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कलवरी श्रेणी की पांचवी पंडुब्बी ‘वागीर’ आज भारतीय नौसेना में होगी शामिल

कलवरी श्रेणी की पांचवी पंडुब्बी ‘वागीर’ आज भारतीय नौसेना में होगी शामिल

भारतीय नौसेना में सोमवार 23 जनवरी को  कलवरी श्रेणी की पांचवीं पनडुब्बी वागीर शामिल होने जा रही है। बता दें कि इससे पहले भारतीय नौसेेना में कलवरी श्रेणी की चार अन्य पंडुब्बीयां पहले ही शामिल की जा चुकी हैं।  कलवरी श्रेणी की चार पनडुब्बियों को भारतीय नौसेना में शामिल किये जाने के बाद 26 जनवरी 2023 गणतंत्र दिवस से ठीक पहले ‘वागीर’ नाम की पनडुब्बी को नौसेना में शामिल किया जा रहा है। नौसेना  प्रमुख एडमिरल आर हरिकुमार  सोमवार को  एक समारोह में पनडुब्बी वागीर को नौसेना के बेड़े में शामिल करेंगे।

वागीर की खासियत: 

बता दें कि फ्रांस के मेसर्स नेवल ग्रुप की मदद से बनी पनडुब्बी वागीर को मुंबई के मझगांव डॉक पर शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा बनाया गया है।  आधुनिक तकनीकी से स्वदेश में बनी ये पनडुब्बी भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ते कदम का परिचायक है। कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी  घातक  हथियार और  आधुनिक जासूसी तकनीकी से लैस है।  वागीर 50 दिन तक पानी में रह सकती है और 50 फीट की गहराई तक जा सकती है। वागीर के नौसेना के बेड़े में शामिल होने से नौसेना की मारक क्षमता में और भी इज़ाफ़ा होगा। ये इतनी ख़तरनाक है कि पानी के अंदर ही दुश्मन का खेल बिगाड़ सकती है।  इसलिए इसे नाम दिया गया है ‘वागीर’।  वागीर एक  फ़ारसी शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ  होता है ख़तरनाक शिकारी। यानि की बता दें कि जिस प्रकार एक शिकारी शाहस और सूझ-बूझ के साथ शिकार करता है ठीक उसी प्रकार वागीर भी दुश्मनों को चंद समय में मारने की क्षमता रखती है।

अधिकारियों ने बताया था कि इससे पहले भारतीय नौसेना में शामिल हुई कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी  वागीर को 01 नवंबर 1973 को ‘कमीशन’ किया गया था और इसने निवारक गश्त सहित कई परिचालन मिशन संचालित किये।  लगभग तीन दशकों तक देश की सेवा करने के बाद 07 जनवरी 2001 को पनडुब्बी का सेवामुक्त किया गया। अधिकारियों नें बताया कि इस बार वागीर अपने नए अवतार में 12 नवंबर 20 को लॉन्च की गई ‘वागीर’ पनडुब्बी को अब तक की सभी स्वदेशी निर्मित पनडुब्बियों में सबसे कम निर्माण समय में पूरा होने का गौरव प्राप्त है। ‘INS वागीर’ पिछले दो साल में भारतीय नौसेना में शामिल होने वाली तीसरी पनडुब्बी है।  बता दे कि वागीर को ‘नया शिकारी’ के नाम से भी  पुकारा जा रहा है।

लेखक- सात्विक उपाध्याय

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