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सुराज बनाम जंगलराज

सुराज बनाम जंगलराज

नरेन्द्र मोदी की बीते 26 जुलाई को मुजफ्फरपुर और उसके बाद गया में हुई रैली में नीतीश महागठबंधन को मात देने के लिए बनाई गई रणनीति की पूरी फिल्म देखने को मिल गई। मोदी ने मुजफ्फरपुर में नीतीश-लालू दोस्ती को सिर्फ सत्ता का स्वार्थ करार दिया। नरेन्द्र मोदी ने जनता के सामने बार-बार जंगलराज पार्ट-2 शब्द और नीतीश का राजनीतिक डीएनए खराब है कहा। हालांकि   डीएनए वाले बयान पर बीजेपी घिर गई है। पीएम मोदी ने गया के भाषण में जंगलराज, जहर और जेल शब्दों का आखिर मतलब क्या है ?

बिहार में चुनावी रणभेरी बज चुकी है। एक तरफ बीजेपी वाली एनडीए की सेना है तो दूसरी तरफ नीतीश का महागठबंधन। दोनों गठबंधन एक दूसरे पर आरोपों-प्रत्यारोपों की बौछार कर रहे हैं। सच तो ये है कि बिहार चुनाव में न तो एनडीए गठबंधन के पास कोई मुद्दा है, न ही नीतीश महागठबंधन के पास। नीतीश महागठबंधन के पास मानसिक ताकत है उसके पास सीएम प्रत्याशी हैं। लेकिन, बीजेपी के पास नीतीश टाइप नेता का अभाव है। नीतीश महागठबंधन के बीच सीटों का बंटवारा भी हो चुका है। जदयू-आरजेडी 100-100 सीटों पर जबकि कांग्रेस 40 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

ऐसे में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के लिए बिहार विधानसभा का चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। ऐसा इसलिए क्योंकि लोकसभा चुनाव 2014 में शानदार जीत के बाद अमित शाह के सिर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का ताज बंधा था। लेकिन केंद्र्र की नाक के ठीक नीचे चंद महीनों बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल एंड कंपनी के हाथों बीजेपी का सूपड़ा साफ होने के बाद अमित शाह की सियासी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े हुए। अब अमित शाह और बीजेपी का लक्ष्य नीतीश सरकार को बिहार विधानसभा चुनाव में सत्ता से हटाकर बिहार की सत्ता पर काबिज होने का है। ऐसे में बीजेपी नीतीश को उन्हीं के बनाये चक्रव्यूह में घेरने में लगी है। नरेन्द्र मोदी ने बीते 26 जुलाई को मुजफ्फरपुर और उसके बाद गया में रैली की। इसमें बिहार चुनाव को लेकर बीजेपी के रणनीति की पूरी सियासी फिल्म देखने को मिल गई।

जंगलराज पार्ट-2, जहर और जेल शब्दों का मतलब क्या?

नरेन्द्र मोदी ने बिहार के मुजफ्फरपुर और गया की रैली में नीतीश-लालू की दोस्ती को सिर्फ सत्ता का स्वार्थ करार दिया। नरेन्द्र मोदी ने बिहार की जनता के सामने बार-बार जंगलराज पार्ट-2, जहर और जेल जैसे शब्दों और जदयू नेता नीतीश कुमार का राजनीतिक डीएनए खराब है, वाक्य का प्रयोग किया। साथ ही बिहार को बीमारु राज्य भी बताया। हालांकि डीएनए वाले बयान पर बीजेपी घिर गई है। नीतीश कुमार ने इसे अस्मिता का मुद्दा बनाकर 50 लाख बिहारियों के नाखून और बाल डीएनए जांच के लिए नरेन्द्र मोदी को भेजने का फैसला किया है। दरअसल, बिहार में नरेन्द्र मोदी और बीजेपी की रणनीति लालू विरोध को केंद्र में रखकर चुनाव लडऩे की है। नरेन्द्र मोदी अपनी रैलियों में आक्रामक तरीके से जंगलराज पार्ट-2 शब्द बार-बार बोलकर, भीड़ से उसके विरोध में जवाब मांगते हैं। बीजेपी को उम्मीद है कि इससे, उसका सवर्ण वोट और वैश्य वोट भयभीत होकर उसके साथ कायम रहेगा, क्योंकि लालू-राबड़ी के 15 वर्षों के राज में यही तबका सबसे ज्यादा पीडि़त था। बीजेपी की दूसरी बड़ी रणनीति यह है कि इन बातों से नीतीश कुमार की विकास पुरुष और सुशासन बाबू वाली छवि जनता के दिमाग में और धुंधली हो जाये और पूरा चुनाव लालू के जंगल राज पर केंद्रित कर लड़ा जाए।

29-08-2015

साथी बदला तो बिहार बीमारु हो गया

जहां तक नरेन्द्र मोदी द्वारा बिहार को बीमारु राज्य बताने का सवाल है, यही बीजेपी जब नीतीश कुमार के साथ बिहार की सत्ता का स्वाद ले रही थी तो बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी, जदयू नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पीएम मैटेरियल, विकास पुरुष और सुशासन बाबू तक कहते फिरते थे। जूनियर मोदी ने नीतीश कुमार के शासन का गुणगान करते हुए बिहार की आर्थिक विकास दर देश में सबसे ज्यादा होने का बयान कई बार दिया था।

यादव वोटों पर बीजेपी की नजर    

सच तो यह है कि नीतीश-बीजेपी के राज में बिहार में अपराधियों पर लगाम कसी गई। फास्ट ट्रैक कोर्ट से कई खूंखार अपराधियों को सजा हुई, सड़कें बनीं, गांवों में बिजली पहुंची और सरकारी अस्पतालों की हालत भी सुधरी। ऐसे में जदयू और नीतीश कुमार को पटकनी देने के लिए बीजेपी की तीसरी बड़ी रणनीति दलित, महादलित, यादव, हिंदुत्ववादी और अति पिछड़े वोट बैंक को लालू-नीतीश महागठबंधन से तोडऩे की भी है। फिलहाल बीजेपी और एनडीए के साथ गठबंधन के समीकरणों के अनुसार सवर्ण, वैश्य, कोइरी, दलित, महादलित वोट तो दिख रहे हैं। ऐसे में अपनी रैलियों में जहर और जेल शब्द का प्रयोग करने के पीछे नरेन्द्र मोदी की सियासी रणनीति यादव वोटों को लालू यादव से दूर फेंकने की है। नरेन्द्र मोदी के जहर और जेल वाले बयानों को यादव मतदाताओं को एक साथ कई खास संकेत देने की कोशिशों के तौर पर भी देखा जा रहा है कि नीतीश कुमार के दुबारा सीएम बनने पर बिहार में यादवों के बुरे दिन आ सकते हैं। नीतीश फिर सीएम बने तो सुशासन का राज दिखाने के नाम पर यादवों का उत्पीडऩ हो सकता है या उनकी राजनीतिक हैसियत लालू राज की तुलना में घटकर शून्य के बराबर हो जाएगी। वैसे भी नीतीश कुमार के सीएम कैंडिडेट होने से यादव मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग नाराज भी हैं। ऐसे में एनडीए गठबंधन की कोशिश खासकर उन सीटों पर यादव वोटों को अपने पाले में करने की है जिन सीटों पर जदयू का उम्मीदवार हो। अगर राजद सुप्रीमो लालू यादव के जहर पीने वाले बयान से गुस्साए, नीतीश कुमार के सीएम कैंडिडेट बनने से नाराज और नरेन्द्र मोदी के संकेतों को समझकर 40 फीसदी यादव मतदाता भी एनडीए प्रत्याशियों के पक्ष में वोट करेंगे तो बिहार में बीजेपी और उसके सहयोगियों की बल्ले-बल्ले हो जाएगी। लालू यादव और नीतीश कुमार सभी जातीय और सामाजिक समीकरणों के अपने पक्ष में होने के बावजूद हाथ मलते रह जाएंगे। ऐसे में भी अगर एनडीए गठबंधन बिहार विधानसभा चुनाव जीतने में कामयाब नहीं हो सक तो अमित शाह एंड कंपनी हारे को हरिनाम तक के लिए तरस जाएंगे और हाशिये पर फेंके गये बीजेपी नेता जमकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ भड़ास निकालेंगे। इसके बाद पूरे देश में बीजेपी और सबसे ज्यादा केंद्र की सत्ता पर काबिज नरेन्द्र मोदी सरकार की साख खतरे में पड़ जाएगी। लेकिन क्या ऐसा होगा?

कुमार मयंक

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