह बौखलाया हुआ है। भारत के लिये यह स्थिति आर्थिक और सैन्‍य दृष्टि से लाभकारी है।

भारत अपनी रक्षा तैयारियों को लेकर हर उपाय कर रहा है। मोदी सरकार ने 36 राफेल लडाकू विमान के लिये फ्रांस के साथ समझौता किया था। उसके तहत सारे राफेल लड़ाकू विमानों की आपूर्ति हो चुकी है और उन्‍हें भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल किया जा चुका है। इस समय भरोसे कहा जा सकता है कि उन्‍नत मिसाइल टेक्‍नालाजी से लैस भारतीय सेनाओं की सैन्‍य और मारक क्षमता दुश्‍मनों के छक्‍के छुड़ाने के मुकाम पर पहुंच गई है। भारत अब रक्षा क्षेत्र में निर्यात को लेकर गंभीर दिखने लगा है। तीस से अधिक भारतीय रक्षा कंपनियों ने इटली, मालदीव, श्रीलंका, रूस, फ्राँस, नेपाल, मॉरीशस, श्रीलंका, इज़रायल, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, भूटान, इथियोपिया, सऊदी अरब, फिलीपींस, पोलैंड, स्पेन जैसे देशों को हथियारों और उपकरणों का निर्यात किया है। निर्यात में व्यक्तिगत सुरक्षा सामग्री, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणाली, इंजीनियरिंग यांत्रिक उपकरण, अपतटीय गश्ती ज़हाज़, उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर, एवियोनिक्स सूट, रेडियो सिस्टम तथा रडार सिस्टम शामिल हैं।

रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हर पहल पर पैनी नजर रखे हुए हैं। इस काम में निजी क्षेत्र और स्टार्ट-अप्स को भी जोड़ा जा रहा है। दूसरे देशों के रक्षा शोध और विकास तंत्र के साथ ज़्यादा से ज़्यादा संपर्क बनाकर और धन अर्जित करने से जुड़े नए-नए तौर-तरीक़े अपनाने से इन प्रयासों को बल मिलेगा। भारत ने 2024 तक 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में वर्ष 2023 में रक्षा क्षेत्र में भारत द्वारा लंबी छलांग लगाने की उम्‍मीद की जा सकती है।

भारत ने जी20 समूह की अध्‍यक्षता संभाली है और इस वर्ष पूरी दुनिया की निगाहे येन केन प्रकारेण टिकी रहेंगी। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी इसे देश के लिये बड़ा अवसर और बड़ी जिम्‍मेदारी के रूप में देख रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर 2014 में नरेन्‍द्र मोदी के सत्‍ता में आने के बाद से अब तक देश की विदेश नीति को निरंतर मजबूत करते दिखे हैं। नरेन्‍द्र मोदी विश्‍व नेताओं की अगली कतार में खड़े हैं। जिस गर्मजोशी से मोदी  दुनिया के तमाम विश्‍व नेताओं से मिलते हैं उसमें भारत के आत्‍मविश्‍वास की झलक देखी जा सकती है। कारोनाकाल के समय मोदी की युक्रेन के साथ युद्धरत रूस को दी गई यह नसीहत दुनिया के हर नेता के दिल को छू गई कि यह वक्‍त युद्ध का नही है।

भारत ने एक दिसंबर 2022 को आधिकारिक तौर पर G-20 की अध्यक्षता संभाल ली है। जी20 समूह दुनिया की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जो विकास संबंधी योजनाओं का खाका तैयार करता है। इसकी अध्यक्षता संभालते ही प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समय भारत की आध्यात्मिक परंपरा से प्रोत्साहित होने का है जो वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिये मिलकर काम करने की नसीहत देता है।

भारत को जी20 समूह देशों की अध्यक्षता मिलते ही मोदी सरकार तैयारी में जुट गई है। इसके लिए एक तरफ अलग-अलग विषयों पर वर्किंग ग्रुपों की बैठक की तारीख और स्थान तय किया जा रहा है। इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री मोदी ने गत दिसंबर में सर्वदलीय बैठक में सभी राजनीतिक दलों से भारत की अध्‍यक्षता में जी 20 के आयोजनों में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “यह एक सम्मान है जो भारत के लिए आया है न कि किसी पार्टी या व्यक्ति के लिए। यह प्रत्येक भारतीय के लिये गर्व का विषय है। इसलिए हम सभी को सहयोग से काम करना चाहिए।” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के लिये जी20 की अध्यक्षता समूचे राष्ट्र की जिम्‍मेदारी है और यह दुनिया को अपनी ताकत दिखाने का एक अनूठा अवसर है।

जी20 समूह देशों की शिखर बैठक  नई दिल्ली में 9 और 10 सितंबर 2023 को होगी।  इसके पहले विभिन्न विषयों पर समूह देशों के मंत्रियों, अधिकारियों और सिविल सोसाइटी के बीच कई बैठकें होंगी। आजादी के अमृत महोत्सव काल में मिली इस अध्यक्षता को मोदी सरकार उससे जोड़कर भी आयोजित करने की योजना बना रही है। सितंबर में होने वाली शिखर बैठक से पहले देश के 75 शहरों में 75 बैठकें आयोजित करने की महत्‍वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो गया है।

वर्ष 2023 राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर के नये घटनाक्रमों के आयोजनों की तैयारी में जुट गया है। अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं जिसको लेकर राजनीतिक गहमागहमी रहेगी। हर किसी की नजर जनता जनार्दन को लुभाने पर टिकी है। सत्‍तापक्ष सत्‍ता में बने रहने की कवायद करेगा तो विपक्ष फिर से सत्‍ता में वापसी के तानेबाने बुनेगा। बहरहाल यह साल मोदी के लिये सबका साथ सबका विकास और सबका विश्‍वास अर्जित करने के साथ जी20 के माध्‍यम से ‘’विश्‍व जोड़ो’’ अभियान को नई उंचाईयों पर ले जाने का एक सुनहरा अवसर भी देगा।

 

 

अशोक उपाध्‍याय
पूर्व संपादक, यूनीवार्ता

 

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